क़ुरआन में अहलेबैत (अ)
إنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا
अहले-बैत (क़ुर्बा) से मोहब्बत (मवद्दत) रसूल की ख़िदमात का वाजिब बदला है जो हक़ीक़त में हमारी ही भलाई के लिए है, जैसा कि क़ुरआन 42:23 में है; ऐ मुहम्मद! ऐलान करो: “मैं तुमसे अपनी मेहनत का कोई बदला नहीं मांगता सिवाय अपने क़रीबी रिश्तेदारों (ख़ानदान) से मोहब्बत के।”
قُل لا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَى
وَمَن يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهُ فِيهَا حُسْنًا
إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ شَكُورٌ
हदीस में अहलेबैत (अ) — हदीस-ए-थक़लैन