ज़्यारत ईमाम अली (अ०स०)
(अलैहिस्सलाम) यौमे ग़दीर 18 ज़िलहिज्जा के दिन-
इमाम की ज़िंदगी बयान करने वाली एक मख़सूस ज़्यारत


मुतबर रिवायतों के मुताबिक़ बयान किया गया है कि इमाम अली इब्ने मुहम्मद अल-हादी (अलैहिस्सलाम) ने यौमे ग़दीर, इमाम अली अमीरुल मोमिनीन (अलैहिस्सलाम) के रौज़े पर यह ज़ियारत पढ़ी, जब अब्बासी हाकिम मुअतसिम ने उन्हें इराक़ बुलाया। (इसमें उनकी ज़िंदगी के तमाम वाक़ेआत का मुकम्मल बयान है।)
اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ رَسُولِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला मुहम्मदिन रसूलिल्लाह
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद ﷺ पर सलाम हो,

خَاتَمِ ٱلنَّبِيِّينَ
ख़ातमिन नबीयीन
जो तमाम नबियों के आख़िरी हैं,

وَسَيِّدِ ٱلْمُرْسَلِينَ
व सय्यिदिल मुर्सलीन
और तमाम रसूलों के सरदार हैं,

وَصَفْوَةِ رَبِّ ٱلْعَالَمِينَ
व सफ़वतिर रब्बिल आलमीन
और रब्बुल आलमीन के चुने हुए हैं,

أَمِينِ ٱللَّهِ عَلَىٰ وَحْيِهِ
अमीनिल्लाह अला वह्यिही
जिन्हें अल्लाह ने अपनी वह्य का अमानतदार बनाया,

وَعَزَائِمِ أَمْرِهِ
व अजाइमि अम्रिही
और अपने पुख़्ता हुक्मों का,

وَٱلْخَاتِمِ لِمَا سَبَقَ
वल ख़ातिमि लिमा सबक़
जिन्होंने पिछली रसालतों पर मुहर लगाई,

وَٱلْفَاتِحِ لِمَا ٱسْتُقْبِلَ
वल फातिहि लिमा इस्तुक़बिल
और आने वाली रहमतों का दरवाज़ा खोला,

وَٱلْمُهَيْمِنِ عَلَىٰ ذٰلِكَ كُلِّهِ
वल मुहैमिनि अला ज़ालिका कुल्लिही
और इन सब पर निगरान बनाए गए।

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों,

وَصَلَوَاتُهُ وَتَحِيَّاتُهُ
व सलवातुहू व तहिय्यातुहू
और उसकी दरूदें और सलाम हों।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ أَنْبِيَاءِ ٱللَّهِ وَرُسُلِهِ
अस्सलामु अला अंबियाइल्लाहि व रुसुलिही
अल्लाह के तमाम नबियों और रसूलों पर सलाम हो,

وَمَلائِكَتِهِ ٱلْمُقَرَّبِينَ
व मलाइकतिहिल मुक़र्रबीन
और उसके मुक़र्रब फ़रिश्तों पर,

وَعِبَادِهِ ٱلصَّالِحِينَ
व इबादिहिस सालिहीन
और उसके नेक बंदों पर।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अलैका या अमीरल मोमिनीन
ऐ अमीरुल मोमिनीन! आप पर सलाम हो,

وَسَيِّدَ ٱلْوَصِيِّينَ
व सय्यिदल वसिय्यीन
और वसियों के सरदार,

وَوَارِثَ عِلْمِ ٱلنَّبِيِّينَ
व वारिसा इल्मिन नबीयीन
और नबियों के इल्म के वारिस,

وَوَلِيَّ رَبِّ ٱلْعَالَمِينَ
व वलिय्य रब्बिल आलमीन
और रब्बुल आलमीन के वली।

وَمَوْلاَيَ وَمَوْلَىٰ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व मौलाया व मौलल मोमिनीन
और मेरे मौला तथा तमाम मोमिनों के मौला।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا دِينَ ٱللَّهِ ٱلْقَوِيمَ
अस्सलामु अलैका या दीनल्लाहिल क़वीम
ऐ अल्लाह के क़ायम दीन! आप पर सलाम हो,

وَصِرَاطَهُ ٱلْمُسْتَقِيمَ
व सिरातहुल मुस्तक़ीम
और उसकी सीधी राह।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلنَّبَأُ ٱلْعَظِيمُ
अस्सलामु अलैका अय्युहन्न नबउल अज़ीम
ऐ बड़ी ख़बर! आप पर सलाम हो,

ٱلَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
अल्लज़ी हुम फ़ीहि मुख़्तलिफ़ून
जिसके बारे में लोग इख़्तिलाफ़ करते हैं,

وَعَنْهُ يُسْأَلُونَ
व अन्हु युसअलून
और जिसके बारे में उनसे पूछा जाएगा।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُسْلِمِينَ
अस्सलामु अलैका या अमीरल मोमिनीन
ऐ अमीरुल मोमिनीन! आप पर सलाम हो।

آمَنْتَ بِٱللَّهِ وَهُمْ مُشْرِكُونَ
आमन्ता बिल्लाहि व हुम मुश्रिकून
आप अल्लाह पर ईमान लाए, जब कि वे शिर्क में डूबे हुए थे,

وَصَدَّقْتَ بِٱلْحَقِّ وَهُمْ مُكَذِّبُونَ
व सദ്ദक़्ता बिलहक़्क़ि व हुम मुकज़्ज़िबून
आपने हक़ को सच्चा माना और वे उसे झुठलाते रहे,

وَجَاهَدْتَ فِي ٱللَّهِ وَهُمْ مُحْجِمُونَ
व जाहद्ता फ़िल्लाहि व हुम मुह्जिमून
आपने अल्लाह की राह में जिहाद किया और वे पीछे हट गए,

وَعَبَدْتَ ٱللَّهَ مُخْلِصاً لَهُ ٱلدِّينَ
व अबद्ता अल्लाह मुख़्लिसन लहुद्दीन
और आपने पूरे इख़लास के साथ अल्लाह की इबादत की,

صَابِراً مُحْتَسِباً حَتَّىٰ أَتَاكَ ٱلْيَقِينُ
साबिरन मुहतसिबन हत्ता अताकल यक़ीन
सब्र और भरोसे के साथ, यहाँ तक कि यक़ीन (मौत) आ पहुँचा।

أَلاَ لَعْنَةُ ٱللَّهِ عَلَىٰ ٱلظَّالِمِينَ
अला लाʼनतुल्लाहि अलज़्ज़ालिमीन
ख़बरदार! ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ ٱلْمُسْلِمِينَ
अस्सलामु अलैका या सय्यिदल मुस्लिमीन
ऐ मुसलमानों के सरदार! आप पर सलाम हो,

وَيَعْسُوبَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व याʼसूबल मोमिनीन
और मोमिनों के रहनुमा,

وَإِمَامَ ٱلْمُتَّقِينَ
व इमामल मुत्तक़ीन
और परहेज़गारों के इमाम,

وَقَائِدَ ٱلْغُرِّ ٱلْمُحَجَّلِينَ
व क़ाइदल ग़ुर्रिल मुहज्जलीन
और रौशन चेहरों वालों के पेशवा।

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
अल्लाह की रहमत और बरकतें आप पर हों।

أَشْهَدُ أَنَّكَ أَخُو رَسُولِ ٱللَّهِ
अश्हदु अन्नका अख़ू रसूलिल्लाह
मैं गवाही देता हूँ कि आप अल्लाह के रसूल के भाई हैं,

وَوَصِيُّهُ وَوَارِثُ عِلْمِهِ
व वसिय्युहू व वारिसु इल्मिही
और उनके वसी और उनके इल्म के वारिस हैं,

وَأَمِينُهُ عَلَىٰ شَرْعِهِ
व अमीनुहू अला शरअिही
और उनके शरीअत के अमानतदार हैं,

وَخَلِيفَتُهُ فِي أُمَّتِهِ
व ख़लीफ़तूहू फ़ी उम्मतिही
और उनकी उम्मत में उनके जानशीन हैं,

وَأَوَّلُ مَنْ آمَنَ بِٱللَّهِ
व अव्वलु मन आमना बिल्लाह
और सबसे पहले अल्लाह पर ईमान लाने वाले हैं,

وَصَدَّقَ بِمَا أُنْزِلَ عَلَىٰ نَبِيِّهِ
व सദ്ദक़ बिमा उन्ज़िला अला नबिय्यिही
और जो नबी पर नाज़िल हुआ उसे सच्चा माना।

وَأَشْهَدُ أَنَّهُ قَدْ بَلَّغَ عَنِ ٱللَّهِ مَا أَنْزَلَهُ فِيكَ
व अश्हदु अन्नहू क़द बल्लग़ा अनिल्लाहि मा अन्ज़लहू फ़ीक
और मैं गवाही देता हूँ कि नबी ने अल्लाह की तरफ़ से आपके बारे में जो नाज़िल हुआ, पूरा पहुँचा दिया,

فَصَدَعَ بِأَمْرِهِ
फ़सदअ बि अम्रिही
और अल्लाह के हुक्म को खुलकर बयान किया,

وَأَوْجَبَ عَلَىٰ أُمَّتِهِ فَرْضَ طَاعَتِكَ وَوِلاَيَتِكَ
व औजबा अला उम्मतिही फ़र्ज़ ताअतिक व विलायतक
और उम्मत पर आपकी इताअत और विलायत फ़र्ज़ ठहराई,

وَعَقَدَ عَلَيْهِمُ ٱلْبَيْعَةَ لَكَ
व अक़द अलैहिमुल बैअत लका
और उनसे आपकी बैअत ली,

وَجَعَلَكَ أَوْلَىٰ بِٱلْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ
व जाʻलक औला बिलमोमिनीन मिन अनफ़ुसिहिम
और आपको मोमिनों पर उनसे ज़्यादा हक़दार क़रार दिया,

كَمَا جَعَلَهُ ٱللَّهُ كَذٰلِكَ
कमा जाʻलहुल्लाहु कज़ालिक
जैसा कि अल्लाह ने ख़ुद ऐसा ही फ़ैसला किया।

ثُمَّ أَشْهَدَ ٱللَّهَ تَعَالَىٰ عَلَيْهِمْ
सुम्मा अश्हदल्लाह तआला अलैहिम
फिर अल्लाह तआला को उन पर गवाह बनाया,

فَقَالَ: ”أَلَسْتُ قَدْ بَلَّغْتُ؟“
फ़क़ाला अलस्तु क़द बल्लग़्तु
और फ़रमाया: “क्या मैंने पहुँचा नहीं दिया?”

فَقَالُوَٱ: ”اَللَّهُمَّ بَلَىٰ.“
फ़क़ालू: अल्लाहुम्मा बला
तो उन्होंने कहा: “हाँ अल्लाह! बिल्कुल, (हम गवाही देते हैं)।”

فَقَالَ: ”اَللَّهُمَّ ٱشْهَدْ،
फ़क़ाला: अल्लाहुम्मश्हद
तो आपने फ़रमाया: “ऐ अल्लाह! तू गवाह रह,

وَكَفَىٰ بِكَ شَهِيداً وَحَاكِماً بَيْنَ ٱلْعِبَادِ.“
व कफ़ा बिका शहीदन व हाकिमन बै़नल इबाद
और तू ही काफ़ी है गवाह और बंदों के दरमियान फ़ैसला करने वाला।”

فَلَعَنَ ٱللَّهُ جَاحِدَ وِلاَيَتِكَ بَعْدَ ٱلإِقْرَارِ
फ़लाअनल्लाहु जाहिद विलायतिका बादल इकरार
तो अल्लाह की लानत हो उस पर जिसने इक़रार के बाद आपकी विलायत का इनकार किया,

وَنَاكِثَ عَهْدِكَ بَعْدَ ٱلْمِيثَاقِ
व नाकिस अ़हदिका बादल मीसाक़
और उस पर जिसने अहद व पै़मान के बाद अपना वादा तोड़ दिया।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ وَفَيْتَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ تَعَالَىٰ
व अश्हदु अन्नका वफ़ैता बि अ़हदिल्लाहि तआला
और मैं गवाही देता हूँ कि आपने अल्लाह तआला के अहद को पूरा किया,

وَأَنَّ ٱللَّهَ تَعَالَىٰ مُوفٍ لَكَ بِعَهْدِهِ
व अन्नल्लाह तआला मूफ़िल्लका बि अ़हदिही
और यक़ीनन अल्लाह तआला भी आपके साथ अपना अहद पूरा करेगा।

”وَمَنْ أَوْفَىٰ بِمَا عَاهَدَ عَلَيْهُ ٱللَّهَ فَسَيُؤْتِيهِ أَجْراً عَظِيماً.“
व मन औफ़ा बिमा आहदा अलैहिल्लाह फ़सयुतीही अजरन अ़ज़ीमा
“और जिसने अल्लाह से किया हुआ अहद पूरा किया, तो अल्लाह उसे बड़ा अज्र अता करेगा।”

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ أَمِيرُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلْحَقُّ
व अश्हदु अन्नका अमीरुल मोमिनीनल हक़्क़
और मैं गवाही देता हूँ कि आप ही सच्चे अमीरुल मोमिनीन हैं,

ٱلَّذِي نَطَقَ بِوِلاَيَتِكَ ٱلتَّنْزِيلُ
अल्लज़ी नत़क़ बि विलायतिकल तंज़ील
जिनकी विलायत का एलान क़ुरआनी तंज़ील ने किया,

وَأَخَذَ لَكَ ٱلْعَهْدَ عَلَىٰ ٱلأُمَّةِ بِذٰلِكَ ٱلرَّسُولُ
व अख़ज़ा लकल अ़हदा अलल उम्मति बिज़ालिकर रसूल
और रसूल ने उसी पर उम्मत से आपके लिए अहद लिया।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ وَعَمَّكَ وَأَخَاكَ
व अश्हदु अन्नका व अ़म्मका व अख़ाका
और मैं गवाही देता हूँ कि आप, आपके चाचा और आपके भाई,

ٱلَّذِينَ تَاجَرْتُمُ ٱللَّهَ بِنُفُوسِكُمْ
अल्लज़ीना ताजरतुमुल्लाह बि नुफ़ूसिकुम
वे हैं जिन्होंने अपनी जानों के बदले अल्लाह से सौदा किया,

فَأَنْزَلَ ٱللَّهُ فِيكُمْ:
फ़अंज़लल्लाहु फ़ीकुम
तो अल्लाह ने आपके बारे में यह नाज़िल फ़रमाया:

«إِنَّ ٱللَّهَ ٱشْتَرَىٰ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ أَنْفُسَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ
इन्नल्लाह इश्तरामिनल मोमिनीन अन्फ़ुसहुम व अम्वालहुम
“बेशक अल्लाह ने मोमिनों से उनकी जानें और उनका माल ख़रीद लिया,

بِأَنَّّ لَهُمُ ٱلْجَنَّةَ
बि अन्ना लहुमुल जन्ना
इस बदले में कि उनके लिए जन्नत है,

يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَيَقْتُلُونَ وَيُقْتَلُونَ
युक़ातिलूना फ़ी सबीलिल्लाह फ़यक़्तुलूना व युक़्तलून
वे अल्लाह की राह में लड़ते हैं, मारते भी हैं और शहीद भी होते हैं,

وَعْداً عَلَيْهِ حَقّاً فِي ٱلتَّوْرَاةِ وَٱلإِنْجِيلِ وَٱلْقُرْآنِ
वअ़दन अलैहि हक़्क़न फ़ित्तौराति वल इंजीलि वल क़ुरआन
यह वादा उस पर हक़ है, जो तौरात, इंजील और क़ुरआन में मौजूद है।

وَمَنْ أَوْفَىٰ بِعَهْدِهِ مِنَ ٱللَّهِ؟
व मन औफ़ा बि अ़हदिही मिनल्लाह
और अल्लाह से बढ़कर अपने अहद को कौन पूरा करने वाला है?

فَٱسْتَبْشِرُوا بِبَيْعِكُمُ ٱلَّذِي بَايَعْتُمْ بِهِ
फ़स्तबश्शिरू बि बैअ़इकुमुल्लज़ी बायअ़तुम बिही
तो उस सौदे पर ख़ुशी मनाओ जो तुमने किया है,

وَذٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ.
व ज़ालिका हुवल फ़ौज़ुल अ़ज़ीम
और यही तो बहुत बड़ी कामयाबी है।

ٱلتَّائِبُونَ ٱلْعَابِدُونَ
अत्ताइबून अलआबिदून
वे हैं जो तौबा करने वाले हैं, इबादत करने वाले हैं,

ٱلْحَامِدُونَ ٱلسَّائِحُونَ
अलहामिदून अस्साइहून
जो अल्लाह की हम्द करने वाले हैं, रोज़ा रखने वाले हैं,

ٱلرَّاكِعُونَ ٱلسَّاجِدُونَ
अर्राकिऊन अस्साजिदून
जो रुकू करने वाले हैं, सज्दा करने वाले हैं,

ٱلآمِرُونَ بِٱلْمَعْرُوفِ وَٱلنَّاهُونَ عَنِ ٱلْمُنْكَرِ
अल आमिरून बिल मअरूफ़ वन्नाहून अ़निल मुनकर
जो भलाई का हुक्म देते हैं और बुराई से रोकते हैं,

وَٱلْحَافِظُونَ لِحُدُودِ ٱللَّهِ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ.»
वलहाफ़िज़ून लिहुदूदिल्लाह व बश्शिरिल मोमिनीन
और जो अल्लाह की हदों की हिफ़ाज़त करते हैं; और मोमिनों को ख़ुशख़बरी दे दो।

أَشْهَدُ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अश्हदु या अमीरल मोमिनीन
ऐ अमीरुल मोमिनीन! मैं गवाही देता हूँ,

أَنَّ ٱلشَّاكَّ فِيكَ مَا آمَنَ بِٱلرَّسُولِ ٱلأَمِينِ
अन्नश्शाक्का फीका मा आमना बिर्रसूलिल अमीन
कि जिसने आप में शक किया, वह अमीन रसूल पर ईमान नहीं लाया,

وَأَنَّ ٱلْعَادِلَ بِكَ غَيْرَكَ عَانِدٌ عَنِ ٱلدِّينِ ٱلْقَوِيمِ
व अन्नल आदिला बिका ग़ैरका आनिदुन अ़निद्दीनिल क़व़ीम
और जिसने आपको छोड़कर किसी और को बराबर ठहराया, वह सीधे दीन से हट गया,

ٱلَّذِي ٱرْتَضَاهُ لَنَا رَبُّ ٱلْعَالَمِينَ
अल्लज़ी इर्रतज़ाहू लना रब्बुल आलमीन
उस दीन से जिसे हमारे लिए रब्बुल आलमीन ने पसंद फ़रमाया,

وَأَكْمَلَهُ بِوِلاَيَتِكَ يَوْمَ ٱلْغَدِيرِ
व अक्मलहू बि विलायतिक यौमल ग़दीर
और जिसे ग़दीर के दिन आपकी विलायत के ज़रिये मुकम्मल किया।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ ٱلْمَعْنِيُّ بِقَوْلِ ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ:
व अश्हदु अन्नकल मअ़निय्यु बि क़ौलिल अज़ीज़िर्रहीम
और मैं गवाही देता हूँ कि आप ही अल्लाह अज़ीज़ व रहीम के इस क़ौल में मुराद हैं:

”وَأَنَّ هٰذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيماً فَٱتِّبِعُوهُ
व अन्ना हाज़ा सिराती मुस्तक़ीमन फ़त्तबिऊहू
“और यही मेरा सीधा रास्ता है, तो इसी पर चलो,

وَلاَ تَتَّبِعُوا ٱلسُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيلِهِ.“
व ला तत्तबिऊस्सुबुल फ़तफ़र्रक़ा बिकुम अ़न सबीलिही
और दूसरे रास्तों पर न चलो कि वे तुम्हें उसके रास्ते से भटका देंगे।”

ضَلَّ وَٱللَّهِ وَأَضَلَّ مَنِ ٱتَّبَعَ سِوَاكَ
दल्ला वल्लाहि व अज़ल्ला मनित्तबअ़ सिवाक
अल्लाह की क़सम! जिसने आपके सिवा किसी और की पैरवी की, वह खुद भी भटका और दूसरों को भी भटका दिया,

وَعَنَدَ عَنِ ٱلْحَقِّ مَنْ عَادَاكَ
व अ़नदा अ़निल हक़्क़ मन आ़दाक
और जिसने आपसे दुश्मनी की, उसने हक़ का इनकार किया।

اَللَّهُمَّ سَمِعْنَا لأَمْرِكَ
अल्लाहुम्मा समिअ़ना लि अम्रिक
ऐ अल्लाह! हमने तेरा हुक्म सुन लिया,

وَأَطَعْنَا وَٱتَّبَعْنَا صِرَاطَكَ ٱلْمُسْتَقِيمَ
व अत़अ़ना वत्तबअ़ना सिरातकल मुस्तक़ीम
हमने इताअ़त की और तेरे सीधे रास्ते की पैरवी की,

فَٱهْدِنَا رَبَّنَا
फ़ह्दिना रब्बना
तो ऐ हमारे रब! हमें हिदायत देता रह,

وَلاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا إِلَىٰ طَاعَتِكَ
व ला तुज़िग़ क़ुलूबना बादा इज़ हदयतना इला ताअ़तिक
और हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर,

وَٱجْعَلْنَا مِنَ ٱلشَّاكِرِينَ لأَنْعُمِكَ
वज्अ़लना मिनश्शाकिरीना लि अनअ़मिक
और हमें अपनी नेअ़मतों का शुक्र करने वालों में शामिल फ़रमा।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ لَمْ تَزَلْ لِلْهَوَىٰ مُخَالِفاً
व अश्हदु अन्नका लम तज़ल लिल हव़ा मुख़ालिफ़ा
और मैं गवाही देता हूँ कि आप हमेशा नफ़्सानी ख्वाहिशों के मुख़ालिफ़ रहे,

وَلِلتُّقَىٰ مُحَالِفاً
व लिल्तुक़ा मुहालिफ़ा
और हमेशा तक़वा के साथ रहे,

وَعَلَىٰ كَظْمِ ٱلْغَيْظِ قَادِراً
व अ़ला कज़्मिल ग़ैज़ि क़ादिरा
और ग़ुस्से को दबाने पर क़ादिर रहे,

وَعَنِ ٱلنَّاسِ عَافِياً غَافِراً
व अ़निन्नासि आ़फ़ियं ग़ाफ़िरा
और लोगों को माफ़ करने वाले और दरगुज़र करने वाले रहे,

وَإِذَا عُصِيَ ٱللَّهُ سَاخِطاً
व इज़ा उ़सियल्लाहु साख़ित़ा
और जब अल्लाह की नाफ़रमानी हुई तो नाराज़ हुए,

وَإِذَا أُطِيعَ ٱللَّهُ رَاضِياً
व इज़ा उत़ीअ़ल्लाहु राज़िया
और जब अल्लाह की इताअ़त हुई तो राज़ी हुए,

وَبِمَا عَهِدَ إِلَيْكَ عَامِلاً
व बिमा अ़हिदा इलैका आ़मिला
और जो ज़िम्मेदारी आपको सौंपी गई, उसे अमल में लाया,

رَاعِياً لِمَا ٱسْتُحْفِظْتَ
राइअ़न लिमा इस्तुह़फ़िज़्ता
जिस अमानत की हिफ़ाज़त सौंपी गई, उसकी निगहबानी की,

حَافِظاً لِمَا ٱسْتُودِعْتَ
हाफ़िज़न लिमा इस्तूदिअ़्ता
और जो अमानत रखवाई गई, उसे संभाल कर रखा,

مُبَلِّغاً مَا حُمِّلْتَ
मुबल्लीग़न मा हुम्मिल्ता
और जो पैग़ाम सौंपा गया, उसे पहुँचा दिया,

مُنْتَظِراً مَا وُعِدْتَ
मुन्तज़िरन मा वुइ़द्ता
और जिस वादे का किया गया, उसका इंतेज़ार करते रहे।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ مَا ٱتَّقَيْتَ ضَارِعاً
व अश्हदु अन्नका मा इत्तक़ैता दारिअ़न
और मैं गवाही देता हूँ कि आपने जो कभी नर्मी इख़्तियार की, वह ज़िल्लत की वजह से नहीं थी,

وَلاَ أَمْسَكْتَ عَنْ حَقِّكَ جَازِعاً
व ला अम्सक़्ता अ़न हक़्क़िका जाज़िअ़न
और न ही आपने अपने हक़ से रुकना डर या घबराहट की वजह से किया,

وَلاَ أَحْجَمْتَ عَنْ مُجَاهَدَةِ غَاصِبِيكَ نَاكِلاً
व ला अह्जम्ता अ़न मुजाहदति ग़ासिबीका नाकिलन
और न ही आपने अपने हक़ छीनने वालों से जिहाद कमज़ोरी की वजह से छोड़ा,

وَلاَ أَظْهَرْتَ ٱلرِّضَا بِخِلاَفِ مَا يُرْضِي ٱللَّهَ مُدَاهِناً
व ला अज़्हरता र्रिज़ा बिख़िलाफ़ि मा युर्ज़िल्लाह मुदाहिनन
और आपने जो कभी ऐसे अम्र पर रज़ामंदी दिखाई जिससे अल्लाह राज़ी नहीं, वह खुशामद की वजह से नहीं थी,

وَلاَ وَهَنْتَ لِمَا أَصَابَكَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ
व ला वहन्ता लिमा असाबका फी सबीलिल्लाह
और अल्लाह की राह में जो मुसीबतें आप पर आईं, उनसे आप कभी कमज़ोर नहीं पड़े,

وَلاَ ضَعُفْتَ وَلاَ ٱسْتَكَنْتَ عَنْ طَلَبِ حَقِّكَ مُرَاقِباً
व ला ज़ुअ़फ्ता व ला इस्तकन्ता अ़न तलबी हक़्क़िका मुराक़िबन
और न आप कमज़ोर पड़े, न डर की वजह से अपने हक़ के तलब से पीछे हटे,

مَعَاذَ ٱللَّهِ أَنْ تَكُونَ كَذٰلِكَ
मआज़ल्लाहि अन तकूना कज़ालिका
अल्लाह की पनाह है कि आप ऐसे हों,

بَلْ إِذْ ظُلِمْتَ ٱحْتَسَبْتَ رَبَّكَ
बल इज़ ज़ुलिम्ता इहतसब्ता रब्बक
बल्कि जब आप पर ज़ुल्म हुआ तो आपने अपने रब पर भरोसा किया,

وَفَوَّضْتَ إِلَيْهِ أَمْرَكَ
व फ़व्वज़्ता इलैहि अम्रक
और अपना मामला उसी के सुपुर्द कर दिया,

وَذَكَّرْتَهُمْ فَمَا ٱدَّكَرُوٱ
व ज़क्कर्तहुम फ़मा इद्दकरू
आपने उन्हें याद दिलाया मगर उन्होंने याद नहीं रखा,

وَوَعَظْتَهُمْ فَمَا ٱتَّعَظُوٱ
व वअ़ज़्तहुम फ़मा इत्तअ़ज़ू
आपने नसीहत की मगर उन्होंने असर नहीं लिया,

وَخَوَّفْتَهُمُ ٱللَّهَ فَمَا تَخَوَّفُوٱ
व ख़व्वफ्तहुमुल्लाह फ़मा तख़व्वफ़ू
आपने उन्हें अल्लाह से डराया मगर वे नहीं डरे,

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व अश्हदु अन्नका या अमीरल मोमिनीन
और मैं गवाही देता हूँ ऐ अमीरुल मोमिनीन,

جَاهَدْتَ فِي ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِ
जाहद्ता फ़िल्लाह हक़्क़ा जिहादिही
कि आपने अल्लाह की राह में पूरा हक़ अदा करते हुए जिहाद किया,

حَتَّىٰ دَعَاكَ ٱللَّهُ إِلَىٰ جِوَارِهِ
हत्ता दअ़ाका अल्लाहु इला जिवारिही
यहाँ तक कि अल्लाह ने आपको अपने क़ुर्ब में बुला लिया,

وَقَبَضَكَ إِلَيْهِ بِٱخْتِيَارِهِ
व क़बज़का इलैहि बिख़्तियारिही
और अपनी मर्ज़ी से आपको अपने पास उठा लिया,

وَأَلزَمَ أَعْدَاءَكَ ٱلْحُجَّةَ بِقَتْلِهِمْ إِيَّاكَ
व अलज़मा अअ़दाअ़का अलहुज्जत बि क़त्लिहिम इय्याक
और आपके क़ातिल दुश्मनों पर हुज्जत क़ायम कर दी,

لِتَكُونَ ٱلْحُجَّةُ لَكَ عَلَيْهِمْ
लितकूना अलहुज्जतु लका अ़लैहिम
ताकि आप उनके ख़िलाफ़ दलील बनें,

مَعَ مَا لَكَ مِنَ ٱلْحُجَجِ ٱلْبَالِغَةِ عَلَىٰ جَمِيعِ خَلْقِهِ
मअ़ मा लका मिनल हुजजिल बालिग़ति अ़ला जमीइ़ ख़ल्क़िही
हालाँकि आप तमाम मख़लूक़ पर पहले ही पूरी हुज्जत रखते हैं।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अ़लैका या अमीरल मोमिनीन
सलाम हो आप पर ऐ अमीरुल मोमिनीन।

عَبَدْتَ ٱللَّهَ مُخْلِصاً
अ़बद्ता अल्लाह मुख़लिसन
आपने अल्लाह की इबादत ख़ालिस नियत से की,

وَجَاهَدْتَ فِي ٱللَّهِ صَابِراً
व जाहद्ता फ़िल्लाह साबिरन
और सब्र के साथ उसकी राह में जिहाद किया,

وَجُدْتَ بِنَفْسِكَ مُحْتَسِباً
व जुद्ता बिनफ़्सिका मुहतसिबन
और अपने नफ़्स को अल्लाह की ख़ातिर कुर्बान किया,

وَعَمِلْتَ بِكِتَابِهِ
व अमिल्ता बि किताबिही
उसकी किताब पर अमल किया,

وَٱتَّبَعْتَ سُنَّةَ نَبِيِّهِ
वत्तबअ़्ता सुन्नता नबिय्यिही
और उसके नबी की सुन्नत की पैरवी की।

وَأَقَمْتَ ٱلصَّلاةَ
व अक़म्ता अस्सलात
आपने नमाज़ क़ायम की,

وَآتَيْتَ ٱلزَّكَاةَ
व आतैता अज़्ज़कात
ज़कात अदा की,

وَأَمَرْتَ بِٱلْمَعْرُوفِ
व अमर्ता बिल मअरूफ़
भलाई का हुक्म दिया,

وَنَهَيْتَ عَنِ ٱلْمُنْكَرِ مَا ٱسْتَطَعْتَ
व नहैता अ़निल मुनकर मा इस्ततअ़्ता
और बुराई से रोका जितनी तौफ़ीक़ मिली,

مُبْتَغِياً مَا عِنْدَ ٱللَّهِ
मुबतग़ियन मा इ़न्दल्लाह
अल्लाह के पास जो है उसकी तलाश में,

رَاغِباً فِي مَا وَعَدَ ٱللَّهُ
राग़िबन फ़ी मा वअ़दल्लाह
और उस चीज़ की चाह में जो अल्लाह ने वादा की।

لاَ تَحْفِلُ بِٱلنَّوَائِبِ
ला तहफ़िलु बिन्नवाइब
आपने मुसीबतों की परवाह नहीं की,

وَلاَ تَهِنُ عِنْدَ ٱلشَّدَائِدِ
व ला तहिनु अ़िन्दश्शदाइद
सख़्तियों में कमज़ोर नहीं पड़े,

وَلاَ تَحْجِمُ عَنْ مُحَارِبٍ
व ला तहजिमु अ़न मुहारिब
और किसी जंग करने वाले से डरकर पीछे नहीं हटे।

أَفِكَ مَنْ نَسَبَ غَيْرَ ذٰلِكَ إِلَيْكَ
अफ़िका मन नसबा ग़ैर ज़ालिका इलैक
जो इसके ख़िलाफ़ आपको कुछ और मंसूब करे वह झूठ गढ़ता है,

وَٱفْتَرَىٰ بَاطِلاً عَلَيْكَ
वफ्तरा बातिलन अ़लैक
और आप पर बोहतान लगाता है,

وَأَوْلَىٰ لِمَنْ عَنَدَ عَنْكَ
व औला लिमन अ़नदा अ़नक
और जो आपसे मुँह मोड़े वह हलाक़त के क़रीब है।

لَقَدْ جَاهَدْتَ فِي ٱللَّهِ حَقَّ ٱلْجِهَادِ
लक़द जाहद्ता फ़िल्लाह हक़्क़ल जिहाद
यक़ीनन आपने अल्लाह की राह में पूरा हक़ अदा किया,

وَصَبَرْتَ عَلَىٰ ٱلأَذَىٰ صَبْرَ ٱحْتِسَابٍ
व सबरता अ़लल अज़ा सब्र इहतिसाब
और अल्लाह की ख़ातिर तकलीफ़ों पर सब्र किया,

وَأَنْتَ أَوَّلُ مَنْ آمَنَ بِٱللَّهِ
व अंता अव्वलु मन आमना बिल्लाह
और आप ही सबसे पहले अल्लाह पर ईमान लाए,

وَصَلَّىٰ لَهُ وَجَاهَدَ
व सल्ला लहू व जाहद
सबसे पहले नमाज़ पढ़ी और जिहाद किया,

وَأَبْدَىٰ صَفْحَتَهُ فِي دَارِ ٱلشِّرْكِ
व अब्दा सफ़हतहू फी दारिश्शिर्क
और शिर्क की सरज़मीन में खुलकर सामने आए,

وَٱلأَرْضُ مَشْحُونَةٌ ضَلالَةً
वल अरज़ु मश्हूनतुन दलालत
जब ज़मीन गुमराही से भरी हुई थी,

وَٱلشَّيْطَانُ يُعْبَدُ جَهْرَةً
वश्शैत़ानु युअ़बदु जह्रतन
और शैतान खुलेआम पूजा जाता था,

وَأَنْتَ ٱلْقَائِلُ: ”لاَ تَزِيدُنِي كَثْرَةُ ٱلنَّاسِ حَوْلِي عِزَّةً
व अंता अलक़ाइलु ला तज़ीदुनी कसरतुन नासि हौली इज़्ज़तन
और आपने फ़रमाया: “मेरे इर्द-गिर्द लोगों की बहुतायत मुझे इज़्ज़त नहीं बढ़ाती,

وَلاَ تَفَرُّقُهُمْ عَنِّي وَحْشَةً
व ला तफ़र्रुक़ुहुम अ़न्नी वह्शतन
और न ही उनका बिछड़ जाना मुझे तन्हा करता है,

وَلَوْ أَسْلَمَنِيَ ٱلنَّاسُ جَمِيعاً لَمْ أَكُنْ مُتَضَرِّعاً.“
व लौ असलमनीयन्नासु जमीअ़न लम अकुन मुतज़ऱ्रिअ़न
और अगर तमाम लोग मुझे छोड़ दें तब भी मैं झुकने वाला नहीं हूँ।”

إِعْتَصَمْتَ بِٱللَّهِ فَعَزَزْتَ
इअ़तसम्ता बिल्लाह फ़अ़ज़ज़ता
आपने अल्लाह का दामन थामा तो आप ग़ालिब रहे,

وَآثَرْتَ ٱلآخِرَةَ عَلَىٰ ٱلأُولَىٰ فَزَهِدْتَ
व आस़रता अल आख़िरत अ़लल ऊला फ़ज़हद्ता
और आपने आख़िरत को दुनिया पर तरजीह दी तो ज़ाहिद बन गए,

وَأَيَّدَكَ ٱللَّهُ وَهَدَاكَ
व अय्यदका अल्लाहु व हदाका
तो अल्लाह ने आपको मदद दी और हिदायत दी,

وَأَخْلَصَكَ وَٱجْتَبَاكَ
व अख़लसका वज्तबाक
आपको ख़ास चुना और पसंद फ़रमाया,

فَمَا تَنَاقَضَتْ أَفْعَالُكَ
फ़मा तनाक़ज़त अफ़आलक
आपके अमल कभी एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं हुए,

وَلاَ ٱخْتَلَفَتْ أَقْوَالُكَ
व ला इख़्तलफ़त अक़्वालक
आपके अक़वाल में कभी तज़ाद नहीं आया,

وَلاَ تَقَلَّبَتْ أَحْوَالُكَ
व ला तक़ल्लबत अह्वालक
और आपके हालात कभी डगमगाए नहीं।

وَلاَ ٱدَّعَيْتَ وَلاَ ٱفْتَرَيْتَ عَلَىٰ ٱللَّهِ كَذِباً
व ला इद्दअ़य्ता व ला इफ़्तरय्ता अ़लल्लाह कज़िबन
और आपने कभी अल्लाह पर झूठा दावा नहीं किया, न ही उस पर झूठ बाँधा,

وَلاَ شَرِهْتَ إِلَىٰ ٱلْحُطَامِ
व ला शरिह्ता इलल हुताम
और आप दुनिया की फ़ानी दौलत के लालची नहीं बने,

وَلاَ دَنَّسَكَ ٱلآثَامُ
व ला दन्नसका अल आस़ाम
और गुनाहों ने आपको कभी आलूदा नहीं किया,

وَلَمْ تَزَلْ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّكَ
व लम तज़ल अ़ला बय्यिनतिन मिन रब्बिक
बल्कि आप हमेशा अपने रब की तरफ़ से वाज़ेह दलील पर रहे,

وَيَقِينٍ مِنْ أَمْرِكَ
व यक़ीनिन मिन अम्रिक
और अपने अम्र में पूरे यक़ीन पर क़ायम रहे,

تَهْدِي إِلَىٰ ٱلْحَقِّ وَإِلَىٰ صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
तहदी इलल हक़्क़ि व इलल सिरातिन मुस्तक़ीम
और लोगों को हक़ और सीधी राह की हिदायत देते रहे।

أَشْهَدُ شَهَادَةَ حَقٍّ
अश्हदु शहादत हक़्क़
मैं सच्ची गवाही देता हूँ,

وَأُقْسِمُ بِٱللَّهِ قَسَمَ صِدْقٍ
व उक़्सिमु बिल्लाह क़समा सिद्क़
और अल्लाह की क़सम खाकर सच कहता हूँ,

أَنَّ مُحَمَّداً وَآلَهُ صَلَوَاتُ ٱللَّهِ عَلَيْهِمْ سَادَاتُ ٱلْخَلْقِ
अन्ना मुहम्मदन व आलहू सलवातुल्लाह अ़लैहिम सादातुल ख़ल्क़
कि मुहम्मद ﷺ और उनका घराना तमाम मख़लूक़ के सरदार हैं,

وَأَنَّكَ مَوْلاَيَ وَمَوْلَىٰ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व अन्नका मौलाया व मौलल मोमिनीन
और आप मेरे भी मौला हैं और तमाम मोमिनों के मौला हैं,

وَأَنَّكَ عَبْدُ ٱللَّهِ وَوَلِيُّهُ
व अन्नका अ़ब्दुल्लाह व वलिय्युहू
और आप अल्लाह के बन्दे और उसके वली हैं,

وَأَخُو ٱلرَّسُولِ وَوَصِيُّهُ وَوَارِثُهُ
व अख़ुर्रसूल व वसिय्युहू व वारिसुहू
रसूल के भाई, उनके वसी और उनके वारिस हैं,

وَأَنَّهُ ٱلْقَائِلُ لَكَ:
व अन्नहू अलक़ाइलु लक
और वही रसूल आपसे फ़रमाते थे:

”وَٱلَّذِي بَعَثَنِي بِٱلْحَقِّ مَا آمَنَ بِي مَنْ كَفَرَ بِكَ
वल्लज़ी बअ़थनी बिलहक़्क़ि मा आमना बी मन कफ़रा बिक
“उस ज़ात की क़सम जिसने मुझे हक़ के साथ भेजा, जिसने तुम्हारा इनकार किया उसने मुझ पर ईमान नहीं लाया,

وَلاَ أَقَرَّ بِٱللَّهِ مَنْ جَحَدَكَ
व ला अक़र्रा बिल्लाह मन जहदक
और जिसने तुम्हें न माना उसने अल्लाह को भी न माना,

وَقَدْ ضَلَّ مَنْ صَدَّ عَنْكَ
व क़द ज़ल्ला मन सद्दा अ़नक
और जो तुमसे मुँह मोड़े वह यक़ीनन गुमराह हो गया,

وَلَمْ يَهْتَدِ إِلَىٰ ٱللَّهِ وَلاَ إِلَيَّ مَنْ لاَ يَهْتَدِي بِكَ
व लम यह्तदि इलल्लाह व ला इलय्य मन ला यह्तदि बिक
और जो तुम्हारी पैरवी से हिदायत न पाए वह न अल्लाह तक पहुँचा न मुझ तक।

وَهُوَ قَوْلُ رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ:
व हुआ क़ौलु रब्बी अ़ज़्ज़ व जल्ल
और यही मेरे रब का फ़रमान है:

«وَإِنِّي لَغَفَّارٌ لِمَنْ تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحاً
व इन्नी लग़फ़्फ़ारुल्लिमन ताबा व आमना व अ़मिला सालिह़न
“बेशक मैं उसे बहुत बख़्शने वाला हूँ जो तौबा करे, ईमान लाए और नेक अमल करे,

ثُمَّ ٱهْتَدَىٰ» إِلَىٰ وِلايَتِكَ.“
थुम्म इहतदा इला विलायतक
फिर हिदायत पाए।” यानी तुम्हारी विलायत को अपनाए।

مَوْلاَيَ فَضْلُكَ لاَ يَخْفَىٰ
मौलाया फ़ज़्लुक ला यख़्फ़ा
ऐ मौला, आपका फ़ज़्ल छुपा नहीं है,

وَنُورُكَ لاَ يُطْفَأُ
व नूरुक ला युत्फ़ा
और आपका नूर कभी बुझाया नहीं जा सकता।

وَأَنَّ مَنْ جَحَدَكَ ٱلظَّلُومُ ٱلأَشْقَىٰ
व अन्ना मन जहदक अज़्ज़लूमुल अश्क़ा
और जिसने आपको न माना वह सबसे बड़ा ज़ालिम और बदनसीब है।

مَوْلاَيَ أَنْتَ ٱلْحُجَّةُ عَلَىٰ ٱلْعِبَادِ
मौलाया अंता अलहुज्जतु अ़लल इ़बाद
ऐ मौला, आप बन्दों पर अल्लाह की हुज्जत हैं,

وَٱلْهَادِي إِلَىٰ ٱلرَّشَادِ
वलहादी इलर्रशाद
और सीधी राह की तरफ़ राहनुमा हैं,

وَٱلْعُدَّةُ لِلْمَعَادِ
वलउ़द्दतु लिलमआद
और आख़िरत के दिन के लिए हमारा सहारा हैं।

مَوْلاَيَ لَقَدْ رَفَعَ ٱللَّهُ فِي ٱلأُولَىٰ مَنْزِلَتَكَ
मौलाया लक़द रफ़अल्लाहु फ़िल ऊला मंज़िलतक
ऐ मेरे मौला! अल्लाह ने दुनिया में आपका मक़ाम बहुत बुलंद किया,

وَأَعْلَىٰ فِي ٱلآخِرَةِ دَرَجَتَكَ
व अअ़ला फ़िल आख़िरति दरजतक
और आख़िरत में भी आपके दर्जे को बहुत ऊँचा फ़रमाया,

وَبَصَّرَكَ مَا عَمِيَ عَلَىٰ مَنْ خَالَفَكَ
व बस्सरक मा अ़मिया अ़ला मन ख़ालफ़क
और आपको वह हक़ीक़त दिखा दी जो आपके मुख़ालिफ़ों से छुपी रही,

وَحَالَ بَيْنَكَ وَبَيْنَ مَوَاهِبِ ٱللَّهِ لَكَ
व हाल बैनक व बैन मवाहिबिल्लाहि लक
जबकि उन्होंने आपको अल्लाह की नेमतों से रोकने की कोशिश की,

فَلَعَنَ ٱللَّهُ مُسْتَحِلِّي ٱلْحُرْمَةِ مِنْكَ
फ़लअनल्लाहु मुस्तहिल्ली अलह़ुर्मति मिंक
तो अल्लाह की लानत हो उन पर जिन्होंने आपकी हुरमत को हलाल समझा,

وَذَائِدِي ٱلْحَقِّ عَنْكَ
व ज़ाइदी अलह़क़्क़ि अ़नक
और आपको आपके हक़ से रोकने वाले बने,

وَأَشْهَدُ أَنَّهُمُ ٱلأَخْسَرُونَ
व अश्हदु अन्नहुमुल अख़्सरून
और मैं गवाही देता हूँ कि वही सबसे बड़े घाटे में हैं,

ٱلَّذِينَ تَلْفَحُ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ
अल्लज़ीना तल्फ़हु वुजूहहुमुन्नार
जिनके चेहरों को जहन्नम की आग झुलसा देगी,

وَهُمْ فِيهَا كَالِحُونَ
व हुम फ़ीहा कालिह़ून
और वे उसमें सख़्त अज़ाब में होंगे।

وَأَشْهَدُ أَنَّكَ مَا أَقْدَمْتَ وَلاَ أَحْجَمْتَ
व अश्हदु अन्नक मा अक़दम्त व ला अह़जम्त
और मैं गवाही देता हूँ कि आपने जो कुछ किया या जिससे रुके,

وَلاَ نَطَقْتَ وَلاَ أَمْسَكْتَ
व ला नत़क्त व ला अम्सक्त
या जो कहा या जिस पर ख़ामोशी इख़्तियार की,

إِلاَّ بِأَمْرٍ مِنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِ
इल्ला बि अम्रिन मिनल्लाहि व रसूलिही
वह सब अल्लाह और उसके रसूल के हुक्म से ही था।

قُلْتَ: ”وَٱلَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ،
क़ुल्त वल्लज़ी नफ़्सी बियदिही
आपने फ़रमाया: “उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है,

لَقَدْ نَظَرَ إِلَيَّ رَسُولُ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
लक़द नज़र इलय्य रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिही
रसूलुल्लाह ﷺ ने मेरी तरफ़ देखा,

أَضْرِبُ بِٱلسَّيْفِ قُدْماً فَقَالَ:
अज़्रिबु बिस्सैफ़ि क़ुदमन फ़क़ाल
जब मैं तलवार से लगातार जिहाद कर रहा था, तो आपने फ़रमाया:

’يَا عَلِيُّ أَنْتَ مِنِّي بِمَنْزِلَةِ هَارُونَ مِنْ مُوسَىٰ
या अ़लिय्यु अंता मिन्नी बिमंज़िलति हारून मिन मूसा
“ऐ अली! तुम्हारा मक़ाम मेरे पास वही है जो मूसा के पास हारून का था,

إِلاَّ أَنَّهُ لاَ نَبِيَّ بَعْدِي
इल्ला अन्नहू ला नबिय्य बादी
बस मेरे बाद कोई नबी नहीं होगा।

وَأُعْلِمُكَ أَنَّ مَوْتَكَ وَحَيَاتَكَ مَعِي وَعَلَىٰ سُنَّتِي.‘
व उअ़लिमुक अन्ना मौतक व हयातक मअ़ी व अ़ला सुन्नती
और तुम्हारी मौत और तुम्हारी ज़िंदगी मेरे साथ और मेरी सुन्नत पर होगी।”

فَوَٱللَّهِ مَا كَذِبْتُ وَلاَ كُذِّبْتُ
फ़वअल्लाहि मा कज़ब्तु व ला कुज़्ज़िब्तु
तो अल्लाह की क़सम! मैंने न झूठ कहा और न ही मुझे झूठा ठहराया गया।

وَلاَ ضَلَلْتُ وَلاَ ضُلِّ بِي
व ला ज़लल्तु व ला ज़ुल्लि बी
और न मैं भटका और न मुझे किसी ने भटकाया,

وَلاَ نَسِيتُ مَا عَهِدَ إِلَيَّ رَبِّي
व ला नसीतु मा अ़हिद इलय्य रब्बी
और मैंने अपने रब के अहद को कभी नहीं भुलाया,

وَإِنِّي لَعَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّي بَيَّنَهَا لِنَبِيِّهِ
व इन्नी लअ़ला बय्यिनतिन मिन रब्बी बय्यनहा लिनबिय्यिही
और मैं अपने रब की रौशन दलील पर हूँ जिसे उसने अपने नबी को दिखाया,

وَبَيَّنَهَا ٱلنَّبِيُّ لِي
व बय्यनहा नबिय्यु ली
और नबी ने वही मुझे समझाई,

وَإِنِّي لَعَلَىٰ ٱلطَّرِيقِ ٱلْوَاضِحِ أَلْفِظُهُ لَفْظاً.“
व इन्नी लअ़ला त्तरीक़िल वाज़िह़ि अल्फ़िज़ुहू लफ़ज़न
और यक़ीनन मैं उस खुले और रौशन रास्ते पर क़दम-ब-क़दम चल रहा हूँ।”

صَدَقْتَ وَٱللَّهِ وَقُلْتَ ٱلْحَقَّ
सदक़्ता वल्लाहि व क़ुल्तल ह़क़्क़
अल्लाह की क़सम! आपने सच कहा और हक़ के सिवा कुछ नहीं कहा।

فَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ سَاوَاكَ بِمَنْ نَاوَاكَ
फ़लअनल्लाहु मन सावा-क बिमन नावाक
तो अल्लाह की लानत हो उन पर जो आपको आपके दुश्मनों के बराबर ठहराते हैं,

وَٱللَّهُ جَلَّ ٱسْمُهُ يَقُولُ:
वल्लाहु जल्ला इस्मुहू यक़ूलु
और अल्लाह, जिसका नाम बहुत बुलंद है, फ़रमाता है:

”هَلْ يَسْتَوِي ٱلَّذِينَ يَعْلَمُونَ وَٱلَّذِينَ لاَ يَعْلَمُون؟“
हल यस्तवी अल्लज़ीना यअ़लमूना वल्लज़ीना ला यअ़लमून
“क्या जानने वाले और न जानने वाले बराबर हो सकते हैं?”

فَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ عَدَلَ بِكَ مَنْ فَرَضَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وِلايَتَكَ
फ़लअनल्लाहु मन अ़दला बिका मन फ़रज़ल्लाहु अ़लैहि विलायतक
तो अल्लाह की लानत हो उस पर जो आपको उनके बराबर करे जिन पर अल्लाह ने आपकी विलायत को फ़र्ज़ किया,

وَأَنْتَ وَلِيُّ ٱللَّهِ
व अंता वलिय्यु-ल्लाह
हालाँकि आप अल्लाह के वली हैं,

وَأَخُو رَسُولِهِ
व अख़ू रसूलिही
और उसके रसूल के भाई हैं,

وَٱلذَّابُّ عَنْ دِينِهِ
वज़्ज़ाब्बु अ़न दीनिही
और उसके दीन के रक्षक हैं,

وَٱلَّذِي نَطَقَ ٱلْقُرْآنُ بِتَفْضِيلِهِ
वल्लज़ी नत़क़ल-क़ुरआनु बितफ़ज़ीलिही
और वही हैं जिनकी फ़ज़ीलत को क़ुरआन ने बयान किया है;

قَالَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ:
क़ालल्लाहु तआ़ला
अल्लाह तआ़ला फ़रमाता है:

”وَفَضَّلَ ٱللَّهُ ٱلْمُجَاهِدِينَ عَلَىٰ ٱلْقَاعِدِينَ أَجْراً عَظِيماً.
व फ़ज़्ज़लल्लाहु अल-मुजाहिदीना अ़ला अल-क़ाअ़िदीना अज्रन अ़ज़ीमा
“और अल्लाह ने जिहाद करने वालों को बैठ रहने वालों पर बहुत बड़े अज्र से फ़ज़ीलत दी है।

دَرَجَاتٍ مِنْهُ وَمَغْفِرَةً وَرَحْمَةً
दरजातिन मिन्हु व मग़फ़िरतन व रह़मतन
उसकी तरफ़ से ऊँचे दर्जे, बख़्शिश और रहमत है,

وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُوراً رَحِيماً.“
व काना-ल्लाहु ग़फ़ूरन रहीमा
और अल्लाह बहुत बख़्शने वाला, बहुत मेहरबान है।”

وَقَالَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ:
व क़ालल्लाहु तआ़ला
और अल्लाह तआ़ला फ़रमाता है:

”أَجَعَلْتُمْ سِقَايَةَ ٱلْحَاجِّ وَعِمَارَةَ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ
अजअ़ल्तुम सिक़ायतल-हाज्जि व इमारतल-मस्जिदिल-हराम
“क्या तुम हाजियों को पानी पिलाने और मस्जिदे-हराम की ख़िदमत को

كَمَنْ آمَنَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلآخِرِ وَجَاهَدَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ؟
कमन आमना बिल्लाहि वल-यौमिल-आख़िरि व जाहदा फ़ी सबीलिल्लाह
उस शख़्स के बराबर ठहराते हो जो अल्लाह और आख़िरत पर ईमान लाया और अल्लाह की राह में जिहाद किया?

لاَ يَسْتَوُونَ عِنْدَ ٱللَّهِ
ला यस्तवूना अ़िंदल्लाह
वे अल्लाह के नज़दीक बराबर नहीं हैं,

وَٱللَّهُ لاَ يَهْدِي ٱلْقَوْمَ ٱلظَّالِمِينَ.
वल्लाहु ला यहदी अल-क़ौमज़-ज़ालिमीन
और अल्लाह ज़ालिम क़ौम को हिदायत नहीं देता।”

اَلَّذِينَ آمَنُوٱ وَهَاجَرُوٱ
अल्लज़ीना आमनू व हाजरू
वे लोग जो ईमान लाए और हिजरत की,

وَجَاهَدُوٱ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنْفُسِهِمْ
व जाहदू फ़ी सबीलिल्लाहि बि-अम्वालिहिम व अंफ़ुसिहिम
और अल्लाह की राह में अपने माल और अपनी जानों से जिहाद किया,

أَعْظَمُ دَرَجَةً عِنْدَ ٱللَّهِ
अअ़ज़मु दरजतन अ़िंदल्लाह
वे अल्लाह के नज़दीक बहुत ऊँचे दर्जे वाले हैं,

وَأُولٰئِكَ هُمُ ٱلْفَائِزُونَ.
व उलाइक हमुल-फ़ाइज़ून
और वही लोग कामयाब होने वाले हैं।

يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُمْ بِرَحْمَةٍ مِنْهُ وَرِضْوَانٍ
युबश्शिरुहुम रब्बुहुम बिरह़मतिन मिन्हु व रिज़वानिन
उनका रब उन्हें अपनी रहमत और अपनी रज़ामंदी की खुशख़बरी देता है।

وَجَنَّاتٍ لَهُمْ فِيهَا نَعِيمٌ مُقِيمٌ.
व जन्नातिं लहुम फीहा नईमुन मुक़ीमुन
और उनके लिए ऐसे बाग़ात हैं जिनमें हमेशा रहने वाली नेमतें हैं।

خَالِدِينَ فِيهَا أَبَداً
ख़ालिदीना फीहा अबदन
वे उसमें हमेशा हमेशा रहने वाले होंगे।

إِنَّ ٱللَّهَ عِنْدَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ.“
इन्नल्लाह अ़िन्दहु अज्रुन अ़ज़ीमुन
यक़ीनन अल्लाह के पास बहुत बड़ा अज्र है।

أَشْهَدُ أَنَّكَ ٱلْمَخْصُوصُ بِمِدْحَةِ ٱللَّهِ
अशहदु अन्नका अल-मख़्सूसु बि-मिधति-ल्लाह
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह की तारीफ़ विशेष रूप से आपके ही लिए है।

ٱلْمُخْلِصُ لِطَاعَةِ ٱللَّهِ
अल-मुख़लिसु लि-ताअ़ति-ल्लाह
और आप अल्लाह की इताअ़त में सबसे ज़्यादा ख़ुलूस रखने वाले हैं।

لَمْ تَبْغِ بِٱلْهُدَىٰ بَدَلاً
लम तब्ग़ि बिल-हुदा बदला
आपने हिदायत के बदले कभी कोई और चीज़ क़बूल नहीं की।

وَلَمْ تُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّكَ أَحَداً
व लम तुश्रिक बि-इबादति रब्बिका अहदन
और आपने अपने रब की इबादत में किसी को शरीक नहीं ठहराया।

وَأَنَّ ٱللَّهَ تَعَالَىٰ ٱسْتَجَابَ لِنَبِيِّهِ
व अन्नल्लाह तआ़ला इस्तजाबा लि-नबिय्यिही
और यक़ीनन अल्लाह तआ़ला ने अपने नबी की दुआ क़बूल फ़रमाई,

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ فِيكَ دَعْوَتَهُ
सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिही फीका दअ़वतहू
जो आपके बारे में थी; अल्लाह की दरूद और सलाम हो उन पर और उनके अहले-बैत पर।

ثُمَّ أَمَرَهُ بِإِظْهَارِ مَا أَوْلاَكَ لأُمَّتِهِ
थुम्मा अमरहू बि-इज़्हारि मा औलाक लि-उम्मतिही
फिर उसे हुक्म दिया कि वह आपकी वह हैसियत ज़ाहिर करे जो आपको उसकी उम्मत में दी गई,

إِعْلاءً لِشَأْنِكَ
इअ़लाअन लि-शानिका
ताकि आपका मक़ाम बुलंद किया जाए,

وَإِعْلاناً لِبُرْهَانِكَ
व इअ़लानन लि-बुर्हानिका
और आपकी विलायत की दलील को खुलकर बयान किया जाए,

وَدَحْضاً لِلأَبَاطِيلِ
व दह़दन लिल-अबात़ील
और झूठे दावों को पूरी तरह रद्द किया जाए,

وَقَطْعاً لِلْمَعَاذِيرِ
व क़त़अन लिल-मअ़ाज़ीर
और हर बहाने को ख़त्म कर दिया जाए।

فَلَمَّا أَشْفَقَ مِنْ فِتْنَةِ ٱلْفَاسِقِينَ
फ़लम्मा अशफ़क़ मिन फ़ित्नतिल-फ़ासिक़ीन
फिर जब नबी को फ़ासिक़ों की फ़ित्ना-अंदाज़ी का डर हुआ,

وَٱتَّقَىٰ فِيكَ ٱلْمُنَافِقِينَ
वत्तक़ा फीका अल-मुनाफ़िक़ीन
और उन्होंने नहीं चाहा कि मुनाफ़िक़ आपके सामने खड़े हों,

أَوْحَىٰ إِلَيْهِ رَبُّ ٱلْعَالَمِينَ:
औह़ा इलैहि रब्बुल-आलमीन
तो रब्बुल-आलमीन ने उन पर वह़ी नाज़िल फ़रमाई:

”يَا أَيُّهَا ٱلرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ
या अय्युह़र-रसूलु बल्लिघ़ मा उनज़िला इलैका मिन रब्बिका
“ऐ रसूल! जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाज़िल किया गया है, उसे पहुँचा दो।

وَإِنْ لَمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُ
व इन लम तफ़अ़ल फ़मा बल्लग़्ता रिसालतहू
और अगर तुमने ऐसा न किया तो उसकी रिसालत अदा नहीं की।

وَٱللَّهُ يَعْصِمُكَ مِنَ ٱلنَّاسِ.“
वल्लाहु यअ़सिमुका मिनन-नास
और अल्लाह तुम्हें लोगों से महफ़ूज़ रखेगा।”

فَوَضَعَ عَلَىٰ نَفْسِهِ أَوْزَارَ ٱلْمَسِيرِ
फ़वज़अ़ अ़ला नफ़्सिही औज़ारल-मसीर
तो नबी ने सफ़र की सारी मशक्क़तें अपने ऊपर ले लीं,

وَنَهَضَ فِي رَمْضَاءِ ٱلْهَجِيرِ
व नह़ज़ा फी रमज़ाइ-ल-हजीर
और रेगिस्तान की तपती धूप में खड़े हुए,

فَخَطَبَ وَأَسْمَعَ
फ़ख़त़बा व अस्मअ़
फिर ख़ुत्बा दिया और सबको सुनाया,

وَنَادَىٰ فَأَبْلَغَ
व नादा फ़ा-अबलग़
और बुलंद आवाज़ से पुकारा और पूरी तरह पहुँचा दिया,

ثُمَّ سَأَلَهُمْ أَجْمَعَ
थुम्मा सअ़लहुम अज्मअ़
फिर सब से पूछा,

فَقَالَ: ”هَلْ بَلَّغْتُ؟“
फ़क़ाला हल बल्लग़्तु
“क्या मैंने पहुँचा दिया?”

فَقَالُوٱ: ”اَللَّهُمَّ بَلَىٰ.“
फ़क़ालू अल्लाहुम्मा बला
उन्होंने कहा: “हाँ, अल्लाह की क़सम!”

فَقَالَ: ”اَللَّهُمَّ ٱشْهَدْ.“
फ़क़ाला अल्लाहुम्मश-हद
तो नबी ने फ़रमाया: “ऐ अल्लाह! तू गवाह रह।”

ثُمَّ قَالَ: ” أَلَسْتُ أَوْلَىٰ بِٱلْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ؟“
थुम्मा क़ाला अलस्तु औला बिल-मुअ़मिनीना मिन अंफ़ुसिहिम
फिर फ़रमाया: “क्या मैं मोमिनों पर उनकी जानों से ज़्यादा हक़ नहीं रखता?”

فَقَالُوٱ: ”بَلَىٰ.“
फ़क़ालू बला
उन्होंने कहा: “हाँ!”

فَأَخَذَ بِيَدِكَ وَقَالَ:
फ़अख़ज़ा बि-यदिका व क़ाला
फिर उन्होंने आपका हाथ पकड़ा और फ़रमाया:

”مَنْ كُنْتُ مَوْلاَهُ فَهٰذَا عَلِيٌّ مَوْلاَهُ
मन कुंतु मौलाहु फ़हाज़ा अलीय्युन मौलाहु
जिसका मैं मौला हूँ, यह अली उसका मौला है।

اَللَّهُمَّ وَالِ مَنْ وَالاَهُ
अल्लाहुम्मा वालि मन वालाहु
ऐ अल्लाह! जो अली से दोस्ती करे, तू उससे दोस्ती कर।

وَعَادِ مَنْ عَادَاهُ
व आ़दि मन आ़दाहु
और जो उससे दुश्मनी करे, तू उससे दुश्मनी कर।

وَٱنْصُرْ مَنْ نَصَرَهُ
व अन्सुर मन नसरहू
और जो अली की मदद करे, तू उसकी मदद कर।

وَٱخْذُلْ مَنْ خَذَلَهُ.“
व अख़ज़ुल मन ख़ज़लहू
और जो अली को छोड़ दे, तू उसे बे-सहारा छोड़ दे।

فَمَا آمَنَ بِمَا أَنْزَلَ ٱللَّهُ فِيكَ عَلَىٰ نَبِيِّهِ إِلاَّ قَلِيلٌ
फ़मा आमना बिमा अन्ज़लल्लाहु फीका अला नबिय्यिही इल्ला क़लीलुन
तो अल्लाह ने जो तुम्हारे बारे में अपने नबी पर नाज़िल किया, उस पर बहुत थोड़े लोग ही ईमान लाए।

وَلاَ زَادَ أَكْثَرَهُمْ غَيْرَ تَخْيِيرٍ
व ला ज़ादा अक़्सरहुम ग़ैर तख़य्यीरिन
और ज़्यादातर लोगों के लिए यह ऐलान हठ और ज़िद के सिवा कुछ न बढ़ा सका।

وَلَقَدْ أَنْزَلَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ فِيكَ مِنْ قَبْلُ وَهُمْ كَارِهُونَ:
व लक़द अन्ज़लल्लाहु तआ़ला फीका मिन क़ब्लु वहुम कारिहून
और इससे पहले भी अल्लाह तआ़ला ने तुम्हारे बारे में नाज़िल किया, जबकि वे नाख़ुश थे:

”يَا أَيُّهَا ٱلَّذِينَ آمَنُوٱ
या अय्युहल्-लज़ीना आमनू
“ऐ ईमान वालों!

مَنْ يَرْتَدَّ مِنْكُمْ عَنْ دِينِهِ
मन यरताَد्द मिन्कुम अ़न दीनिही
तुम में से जो अपने दीन से फिर जाए,

فَسَوْفَ يَأْتِي ٱللَّهُ بِقَوْمٍ يُحِبُّهُمْ وَيُحِبُّونَهُ
फ़सौफ़ा यअ़तील्लाहु बिक़ौमिन युह़िब्बुहुम व युह़िब्बूनहू
तो अल्लाह ऐसे लोगों को ले आएगा जिन्हें वह प्यार करेगा और वे उससे प्यार करेंगे।

أَذِلَّةٍ عَلَىٰ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अज़िल्लतिन अ़लल्-मुअ़मिनीन
वे मोमिनों के लिए नरम और विनम्र होंगे,

أَعِزَّةٍ عَلَىٰ ٱلْكَافِرِينَ
अअ़िज़्ज़तिन अ़लल्-काफ़िरीन
और काफ़िरों के सामने सख़्त और ताक़तवर होंगे।

يُجَاهِدُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ
युजाहिदूना फी सबीलिल्लाह
वे अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे,

وَلاَ يَخَافُونَ لَوْمَةَ لاَئِمٍ
व ला यख़ाफ़ूना लौमत लाअ़इम
और किसी मलामत करने वाले की मलामत से नहीं डरेंगे।

ذٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَنْ يَشَاءُ
ज़ालिका फ़ज़्लुल्लाहि यु़तीहि मन यशा
यह अल्लाह का फ़ज़्ल है, वह जिसे चाहता है देता है।

وَٱللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ.
वल्लाहु वासिअ़ुन अ़लीम
और अल्लाह बहुत वुसअ़त वाला, सब कुछ जानने वाला है।

اَللَّهُمَّ إِنَّا نَعْلَمُ أَنَّ هٰذَا هُوَ ٱلْحَقُّ مِنْ عِنْدِكَ
अल्लाहुम्मा इन्ना नअ़लमु अन्ना हाज़ा हुवल्-ह़क़्क़ु मिन अ़िन्दिका
ऐ अल्लाह! हम जानते हैं कि यह तेरी तरफ़ से हक़ है।

وَسَيَعْلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٱ أَيَّ مُنْقَلَبٍ يَنْقَلِبُونَ
व सयअ़लमु अल्लज़ीना ज़लमू अय्य मुनक़लबिन यनक़लिबून
और ज़ालिम बहुत जल्द जान लेंगे कि वे किस अंजाम की तरफ़ लौटाए जाएँगे।

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अ़लैका या अमीरल्-मुअ़मिनीन
आप पर सलाम हो, ऐ अमीरुल-मोमिनीन।

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रह़मतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रह़मत और उसकी बरकतें आप पर हों।

وَصَلَوَاتُهُ وَتَحِيَّاتُهُ
व सलवातुहू व तहिय्यातुहू
तो उस पर दुरूद और सलाम हों।

أَنْتَ مُطْعِمُ ٱلطَّعَامِ عَلَىٰ حُبِّهِ مِسْكِيناً وَيَتِيماً وَأَسِيراً
अंता मुत्अ़िमुत्-तआ़मि अ़ला हुब्बिही मिस्कीनन व यतीमन व असीरन
तू ही वह है जिसने अल्लाह की मुहब्बत में मिस्कीन, यतीम और क़ैदी को खाना खिलाया।

لِوَجْهِ ٱللَّهِ لاَ تُرِيدُ مِنْهُمْ جَزَاءً وَلاَ شُكُوراً
लिवज्हिल्लाहि ला तुरीदु मिन्हुम जज़ाअन व ला शुकूरन
यह सब तूने सिर्फ़ अल्लाह की ख़ुशी के लिए किया, न बदला चाहा और न शुक्र।

وَفِيكَ أَنْزَلَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ:
व फीका अंज़लल्लाहु तआ़ला
और तेरे बारे में अल्लाह तआ़ला ने यह आयत नाज़िल की:

”وَيُؤْثِرُونَ عَلَىٰ أَنْفُسِهِمْ وَلَوْ كَانَ بِهِمْ خَصَاصَةٌ
व यु़अ़थिरूना अ़ला अंफुसिहिम व लौ काना बिहिम ख़सासतन
“और वे दूसरों को अपने ऊपर तरजीह देते हैं, चाहे ख़ुद तंगी में हों।

وَمَنْ يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ.“
व मन यूक़ शुह्हा नफ़्सिही फ़उला-इका हुमुल-मुफ़लिहून
और जो अपने नफ़्स की बुख़्ल से बचा लिया जाए, वही लोग कामयाब हैं।”

وَأَنْتَ ٱلْكَاظِمُ لِلْغَيْظِ
व अंता अल-काज़िमु लिल-ग़ैज़ि
और तू ग़ुस्से को पी जाने वाला है।

وَٱلْعَافِي عَنِ ٱلنَّاسِ
वल-आ़फ़ी अ़निन्नास
और लोगों को माफ़ करने वाला है।

وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ
वल्लाहु युह़िब्बुल-मुह़सिनीन
और अल्लाह नेक काम करने वालों से मुहब्बत करता है।

وَأَنْتَ ٱلصَّابِرُ فِي ٱلْبَأْسَاءِ وَٱلضَّرَّاءِ وَحِينَ ٱلْبَأْسِ
व अंता अस-साबिरु फिल-बसाअि वद्दर्राअि व हीनल-बस
और तू सख़्ती, तकलीफ़ और जंग के वक़्त सब्र करने वाला है।

وَأَنْتَ ٱلْقَاسِمُ بِٱلسَّوِيَّةِ
व अंता अल-क़ासिमु बिस्सविय्यति
और तू बराबरी के साथ तक़सीम करने वाला है।

وَٱلْعَادِلُ فِي ٱلرَّعِيَّةِ
वल-आ़दिलु फिर-रइय्यति
और रइय्यत के बीच इंसाफ़ करने वाला है।

وَٱلْعَالِمُ بِحُدُودِ ٱللَّهِ مِنْ جَمِيعِ ٱلْبَرِيَّةِ
वल-आ़लिमु बि-ह़ुदूदिल्लाहि मिन जमीअ़िल-बरिय्यति
और अल्लाह की हुदूद को तमाम मख़लूक़ में सबसे बेहतर जानने वाला है।

وَٱللَّهُ تَعَالَىٰ أَخْبَرَ عَمَّا أَوْلاَكَ مِنْ فَضْلِهِ بِقَوْلِهِ:
वल्लाहु तआ़ला अख़बरा अम्मा औलाका मिन फ़ज़्लिही बिक़ौलिही
और अल्लाह तआ़ला ने तेरे फ़ज़्ल के बारे में फ़रमाया:

”أَفَمَنْ كَانَ مُؤْمِناً كَمَنْ كَانَ فَاسِقاً؟
अफ़मन काना मुअ़मिनन कमन काना फ़ासिक़न
“क्या ईमान वाला फ़ासिक़ जैसा हो सकता है?

لاَ يَسْتَوُونَ.
ला यस्तवून
वे बराबर नहीं हो सकते।

أَمَّا ٱلَّذِينَ آمَنُوٱ وَعَمِلُوٱ ٱلصَّالِحَاتِ
अम्मल्लज़ीना आमनू व अ़मिलुस्सालिह़ात
रहे वे लोग जो ईमान लाए और अच्छे काम किए,

فَلَهُمْ جَنَّاتُ ٱلْمَأْوَىٰ نُزُلاً بِمَا كَانُوٱ يَعْمَلُونَ.“
फ़लहुम जन्नातुल-मअ़वा नुज़ुलन बिमा कानू यअ़मलून
तो उनके लिए जन्नतें हैं, उनके आमाल के बदले मेहमाननवाज़ी के तौर पर।

وَأَنْتَ ٱلْمَخْصُوصُ بِعِلْمِ ٱلتَّنْزِيلِ
व अंता अल-मख़्सूसु बिइ़ल्मित्तन्ज़ील
और तुझे ही नाज़िल हुई वह़ी का ख़ास इल्म दिया गया।

وَحُكْمِ ٱلتَّأْوِيلِ
व हुक्मित्त-तअ़वील
और उसके सही मतलब का हुक्म भी।

وَنَصِّ ٱلرَّسُولِ
व नस्‍सिर्रसूल
और रसूल की साफ़ नसीहत भी।

وَلَكَ ٱلْمَوَاقِفُ ٱلْمَشْهُودَةُ
व लकल-मवाक़िफ़ुल-मशहूदा
और तेरे मशहूर कारनामे हैं,

وَٱلْمَقَامَاتُ ٱلْمَشْهُورَةُ
वल-मक़ामातुल-मशहूरा
तेरे ऊँचे मक़ाम हैं,

وَٱلأَيَّامُ ٱلْمَذْكُورَةُ
वल-अय्यामुल-मज़कूरा
और यादगार दिन हैं,

يَوْمَ بَدْرٍ وَيَوْمَ ٱلأَحْزَابِ:
यौमा बद्रिन व यौमल-अह़ज़ाब
बद्र का दिन और अह़ज़ाब का दिन।

”إِذْ زَاغَتِ ٱلأَبْصَارُ وَبَلَغَتِ ٱلْقُلُوبُ ٱلْحَنَاجِرَ
इज़ ज़ाग़तिल-अबसारु व बलग़तिल-क़ुलूबुल-हनाजिर
जब निगाहें भटक गईं और दिल गलों तक आ पहुँचे,

وَتَظُنّونَ بِٱللَّهِ ٱلظّنُونَٱ
व तज़ुन्नूना बिल्लाहिल-ज़ुन्नूना
और तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के ख़याल करने लगे।

هُنَالِكَ ٱبْتُلِيَ ٱلْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوٱ زِلْزَالاً شَدِيداً.
हुनालिका इब्तुलियाल-मुअ़मिनूना व ज़ुलज़िलू ज़िलज़ालन शदीदा
वहाँ ईमान वालों की आज़माइश हुई और वे सख़्त झटकों से हिला दिए गए।

وَإِذْ يَقُولُ ٱلْمُنَافِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ:
व इज़ यक़ूलुल-मुनाफ़िक़ूना वल्लज़ीना फ़ी क़ुलूबिहिम मरज़ुन
और जब मुनाफ़िक़ और वे लोग जिनके दिलों में बीमारी थी, कहने लगे,

مَا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُ إِلاَّ غُرُوراً.
मा वअ़दनल्लाहु व रसूलुहू इल्ला ग़ुरूरा
अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे सिर्फ़ धोखे का वादा किया है।

وَإِذْ قَالَتْ طَائِفَةٌ مِنْهُمْ:
व इज़ क़ालत ताइफ़तुन मिन्हुम
और जब उनमें से एक गिरोह बोला,

يَا أَهْلَ يَثْرِبَ لاَ مُقَامَ لَكُمْ فَٱرْجِعُوٱ
या अह्ला यस़रिब ला मुक़ामा लकुम फरजिअ़ू
ऐ यसरिब वालों! यहाँ तुम्हारे ठहरने की जगह नहीं, लौट जाओ।

وَيَسْتَأْذِنُ فَرِيقٌ مِنْهُمُ ٱلنَّبِيَّ
व यस्तअ़ज़िनु फ़रीक़ुन मिन्हुमुन्नबी
और उनमें से एक दल नबी से इजाज़त माँगने लगा,

يَقُولُونَ إِنَّ بُيُوتَنَا عَوْرَةٌ
यक़ूलूना इन्ना बयूतना अ़वरतुन
कहते थे कि हमारे घर खुले पड़े हैं।

وَمَا هِيَ بِعَوْرَةٍ إِنْ يُرِيدُونَ إِلاَّ فِرَاراً.“
व मा हिया बिअ़वरतिन इन युरीदूना इल्ला फ़िरारा
हालाँकि वे खुले नहीं थे, वे तो सिर्फ़ भागना चाहते थे।

وَقَالَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ:
व क़ालल्लाहु तआ़ला
और अल्लाह तआ़ला ने फ़रमाया:

”وَلَمَّا رَأَىٰ ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلأَحْزَابَ قَالُوٱ:
व लम्मा रअल-मुअ़मिनूनल-अह़ज़ाब क़ालू
और जब ईमान वालों ने अह़ज़ाब को देखा तो कहा,

هٰذَا مَا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُ
हाज़ा मा वअ़दनल्लाहु व रसूलुहू
यही है जिसका वादा अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे किया था।

وَصَدَقَ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُ؛
व सदक़ल्लाहु व रसूलुहू
और अल्लाह और उसका रसूल सच्चे हैं।

وَمَا زَادَهُمْ إِلاَّ إِيـمَاناً وَتَسْلِيماً.“
व मा ज़ादहुम इल्ला ईमानन व तस्लीमा
इससे उनका ईमान और फरमाबरदारी ही बढ़ी।

فَقَتَلْتَ عَمْرَوهُمْ
फ़क़तल्ता अ़म्रहुम
तूने उनके सूरमा अम्र को क़त्ल किया,

وَهَزَمْتَ جَمْعَهُمْ
व हज़म्ता जमअ़हुम
और उनकी जमाअ़त को शिकस्त दी।

”وَرَدَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٱ بِغَيْظِهِمْ
व रद्दल्लाहुल्लज़ीना कफ़रू बिघैज़िहिम
अल्लाह ने काफ़िरों को उनके ग़ुस्से के साथ लौटा दिया।

لَمْ يَنَالُوٱ خَيْراً
लम यनालू ख़ैरन
उन्हें कोई भलाई हासिल न हुई।

وَكَفَىٰ ٱللَّهُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلْقِتَالَ
व कफ़ल्लाहुल-मुअ़मिनीनल-क़िताल
और अल्लाह ने ईमान वालों को लड़ाई से बेनियाज़ कर दिया।

وَكَانَ ٱللَّهُ قَوِيّاً عَزِيزاً.“
व कानल्लाहु क़विय्यन अ़ज़ीज़ा
और अल्लाह ज़ोर वाला, ग़ालिब है।

وَيَوْمَ أُحُدٍ: ”إِذْ يُصْعِدُونَ وَلاَ يَلْوُونَ عَلَىٰ أَحَدٍ
व यौमा उहुदिन इज़ युस़अ़िदूना व ला यलवूना अ़ला अह़द
और उहुद के दिन, जब वे भागते जा रहे थे और किसी की परवाह न करते थे,

وَٱلرَّسُولُ يَدْعُوهُمْ فِي أُخْرَاهُمْ.“
वर्रसूलु यद्अ़ूहुम फ़ी उख़राहुम
और रसूल उन्हें पीछे से पुकार रहे थे।

وَأَنْتَ تَذُودُ بِهِمُ ٱلْمُشْرِكِينَ عَنِ ٱلنَّبِيِّ
व अंता तज़ूदु बिहिमुल-मुश्रिकीन अ़निन्नबी
और तू मुश्रिकों को नबी से दूर करता रहा,

ذَاتَ ٱلْيَمِينِ وَذَاتَ ٱلشِّمَالِ
ज़ातल-यमीनी व ज़ातश-शिमाल
दाएँ और बाएँ दोनों ओर से,

حَتَّىٰ رَدَّهُمُ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ عَنْكُمَا خَائِفِينَ
हत्ता रद्दहुमुल्लाहु तआ़ला अ़नकुमा ख़ाइफ़ीन
यहाँ तक कि अल्लाह ने उन्हें डरते हुए वापस लौटा दिया।

وَنَصَرَ بِكَ ٱلْخَاذِلِينَ
व नसरा बिका अल-ख़ाज़िलीन
और तेरे ज़रिये उन्हें मदद मिली।

وَيَوْمَ حُنَيْنٍ عَلَىٰ مَا نَطَقَ بِهِ ٱلتَّنْزِيلُ:
व यौमा हुनैनिन अ़ला मा नत़क़ा बिहित्तन्ज़ील
और हुनैन के दिन, जैसा कि वह़ी बयान करती है,

”إِذْ أَعْجَبَتْكُمْ كَثْرَتُكُمْ فَلَمْ تُغْنِ عَنْكُمْ شَيْئاً
इज़ अअ़जबत्कुम कसरतुकुम फ़लम तुग़्नी अ़नकुम शैअन
जब तुम्हारी बहुतायत ने तुम्हें घमंड में डाल दिया, मगर कुछ काम न आई।

وَضَاقَتْ عَلَيْكُمُ ٱلأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ
व दाक़त अ़लैकुमुल-अर्दु बिमा रहुबत
और ज़मीन अपनी सारी वुसअ़त के बावजूद तंग हो गई,

ثُمَّ وَلَّيْتُمْ مُدْبِرِينَ.
सुम्म वल्लैतुम मुद्बिरीन
फिर तुम पीठ फेर कर भाग खड़े हुए।

ثُمَّ أَنْزَلَ ٱللَّهُ سَكِينَتَهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ وَعَلَىٰ ٱلْمُؤْمِنِينَ.“
सुम्म अंज़लल्लाहु सकीनतहू अ़ला रसूलिही व अ़लल-मुअ़मिनीन
फिर अल्लाह ने अपने रसूल और ईमान वालों पर इत्मीनान नाज़िल किया।

وَٱلْمُؤْمِنُونَ أَنْتَ وَمَنْ يَلِيكَ
वल-मुअ़मिनूना अंता व मन यलीक
ईमान वाले तू था और तेरे साथ वाले थे।

وَعَمُّكَ ٱلْعَبَّاسُ يُنَادِي ٱلْمُنْهَزِمِينَ:
व अ़म्मुकल-अ़ब्बासु युनादील-मुनहज़िमीन
तेरे चाचा अब्बास हारने वालों को पुकार रहे थे,

يَا أَصْحَابَ سُورَةِ ٱلْبَقَرَةِ
या अस्हाबा सूरतील-बक़रा
ऐ सूरह बक़रा वालों!

يَا أَهْلَ بَيْعَةِ ٱلشَّجَرَةِ
या अह्ला बैअ़तिश-शजरा
ऐ शजरा की बैअ़त करने वालों!

حَتَّىٰ ٱسْتَجَابَ لَهُ قَوْمٌ قَدْ كَفَيْتَهُمُ ٱلْمَؤُونَةَ
हत्ता इस्तजाबा लहू क़ौमुन क़द कफ़ैतहुमुल-मऊना
यहाँ तक कि एक जमाअ़त ने जवाब दिया, जबकि तूने उनकी जगह जंग सँभाली थी।

وَتَكَفَّلْتَ دُونَهُمُ ٱلْمَعُونَةَ
व तकफ़्फ़ल्ता दूनहुमुल-मअ़ूना
और तू ही नबी की मदद करने वाला बना।

فَعَادُوٱ آيِسِينَ مِنَ ٱلْمَثُوبَةِ
फ़आ़दू आयिसीना मिनल-मथूबा
वे सवाब से मायूस लौटे,

رَاجِينَ وَعْدَ ٱللَّهِ تَعَالَىٰ بِٱلتَّوْبَةِ
राजीना वअ़दल्लाहि तआ़ला बित्तौबा
और अल्लाह के तौबा के वादे की उम्मीद रखने लगे।

وَذٰلِكَ قَوْلُ ٱللَّهِ جَلَّ ذِكْرُهُ:
व ज़ालिका क़ौलुल्लाहि जल्ला ज़िक्रुहू
और अल्लाह, जिसकी याद बुलंद है, फ़रमाता है:

”ثُمَّ يَتُوبُ ٱللَّهُ مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَ عَلَىٰ مَنْ يَشَاءُ.“
सुम्म यतूबुल्लाहु मिन बअ़दि ज़ालिका अ़ला मन यशा
फिर इसके बाद अल्लाह जिस पर चाहे मेहरबानी से तौबा क़बूल करता है।

وَأَنْتَ حَائِزٌ دَرَجَةَ ٱلصَّبْرِ
व अंता हाइज़ुन दरजतस्सब्रि
और तू सब्र के दर्जे का हक़दार ठहरा,

فَائِزٌ بِعَظِيمِ ٱلأَجْرِ
फ़ाइज़ुन बि-अज़ीमिल-अज्रि
और बड़े अजर से कामयाब हुआ।

وَيَوْمَ خَيْبَرَ إِذْ أَظْهَرَ ٱللَّهُ خَوَرَ ٱلْمُنَافِقِينَ
व यौमा ख़ैबर इज़ अज़्हरल्लाहु ख़वरल-मुनाफ़िक़ीन
और ख़ैबर के दिन, जब अल्लाह ने मुनाफ़िक़ों की बुज़दिली ज़ाहिर कर दी,

وَقَطَعَ دَابِرَ ٱلْكَافِرِينَ
व क़तअ़ दाबिरल-काफ़िरीन
और काफ़िरों की जड़ काट दी,

وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ:
वल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल-आ़लमीन
तो सारी तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहानों का रब है:

”وَلَقَدْ كَانُوٱ عَاهَدُوٱ ٱللَّهَ مِنْ قَبْلُ لاَ يُوَلُّونَ ٱلأَدْبَارَ
व लक़द कानू आ़हदुल्लाहा मिन क़ब्लु ला युवल्लूनल-अदबार
और बेशक उन्होंने इससे पहले अल्लाह से अहद किया था कि पीठ नहीं फेरेंगे।

وَكَانَ عَهْدُ ٱللَّهِ مَسْؤُولاً.“
व काना अ़ह्दुल्लाहि मसऊला
और अल्लाह के अहद के बारे में ज़रूर पूछ की जाएगी।

مَوْلاَيَ أَنْتَ ٱلْحُجَّةُ ٱلْبَالِغَةُ
मौलाया अंता अल्हुज्जतुल-बालिग़ा
ऐ मेरे मौला! तू अल्लाह की पूरी और क़ायम दलील है,

وَٱلْمَحَجَّةُ ٱلْوَاضِحَةُ
वल-महज्जतुल-वाज़िहा
और बिल्कुल साफ़ रास्ता है,

وَٱلنِّعْمَةُ ٱلسَّابِغَةُ
वल-निअ़मतुस्साबिग़ा
और पूरी तरह छाई हुई नेअमत है,

وَٱلْبُرْهَانُ ٱلْمُنِيرُ
वल-बुर्हानुल-मुनीर
और रौशन वाज़ेह़ दलील है।

فَهَنِيئاً لَكَ بِمَا آتَاكَ ٱللَّهُ مِنْ فَضْلٍ
फ़हनीअन लका बिमा आताकल्लाहु मिन फ़ज़्लिन
तो मुबारक हो तुझे, उस फ़ज़्ल पर जो अल्लाह ने तुझे अता किया।

وَتَبّاً لِشَانِئِكَ ذِي ٱلْجَهْلِ
व तब्बन लिशानि’इका ज़िल-जहलि
और हलाकत है तेरे दुश्मन के लिए जो जहालत में डूबा हुआ है।

شَهِدْتَ مَعَ ٱلنَّبِيِّ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
शहिद्ता मअ़न्नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिही
तू नबी के साथ मौजूद रहा — अल्लाह की सलामती हो उन पर और उनके अहले-बैत पर —

جَمِيعَ حُرُوبِهِ وَمَغَازِيهِ
जमीअ़ हुरूबिही व मग़ाज़ीही
उनकी तमाम जंगों और मुहिमों में,

تَحْمِلُ ٱلرَّايَةَ أَمَامَهُ
तह्मिलुर-रायता अमामहू
तू उनके सामने झंडा उठाए रहता,

وَتَضْرِبُ بِٱلسَّيْفِ قُدَّامَهُ
व तद्रिबु बिस्सैफ़ि क़ुद्दामहू
और उनके आगे तलवार चलाता था।

ثُمَّ لِحَزْمِكَ ٱلْمَشْهُورِ
सुम्म लि-ह़ज़्मिकल-मशहूर
फिर तेरी मशहूर मज़बूत राय के कारण,

وَبَصِيرَتِكَ فِي ٱلأُمُورِ
व बस़ीरतिका फिल-उमूर
और हर मामले में तेरी गहरी समझ की वजह से,

أَمَّرَكَ فِي ٱلْمَوَاطِنِ
अम्मरका फिल-मवातिन
नबी ने तुझे हर मौक़े पर अमीर मुक़र्रर किया,

وَلَمْ يَكُنْ عَلَيْكَ أَمِيرٌ
व लम यकुन अ़लैका अमीर
और तुझ पर कभी कोई अमीर नहीं रहा।

وَكَمْ مِنْ أَمْرٍ صَدَّكَ عَنْ إِمْضَاءِ عَزْمِكَ فِيهِ ٱلتُّقَىٰ
व कम मिन अम्रिन स़द्दका अ़न इमज़ाइ अ़ज़्मिक फ़ीहित्तुक़ा
कितनी ही बार ऐसा हुआ कि तेरी परहेज़गारी ने तुझे अपने इरादे पर अमल करने से रोक दिया,

وَٱتَّبَعَ غَيْرُكَ فِي مِثْلِهِ ٱلْهَوَىٰ
वत्तबअ़ ग़ैरुका फ़ी मिस़्लिहिल-हवा
जबकि दूसरे ने उसी मामले में अपनी ख़्वाहिश की पैरवी की।

فَظَنَّ ٱلْجَاهِلُونَ أَنَّكَ عَجَزْتَ عَمَّا إِلَيْهِ ٱنْتَهَىٰ
फ़ज़न्नल-जाहिलूना अन्नका अ़जज़्ता अ़म्मा इलैहि इंतेहा
तो जाहिलों ने समझ लिया कि तू उससे आजिज़ आ गया जो दूसरे ने कर दिखाया।

ضَلَّ وَٱللَّهِ الظَّانُّ لِذٰلِكَ وَمَا ٱهْتَدَىٰ
ज़ल्ला वल्लाहिज़-ज़ान्नु लिज़ालिका व मा इहतदा
अल्लाह की क़सम! ऐसा सोचने वाला गुमराह हुआ और उसे हिदायत न मिली।

وَلَقَدْ أَوْضَحْتَ مَا أَشْكَلَ مِنْ ذٰلِكَ لِمَنْ تَوَهَّمَ وَٱمْتَرَىٰ
व लक़द औज़ह्ता मा अश्कला मिन ज़ालिका लिमन तवह्हमा वम्तरा
और तूने उस शुब्हे को साफ़ कर दिया जिसमें शक और वहम करने वाले पड़े थे,

بِقَوْلِكَ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْكَ:
बिक़ौलिका सल्लल्लाहु अ़लैक
अपने इस क़ौल से — अल्लाह की सलामती हो तुझ पर:

”قَدْ يَرَىٰ ٱلْحُوَّلُ ٱلْقُلَّبُ وَجْهَ ٱلْحِيلَةِ
क़द यरा अल-हुव्वलुल-क़ुल्लबु वज्हल-हीला
अक़्लमंद आदमी चाल का रास्ता देख लेता है,

وَدُونَهَا حَاجِزٌ مِنْ تَقْوَىٰ ٱللَّهِ
व दूना हा हाजिज़ुन मिन तक़्वल्लाह
लेकिन अल्लाह का तक़वा उसके और उस चाल के बीच रोक बन जाता है,

فَيَدَعُهَا رَأْيَ ٱلْعَيْنِ
फ़यदअ़ुहा रअ़यल-अ़ैन
तो वह उसे सामने होते हुए भी छोड़ देता है,

وَيَنْتَهِزُ فُرْصَتَهَا مَنْ لاَ حَرِيجَةَ لَهُ فِي ٱلدِّينِ.“
व यंतहिज़ु फ़ुर्स़तहा मन ला हरीज़ा लहू फ़िद्दीन
और वही मौका उठाता है जिसे दीन की कोई परवाह नहीं होती।

صَدَقْتَ وَٱللَّهِ وَخَسِرَ ٱلْمُبْطِلُونَ
सदक़्ता वल्लाहि व ख़सिरल-मुब्तिलून
तूने बिल्कुल सच कहा, अल्लाह की क़सम! और बातिल वाले नुकसान में रहे।

وَإِذْ مَاكَرَكَ ٱلنَّاكِثَانِ
व इज़ माकरकल-नाक़िस़ान
और जब अहद तोड़ने वालों ने तुझसे चाल चली,

فَقَالاَ: نُرِيدُ ٱلْعُمْرَةَ.
फ़क़ाला नुरीदुल-उ़म्रा
और कहा: हम उमरा करना चाहते हैं।

فَقُلْتَ لَهُمَا: لَعَمْرُكُمَا مَا تُرِيدَانِ ٱلْعُمْرَةَ
फ़-क़ुल्ता लहुमाः ल-अ़म्रुकुमा मा तुरीदानिल-उ़म्रा
तो तूने उनसे कहा: तुम्हारी उम्र की क़सम, तुम उमरा का इरादा नहीं रखते,

لكِنْ تُرِيدَانِ ٱلْغَدْرَةَ.
लाकिन तुरीदानिल-ग़द्रा
बल्कि तुम मुझसे धोखा करना चाहते हो।

فَأَخَذْتَ ٱلْبَيْعَةَ عَلَيْهِمَا
फ़-अख़ज़्ता अल-बैअ़ता अ़लैहिमा
फिर तूने उनसे दोबारा बैअ़त ली,

وَجَدَّدْتَ ٱلْمِيثَاقَ
व जद्दद्ता अल-मीस़ाक़
और अहद को नए सिरे से पुख़्ता किया,

فَجَدَّا فِي ٱلنِّفَاقِ
फ़-जद्दा फ़िन्निफ़ाक़
लेकिन वे निफ़ाक़ में और ज़्यादा आगे बढ़ गए।

فَلَمَّا نَبَّهْتَهُمَا عَلَىٰ فِعْلِهِمَا أَغْفَلاَ وَعَادَا وَمَا ٱنْتَفَعَا
फ़-लम्मा नब्बह्तहुमाः अ़ला फ़िअ़लिहिमा अग़फ़ला व अ़आदा व मा इंतफ़आ
जब तूने उन्हें उनके अमल पर आगाह किया तो उन्होंने अनदेखी की, फिर वही किया और नसीहत से फ़ायदा न उठाया।

وَكَانَ عَاقِبَةُ أَمْرِهِمَا خُسْراً
व काना आ़क़िबतु अम्रिहिमा ख़ुस्रा
और उनके काम का अंजाम सरासर नुकसान रहा।

ثُمَّ تَلاَهُمَا أَهْلُ ٱلشَّامِ
सुम्म तला-हुमाः अह्लुश्शाम
इसके बाद अहले-शाम ने भी वही रास्ता अपनाया।

فَسِرْتَ إِلَيْهِمْ بَعْدَ ٱلإِعْذَارِ
फ़-सिरता इलैहिम बअ़दाल-इ़ज़ार
तो तू हर दलील पूरी करने के बाद उनकी तरफ़ बढ़ा,

وَهُمْ لاَ يَدِينُونَ دِينَ ٱلْحَقِّ
व हुम ला यदीनूना दीनल-ह़क़
हालाँकि वे दीन-ए-हक़ पर क़ायम न थे,

وَلاَ يَتَدَبَّرُونَ ٱلْقُرْآنَ
व ला यतदब्बरूनल-क़ुरआन
और न ही क़ुरआन में ग़ौर करते थे।

هَمَجٌ رُعَاعٌ ضَالُّونَ
हमजुन रु-अ़अ़न दाल्लून
वे गुमराह, बेहूदा और भटके हुए लोग थे,

وَبِٱلَّذِي أُنْزِلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ فِيكَ كَافِرُونَ
व बिल्लज़ी उंज़िला अ़ला मुहम्मद फ़ीका काफ़िरून
और जो कुछ मुहम्मद पर तेरे बारे में नाज़िल हुआ, उसके वे इंकार करने वाले थे,

وَلأَهْلِ ٱلْخِلاَفِ عَلَيْكَ نَاصِرُونَ
व लि-अह्लिल-ख़िलाफ़ि अ़लैका नासिरून
और तेरे मुख़ालिफ़ों के मददगार बने हुए थे।

وَقَدْ أَمَرَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ بِٱتِّبَاعِكَ
व क़द अमरल्लाहु तआ़ला बित्तिबाअ़िका
जबकि अल्लाह तआ़ला ने तेरी इताअ़त का हुक्म दिया था,

وَنَدَبَ ٱلْمُؤْمِنِينَ إِلَىٰ نَصْرِكَ
व नदब अल-मोमिनीन इला नसरिका
और मोमिनों को तेरी मदद की तरगीब दी थी।

وَقَالَ عَزَّ وَجَلَّ:
व क़ाला अ़ज़्ज़ व जल्ल
और अल्लाह अज़्ज़ो-जल ने फ़रमाया:

”يَا أَيُّهَا ٱلَّذِينَ آمَنُوٱ
या अय्युहल्लज़ीना आमनू
ऐ ईमान लाने वालो!

ٱتَّقُوٱ ٱللَّهَ وَكُونُوٱ مَعَ ٱلصَّادِقِينَ.“
इत्तक़ुल्लाहा व कूनू मअ़स्सादिक़ीन
अल्लाह से डरते रहो और सच्चों के साथ रहो।

مَوْلاَيَ بِكَ ظَهَرَ ٱلْحَقُّ
मौलाया बिका ज़हरल-ह़क़
ऐ मेरे मौला! तेरे ज़रिये हक़ ज़ाहिर हुआ,

وَقَدْ نَبَذَهُ ٱلْخَلْقُ
व क़द नबज़हुल-ख़ल्क़
लेकिन लोगों ने उसे ठुकरा दिया।

وَأَوْضَحْتَ ٱلسُّنَنَ بَعْدَ ٱلدُّرُوسِ وَٱلطَّمْسِ
व औज़ह्तस्सुनन बअ़दद्दुरूसि वत्तम्स
और तूने सुन्नतों को उस वक़्त साफ़ कर दिया जब वे मिटाई और भुला दी गई थीं।

فَلَكَ سَابِقَةُ ٱلْجِهَادِ عَلَىٰ تَصْدِيقِ ٱلتَّنْزِيلِ
फ़-लका साबिक़तुल-जिहादि अ़ला तस़दीक़ित-तन्ज़ील
तो तुझे वही जिहाद में पहली बरतरी हासिल हुई जो नाज़िल होने वाली वह़ी की तस्दीक़ के लिए थी,

وَلَكَ فَضِيلَةُ ٱلْجِهَادِ عَلَىٰ تَحْقِيقِ ٱلتَّأْوِيلِ
व लका फ़ज़ीलतुल-जिहादि अ़ला तह़क़ीक़ित-तअ़वील
और तुझे वही जिहाद की फ़ज़ीलत भी मिली जो सही तअ़वील को साबित करने के लिए थी।

وَعَدُوُّكَ عَدُوُّ ٱللَّهِ جَاحِدٌ لِرَسُولِ ٱللَّهِ
व अ़दुव्वुका अ़दुव्वुल्लाहि जाहिदुन लि-रसूलिल्लाह
और तेरा दुश्मन हक़ीक़त में अल्लाह का दुश्मन और रसूलुल्लाह का इंकार करने वाला है।

يَدْعُو بَاطِلاً وَيَحْكُمُ جَائِراً
यदऊ बातिलन व यह़कुमु जाइरन
वह बातिल की दावत देता है और नाइंसाफ़ फ़ैसले करता है,

وَيَتَأَمَّرُ غَاصِباً وَيَدْعُو حِزْبَهُ إِلَىٰ ٱلنَّارِ
व यतअ़म्मरु ग़ासिबन व यदऊ ह़िज़्बहु इलन्नार
ज़बरदस्ती हुकूमत जमाता है और अपने गिरोह को आग की तरफ़ बुलाता है।

وَعَمَّارٌ يُجَاهِدُ وَيُنَادِي بَيْنَ ٱلصَّفَّيْنِ:
व अ़म्मारुन युजाहिदु व युनादी बैनेस्सफ़्फ़ैन
और अम्मार जिहाद करता हुआ दोनों लश्करों के बीच पुकार रहा था:

”الرَّوَاحَ ٱلرَّوَاحَ إِلَىٰ ٱلْجَنَّةِ.“
अर्रवाहा अर्रवाहा इलल-जन्ना
चलो, चलो जन्नत की तरफ़!

وَلَمَّا ٱسْتَسْقَىٰ فَسُقِيَ ٱللَّبَنَ كَبَّرَ وَقَالَ:
व लम्मस्तस़्क़ा फ़स़ुक़ियल्लबन कabbara व क़ाला
फिर जब उसने पानी माँगा तो उसे दूध पिलाया गया, तो उसने तकबीर कही और बोला:

”قَالَ لِي رَسُولُ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ:
क़ाला ली रसूलुल्लाहि स़ल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिहि
मुझसे रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया था:

’آخِرُ شَرَابِكَ مِنَ ٱلدُّنْيَا ضَيَاحٌ مِنْ لَبَنٍ
आख़िरु शराबिक मिनद्दुन्या ज़याहुन मिन लबन
दुनिया में तेरा आख़िरी पेय दूध का प्याला होगा,

وَتَقْتُلُكَ ٱلْفِئَةُ ٱلْبَاغِيَةُ.‘“
व तक़्तुलुकल-फ़िअ़तुल-बाग़िया
और तुझे सरकश जमाअ़त क़त्ल करेगी।

فَٱعْتَرَضَهُ أَبُو ٱلْعَادِيَةِ ٱلْفَزَارِيُّ فَقَتَلَهُ
फ़-अ़तरदहू अबुल-आ़दियातिल-फ़ज़ारी फ़क़तलहू
फिर अबुल-आ़दिया फ़ज़ारी ने उसे रोका और क़त्ल कर दिया।

فَعَلَىٰ أَبِي ٱلْعَادِيَةِ لَعْنَةُ ٱللَّهِ
फ़-अ़ला अबिल-आ़दियति लअ़नतुल्लाह
तो अबुल-आ़दिया पर अल्लाह की लानत हो,

وَلَعْنَةُ مَلاَئِكَتِهِ وَرُسُلِهِ أَجْمَعِينَ
व लअ़नतु मलाइकतिहि व रुसुलिहि अज्मअ़ीन
और उसके तमाम फ़रिश्तों और रसूलों की लानत हो,

وَعَلَىٰ مَنْ سَلَّ سَيْفَهُ عَلَيْكَ
व अ़ला मन सल्ला सैफ़हु अ़लैक
और हर उस पर लानत हो जिसने तुझ पर तलवार खींची,

وَسَلَلْتَ سَيْفَكَ عَلَيْهِ
व सलल्ता सैफ़का अ़लैहि
और जिस पर तूने तलवार उठाई,

يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
या अमीरल-मोमिनीन
ऐ अमीरुल मोमिनीन!

مِنَ ٱلْمُشْرِكِينَ وَٱلْمُنَافِقِينَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ
मिनल-मुश्रिकीन वल-मुनाफ़िक़ीन इला यौमिद्दीन
मुश्रिकों और मुनाफ़िक़ों पर क़यामत के दिन तक।

وَصَلَوَاتُ ٱللَّهِ عَلَيْكَ وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व स़लवातुल्लाहि अ़लैक व रह़मतुल्लाहि व बरकातुहू
और तुझ पर अल्लाह की रहमतें, रहमत और बरकतें हों,

وَسَلامُهُ وَتَحِيَّاتُهُ
व सलामुहू व तह़िय्यातुहू
और उसका सलाम और दुआएँ हों,

وَعَلَىٰ ٱلأَئِمَّةِ مِنْ آلِكَ ٱلطَّاهِرِينَ
व अ़लल-अइम्मति मिन आलिकत्ताहिरीन
और तेरे पाक आल से होने वाले इमामों पर भी।

إِنَّهُ حَمِيدٌ مَجِيدٌ.
इन्नहू हमीदुन मजीद
यक़ीनन वह बहुत तारीफ़ किया हुआ और बुज़ुर्ग है।

وَالأَمْرُ ٱلأَعْجَبُ
वल-अम्रुल-अअ़जाब
और इससे भी ज़्यादा हैरतअंगेज़ बात यह है,

وَٱلْخَطْبُ ٱلأَفْظَعُ بَعْدَ جَحْدِكَ حَقَّكَ
वल-ख़त्बुल-अफ़ज़अ़ बअ़दा जह़्दिका ह़क़्क़क
और तेरा हक़ छीनने के बाद सबसे बड़ा ज़ुल्म यह हुआ,

غَصْبُ ٱلصِّدِّيقَةِ ٱلطَّاهِرَةِ ٱلزَّهْرَاءِ سَيِّدَةِ ٱلنِّسَاءِ فَدَكاً
ग़स्बुस्सिद्दीक़तित्ताहिरतिज़्ज़हरा सैय्यिदतिन्निसा फ़दकन
कि सिद्दीक़ा, पाक, ज़हरा, औरतों की सरदार से फ़दक छीन लिया गया।

وَرَدُّ شَهَادَتِكَ وَشَهَادَةِ ٱلسَّيِّدَيْنِ سُلالَتِكَ
व रद्दु शहादतिका व शहादतिस्सैय्यिदैन सुलालतिका
और तेरी गवाही तथा तेरी नस्ल से होने वाले दोनों सरदारों की गवाही ठुकरा दी गई,

وَعِتْرَةِ ٱلْمُصْطَفَىٰ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْكُمْ
व इ़त्रतिल-मुस्तफ़ा स़ल्लल्लाहु अ़लैकुम
जो मुस्तफ़ा ﷺ की इ़त्रत हैं — अल्लाह की सलामती तुम सब पर हो।

وَقَدْ أَعْلَىٰ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ عَلَىٰ ٱلأُمَّةِ دَرَجَتَكُمْ
व क़द अ़अ़ला अल्लाहु तआ़ला अ़लल-उम्मति दरजतकुम
हालाँकि अल्लाह तआ़ला ने उम्मत पर तुम्हारा दर्जा बहुत ऊँचा रखा था।

وَرَفَعَ مَنْزِلَتَكُمْ
व रफ़अ़ा मन्ज़िलतकुम
और तुम्हारे दर्जों को बुलंद किया,

وَأَبَانَ فَضْلَكُمْ وَشَرَفَكُمْ عَلَىٰ ٱلْعَالَمِينَ
व अबाना फ़ज़्लकुम व शरफ़कुम अ़लल-आ़लमीन
और तमाम जहानों पर तुम्हारी फ़ज़ीलत और शरफ़ को ज़ाहिर किया।

فَأَذْهَبَ عَنْكُمُ ٱلرِّجْسَ وَطَهَّرَكُمْ تَطْهِيراً
फ़अज़्हबा अ़नकुमुर-रिज्स व त़ह्हरकुम तत्हीरा
तो तुमसे हर नापाकी दूर की और तुम्हें पूरी तरह पाक किया।

قَالَ ٱللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ:
क़ालल्लाहु अ़ज़्ज़ व जल्ल
अल्लाह अज़्ज़ो-जल फ़रमाता है:

”إِنَّ ٱلإِنْسَانَ خُلِقَ هَلُوعاً.
इन्नल-इंसाना ख़ुलिक़ा हलूअ़ा
बेशक इंसान जल्दी घबराने वाला पैदा किया गया है।

إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعاً.
इज़ा म-स्सहूश-शर्रु जज़ूअ़ा
जब उसे तकलीफ़ पहुँचती है तो बहुत बेकरार हो जाता है,

وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعاً.
व इज़ा म-स्सहूल-ख़ैरु मनूअ़ा
और जब उसे भलाई मिलती है तो बहुत रोकने वाला बन जाता है,

إِلاَّ ٱلْمُصَلِّينَ.“
इल्लल-मुसल्लीन
मगर वे लोग जो नमाज़ पढ़ते हैं।

فَٱسْتَثْنَىٰ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ نَبِيَّهُ ٱلْمُصْطَفَىٰ
फ़स्तस्ना अल्लाहु तआ़ला नबिय्यहुल-मुस्तफ़ा
तो अल्लाह तआ़ला ने अपने चुने हुए नबी को इससे अलग रखा,

وَأَنْتَ يَا سَيِّدَ ٱلأَوْصِيَاءِ مِنْ جَمِيعِ ٱلْخَلْقِ
व अन्त या सैय्यिदल-औस़ियाइ मिन जमीअ़िल-ख़ल्क़
और ऐ तमाम औसिया के सरदार! तुझे भी सारी मख़लूक़ से अलग रखा।

فَمَا أَعْمَهَ مَنْ ظَلَمَكَ عَنِ ٱلْحَقِّ
फ़मा अअ़महा मन ज़लमक अ़निल-ह़क़
तो कितना अंधा है वह जिसने तुझ पर ज़ुल्म किया और हक़ से भटक गया।

ثُمَّ أَفْرَضُوكَ سَهْمَ ذَوِي ٱلْقُرْبَىٰ مَكْراً
थुम्मा अफ़रज़ूक सह्मा ज़विल-क़ुर्बा मकरन
फिर चालाकी से उन्होंने क़रीबी रिश्तेदारों का हिस्सा तेरे लिए ठहराया,

وَأَحَادُوهُ عَنْ أَهْلِهِ جَوْراً
व अह़ादूहू अ़न अह़लिही जौरन
और ज़ुल्म से उसके असली हक़दारों से उसे हटा दिया।

فَلَمَّا آلَ ٱلأَمْرُ إِلَيْكَ أَجْرَيْتَهُمْ عَلَىٰ مَا أَجْرَيَا
फ़लम्मा आलल-अम्रु इलैक अज्रैतहुम अ़ला मा अज्रया
फिर जब हुकूमत तुझे मिली तो तूने वही जारी रखा जो उन्होंने जारी किया था,

رَغْبَةً عَنْهُمَا بِمَا عِنْدَ ٱللَّهِ لَكَ
रग़्बतन अ़नहुमा बिमा इ़न्दल्लाहि लक
क्योंकि तू अल्लाह के पास रखे हुए अज्र का चाहने वाला था।

فَأَشْبَهَتْ مِحْنَتُكَ بِهِمَا مِحَنَ ٱلأَنْبِيَاءِ عَلَيْهِمُ ٱلسَّلاَمُ
फ़अश्बहत मिह्नतक बिहिमा मिहनल-अंबियाइ अ़लैहिमुस्सलाम
तो तेरी आज़माइशें अंबिया की आज़माइशों जैसी हो गईं,

عِنْدَ ٱلْوَحْدَةِ وَعَدَمِ ٱلأَنْصَارِ
इ़न्दल-वह़दति व अ़ददिल-अंसार
जब तन्हाई और मददगारों की कमी थी।

وَأَشْبَهْتَ فِي ٱلْبَيَاتِ عَلَى الْفِرَاشِ ٱلذَّبِيحَ عَلَيْهِ ٱلسَّلاَمُ
व अश्बहत फिल-बयाति अ़लल-फ़िराशिज़-ज़बीह अ़लैहिस्सलाम
और नबी के बिस्तर पर सोने में तू उस क़ुर्बानी वाले नबी जैसा हो गया।

إِذْ أَجَبْتَ كَمَا أَجَابَ
इज़ अजब्ता कमा अजबा
जब तूने भी उसी तरह जवाब दिया,

وَأَطَعْتَ كَمَا أَطَاعَ إِسْمَاعِيلُ صَابِراً مُحْتَسِباً
व अतअ़ता कमा अतअ़ा इस्माईलु साबिरन मुहतसिबा
जैसे इस्माईल ने सब्र और अल्लाह पर भरोसे के साथ इताअ़त की।

إِذْ قَالَ لَهُ: يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي ٱلْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ
इज़ क़ाला लहू या बुन्नय्य इन्नी अरा फिल-मनामि अन्नी अज़बहुक
जब उसके वालिद ने कहा: ऐ मेरे बेटे! मैंने ख़्वाब में देखा है कि मैं तुझे ज़बह करता हूँ,

فَٱنْظُرْ مَاذَا تَرَىٰ.
फ़नज़ुर माज़ा तरा
अब तू सोच कि तेरा क्या ख़याल है।

قَالَ: يَا أَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ
क़ाला या अबति इफ़अ़ल मा तूमरु
उसने कहा: ऐ अब्बा! जो हुक्म दिया गया है वह कर डालिए,

سَتَجِدُنِي إِنْ شَاءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّابِرِينَ.
सतजिदुनी इन्शा अल्लाहु मिनस्साबिरीन
अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वालों में पाएँगे।

وَكَذٰلِكَ أَنْتَ لَمَّا أَبَاتَكَ ٱلنَّبِيُّ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
व कज़ालिक अन्त लम्मा अबातकल-नबिय्यु स़ल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिहि
इसी तरह जब नबी ﷺ ने तुझे चुना,

وَأَمَرَكَ أَنْ تَضْجَعَ فِي مَرْقَدِهِ
व अमरक अन तद्ज़अ़ा फी मरक़दिहि
और हुक्म दिया कि तू उनके बिस्तर पर सोए,

وَاقِياً لَهُ بِنَفْسِكَ
वाक़ियन लहू बिनफ़्सिक
ताकि तू अपनी जान से उनकी हिफ़ाज़त करे,

أَسْرَعْتَ إِلَىٰ إِجَابَتِهِ مُطِيعاً
असरअ़ता इला इजाबतिहि मुतीअ़न
तो तू फ़ौरन इताअ़त के साथ तैयार हो गया,

وَلِنَفْسِكَ عَلَى الْقَتْلِ مُوَطِّناً
व लिनफ़्सिक अ़लल-क़त्लि मुवत्तिनन
और अपनी जान को क़त्ल के लिए पेश कर दिया।

فَشَكَرَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ طَاعَتَكَ
फ़शकरल्लाहु तआ़ला ताअ़तक
तो अल्लाह तआ़ला ने तेरी इताअ़त को क़ुबूल किया,

وَأَبَانَ عَنْ جَمِيلِ فِعْلِكَ بِقَوْلِهِ جَلَّ ذِكْرُهُ:
व अबाना अ़न जमीली फ़ेअ़लिक बि-क़ौलिहि जल्ला ज़िक्रुहू
और तेरे खूबसूरत अमल को इस आयत से बयान किया:

”وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَنْ يَشْرِي نَفْسَهُ ٱبْتِغَاءَ مَرْضَاةِ ٱللَّهِ.“
व मिनन्नासि मन यश्री नफ़्सहू इब्तिग़ा-ए मर्ज़ातिल्लाह
और लोगों में वह भी है जो अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी जान बेच देता है।

ثُمَّ مِحْنَتُكَ يَوْمَ صِفِّينَ
थुम्मा मिह्नतक यौमा सिफ़्फ़ीन
फिर सिफ़्फ़ीन के दिन तेरी बड़ी आज़माइश आई,

وَقَدْ رُفِعَتِ ٱلْمَصَاحِفُ حِيلَةً وَمَكْراً
व क़द रुफ़िअ़तिल-मसाहिफ़ु हीलतन व मक्रन
जब चाल और धोखे से क़ुरआन उठा दिए गए,

فَأَعْرَضَ ٱلشَّكُّ
फ़अअ़रज़श-शक्क
तो शक पैदा हुआ,

وَعُزِفَ ٱلْحَقُّ
व उ़ज़िफ़ल-ह़क़
हक़ से मुँह मोड़ लिया गया,

وَٱتُّبِعَ ٱلظَّنُّ
वत्तुबिअ़ज़-ज़न्न
और गुमान की पैरवी की गई।

وَكَذٰلِكَ أَنْتَ لَمَّا رُفِعَتِ ٱلْمَصَاحِفُ قُلْتَ:
व कज़ालिक अन्त लम्मा रुफ़िअ़तिल-मसाहिफ़ु कुल्ता
और इसी तरह जब क़ुरआन उठाए गए तो तूने फ़रमाया:

يَا قَوْمِ إِنَّمَا فُتِنْتُمْ بِهَا وَخُدِعْتُمْ
या क़ौमी इन्नमा फुतिन्तुम बिहा व ख़ुदिअ़तुम
ऐ मेरी क़ौम! तुम इसी के ज़रिये आज़माए गए और तुम्हें धोखे में डाला गया।

فَعَصَوْكَ وَخَالَفُوٱ عَلَيْكَ
फ़अ़सौका व ख़ालफ़ू अ़लैक
फिर भी उन्होंने तेरी नाफ़रमानी की और तेरे ख़िलाफ़ चले।

وَٱسْتَدْعَوْا نَصْبَ ٱلْحَكَمَيْنِ
वस्तद्अ़व नस्बल-ह़कमैन
और उन्होंने दो हाकिम मुक़र्रर करने की माँग की।

فَأَبَيْتَ عَلَيْهِمْ وَتَبَرَّأْتَ إِلَىٰ ٱللَّهِ مِنْ فِعْلِهِمْ وَفَوَّضْتَهُ إِلَيْهِمْ
फ़अबैता अ़लैहिम व तबर्रअ़ता इलल्लाहि मिन फ़ेअ़लिहिम व फ़व्वज़्तहू इलैहिम
तो तूने इनकार किया, अल्लाह के सामने उनके इस अमल से बेज़ारी जताई और मामला उन्हीं पर छोड़ दिया।

فَلَمَّا أَسْفَرَ ٱلْحَقُّ
फ़लम्मा अस्फ़रल-ह़क़
फिर जब हक़ खुलकर सामने आ गया,

وَسَفِهَ ٱلْمُنْكَرُ
व सफ़िहल-मुनकर
और बुराई की हक़ीक़त बेवक़ूफ़ी साबित हो गई,

وَٱعْتَرَفُوٱ بِٱلزَّلَلِ وَٱلْجَوْرِ عَنِ ٱلْقَصْدِ
वअ़तरफ़ू बिज़्ज़ललि वल-जौरि अ़निल-क़स्द
और उन्होंने अपनी ग़लती और रास्ते से हट जाने को मान लिया,

ٱخْتَلَفُوا مِنْ بَعْدِهِ
इख़्तलफ़ू मिन बअ़दिहि
तो उसके बाद भी आपस में बिखर गए,

وَأَلْزَمُوكَ عَلَىٰ سَفَهِ ٱلتَّحْكِيمِ ٱلَّذِي أَبَيْتَهُ وَأَحَبُّوهُ
व अल्ज़मूका अ़ला सफ़हित्व-तहकीमिल्लज़ी अबैतहू व अह़ब्बूहू
और जिस बेअक़्ली वाले फैसले को तूने ठुकराया था, उसी पर उन्होंने तुझ पर ज़ोर डाला और उसे पसंद किया।

وَحَظَرْتَهُ وَأَبَاحُوٱ ذَنْبَهُمُ ٱلَّذِي ٱقْتَرَفُوهُ
व ह़ज़ऱ्तहू व अबाहू ज़न्बहुमुल्लज़ी इक़तरफ़ूहू
तूने उसे मना किया था, मगर उन्होंने अपने किए हुए गुनाह को जायज़ ठहरा लिया।

وَأَنْتَ عَلَىٰ نَهْجِ بَصِيرَةٍ وَهُدىٰ
व अन्त अ़ला नह्जि बसीरतिन व हुदा
हालाँकि तू समझ और हिदायत के रास्ते पर क़ायम था,

وَهُمْ عَلَىٰ سُنَنِ ضَلالَةٍ وَعَمىٰ
व हुम अ़ला सुननि ज़लालतिन व अ़मा
और वे गुमराही और अंधेपन के रास्तों पर चल रहे थे।

فَمَا زَالُوٱ عَلَىٰ ٱلنِّفَاقِ مُصِرِّينَ
फ़मा ज़ालू अ़लन-निफ़ाक़ि मुसिर्रीन
फिर भी वे निफ़ाक़ पर अड़े रहे,

وَفِي ٱلْغَيِّ مُتَرَدِّدِينَ
व फ़िल-ग़य्यि मुतरद्दिदीन
और गुमराही में भटकते रहे,

حَتَّىٰ أَذَاقَهُمُ ٱللَّهُ وَبَالَ أَمْرِهِمْ
ह़त्ता अज़ाक़हुमुल्लाहु वबाल अम्रिहिम
यहाँ तक कि अल्लाह ने उन्हें उनके अमल का बुरा नतीजा चखा दिया।

فَأَمَاتَ بِسَيْفِكَ مَنْ عَانَدَكَ فَشَقِيَ وَهَوَىٰ
फ़अमाता बिसैफ़िका मन अ़आनदक फ़शक़िया व हवा
तो तेरी तलवार से उन्हें हलाक किया जो तेरे मुक़ाबले पर आए और बदनसीब हो गए।

وَأَحْيَا بِحُجَّتِكَ مَنْ سَعَدَ فَهُدِيَ
व अह़या बिहुज्जतिक मन सअ़दा फ़हुदिया
और तेरी हुज्जत के ज़रिये उन्हें ज़िंदगी दी जिन्हें सआदत मिली और वे हिदायत पाए।

صَلَوَاتُ ٱللَّهِ عَلَيْكَ غَادِيَةً وَرَائِحَةً
सलवातुल्लाहि अ़लैक़ ग़ादियतं व राइहतं
अल्लाह की रहमतें तुझ पर सुबह और शाम उतरती रहें,

وَعَاكِفَةً وَذَاهِبَةً
व अ़ाकिफ़तन व ज़ाहिबतन
ठहरती हुई भी और चलती हुई भी।

فَمَا يُحِيطُ ٱلْمَادِحُ وَصْفَكَ
फ़मा युहीतुल-मादिहु वस्फ़क
कोई तारीफ़ करने वाला तेरे पूरे औसाफ़ बयान नहीं कर सकता,

وَلاَ يُحْبِطُ ٱلطَّاعِنُ فَضْلَكَ
व ला युह़्बितुत-ताअ़िनु फ़ज़्लक
और कोई ऐब लगाने वाला तेरी फ़ज़ीलत घटा नहीं सकता।

أَنْتَ أَحْسَنُ ٱلْخَلْقِ عِبَادَةً
अन्त अह़सनुल-ख़ल्क़ि इ़बादतन
तू तमाम मख़लूक़ में सबसे बेहतरीन इ़बादत करने वाला है,

وَأَخْلَصُهُمْ زَهَادَةً
व अख़लस़ुहुम ज़हादतन
और सबसे ज़्यादा ख़ुलूस वाला ज़ाहिद है,

وَأَذَبُّهُمْ عَنِ ٱلدِّينِ
व अज़ब्बुहुम अ़निद्दीन
और दीन की हिफ़ाज़त में सबसे आगे है।

أَقَمْتَ حُدُودَ ٱللَّهِ بِجُهْدِكَ
अक़म्ता हुदूदल्लाहि बिजुह्दिक
तूने पूरी मेहनत से अल्लाह की हदें क़ायम कीं,

وَفَلَلْتَ عَسَاكِرَ ٱلْمَارِقِينَ بِسَيْفِكَ
व फ़लल्ता अ़साकिरल-मारिक़ीन बिसैफ़िक
और अपनी तलवार से गुमराह फ़ौजों को तोड़ डाला।

تُخْمِدُ لَهَبَ ٱلْحُرُوبِ بِبَنَانِكَ
तुख़्मिदु लहबल-हुरूबि बिनानिक
तू अपनी उँगलियों से जंग की आग बुझा देता है,

وَتَهْتِكُ سُتُورَ ٱلشُّبَهِ بِبَيَانِكَ
व तहतिकु सुतूरश-शुबहि बिबयानिक
और अपने बयान से शुब्हात के पर्दे चाक कर देता है,

وَتَكْشِفُ لَبْسَ ٱلْبَاطِلِ عَنْ صَرِيحِ ٱلْحَقِّ
व तक्शिफ़ु लबसल-बात़िलि अ़न सरीह़िल-ह़क़
और झूठ की मिलावट को साफ़ हक़ से अलग कर देता है।

لاَ تَأْخُذُكَ فِي ٱللَّهِ لَوْمَةُ لاَئِمٍ
ला ताख़ुज़ुका फ़िल्लाहि लौमतु लाअ़इम
अल्लाह के मामले में किसी की मलामत तुझे रोक नहीं सकती।

وَفِي مَدْحِ ٱللَّهِ تَعَالَىٰ لَكَ غِنَىٰ
व फ़ी मद्हिल्लाहि तआ़ला लक ग़िना
अल्लाह की तारीफ़ ही तेरे लिए काफ़ी है,

عَنْ مَدْحِ ٱلْمَادِحِينَ وَتَقْرِيظِ ٱلْوَاصِفِينَ
अ़न मद्हिल-मादिहीन व तक्ऱीज़िल-वासिफ़ीन
दूसरों की तारीफ़ और बयान करने वालों की गवाही से बेनियाज़।

قَالَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ:
क़ालल्लाहु तआ़ला
अल्लाह तआ़ला फ़रमाता है:

”مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ رِجَالٌ صَدَقُوٱ مَا عَاهَدُوٱ ٱللَّهَ عَلَيْهِ
मिनल-मूमिनीन रिजालुन सदक़ू मा आ़हदुल्लाह अ़लैह
मोमिनों में ऐसे मर्द हैं जिन्होंने अल्लाह से किए हुए अहद को सच्चाई से निभाया।

فَمِنْهُمْ مَنْ قَضَىٰ نَحْبَهُ وَمِنْهُمْ مَنْ يَنْتَظِرُ وَمَا بَدَّلُوٱ تَبْدِيلاً.“
फ़मिनहुम मन क़ज़ा नह़बहू व मिनहुम मन यंतज़िरु व मा बद्दलू तबदीला
तो उनमें से कुछ अपना वादा पूरा कर चुके और कुछ इंतज़ार में हैं, और उन्होंने ज़रा भी तब्दीली नहीं की।

وَلَمَّا رَأَيْتَ أَنْ قَتَلْتَ ٱلنَّاكِثِينَ وَٱلْقَاسِطِينَ وَٱلْمَارِقِينَ
व लम्मा रअयता अन क़तल्तन-नाकिसीन वल-क़ासितीन वल-मारिक़ीन
और जब तूने देखा कि तूने अहद तोड़ने वालों, ज़ालिमों और दीन से निकल जाने वालों को क़त्ल कर दिया,

وَصَدَقَكَ رَسُولُ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَعْدَهُ
व सदक़क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिहि वअ़दहू
और रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ का किया हुआ वादा सच्चा साबित हो गया,

فَأَوْفَيْتَ بِعَهْدِهِ قُلْتَ:
फ़औफ़ैता बिअ़ह्दिहि क़ुल्ता
तो तूने उनका अहद पूरा किया और कहा:

أَمَا آنَ أَنْ تُخْضَبَ هٰذِهِ مِنْ هٰذِهِ؟
अमा आना अन तुख़ज़बा हाज़िहि मिन हाज़िहि
क्या अब वह वक़्त नहीं आया कि यह दाढ़ी इस सिर के ख़ून से रंगी जाए?

أَمْ مَتَىٰ يُبْعَثُ أَشْقَاهَا؟
अम मता युबअ़स़ु अश्क़ाहा
या वह बदनसीब कब भेजा जाएगा?

وَاثِقاً بِأَنَّكَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّكَ
वासिक़न बिअ़न्नक अ़ला बय्यिनतिन मिन रब्बिक
तू पूरे यक़ीन के साथ अपने रब की तरफ़ से वाज़ेह दलील पर था,

وَبَصِيرَةٍ مِنْ أَمْرِكَ
व बसीरतिन मिन अमरिक
और अपने अम्र में पूरी समझ रखता था,

قَادِمٌ عَلَىٰ ٱللَّهِ
क़ादिमुन अ़लल्लाह
अल्लाह की तरफ़ बढ़ रहा था,

مُسْتَبْشِرٌ بِبَيْعِكَ ٱلَّذِي بَايَعْتَهُ بِهِ
मुस्तबशिरुन बिबैअ़िकल्लज़ी बायअ़तहू बिहि
और उस सौदे पर ख़ुश था जो तूने अल्लाह से किया था,

وَذٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
व ज़ालिका हुवल-फ़ौज़ुल-अ़ज़ीम
और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

اَللَّهُمَّ ٱلْعَنْ قَتَلَةَ أَنْبِيَائِكَ وَأَوْصِيَاءِ أَنْبِيَائِكَ
अल्लाहुम्मल-अ़न क़तलत अनबियाइका व औसियाइ अनबियाइका
ऐ अल्लाह! अपने नबियों और उनके वसियों के क़ातिलों पर लानत भेज।

بِجَمِيعِ لَعَنَاتِكَ
बिजमीअ़ि लअ़नातिक
अपनी तमाम लानतों के साथ।

وَأَصْلِهِمْ حَرَّ نَارِكَ
व अस्लिहिम ह़र्र नारिक
और उन्हें अपनी आग की सख़्त गर्मी चख़ा।

وَٱلْعَنْ مَنْ غَصَبَ وَلِيَّكَ حَقَّهُ
वल-अ़न मन ग़सबा वलिय्यक ह़क़्क़हू
और उस पर लानत कर जिसने तेरे वली का हक़ छीना,

وَأَنْكَرَ عَهْدَهُ
व अंकर अ़ह्दहू
और उसके अहद का इंकार किया,

وَجَحَدَهُ بَعْدَ ٱلْيَقِينِ وَٱلإِقْرَارِ بِٱلْوِلاَيَةِ لَهُ
व जहदहू बअ़दल-यक़ीनि वल-इक़रारि बिल-विलायति लहू
और यक़ीन व इकरार के बाद भी उसकी विलायत का इंकार किया,

يَوْمَ أَكْمَلْتَ لَهُ ٱلدِّينَ
यौमा अकमल्ता लहुद्दीन
उस दिन जब तूने उसके ज़रिये दीन मुकम्मल किया।

اَللَّهُمَّ ٱلْعَنْ قَتَلَةَ أَمِيرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अल्लाहुम्मल-अ़न क़तलत अमीरिल-मूमिनीन
ऐ अल्लाह! अमीरुल-मोमिनीन के क़ातिलों पर लानत कर,

وَمَنْ ظَلَمَهُ وَأَشْيَاعَهُمْ وَأَنْصَارَهُمْ
व मन ज़लमहू व अशियाअ़हुम व अंसारहुम
और उस पर भी जिसने उन पर ज़ुल्म किया और उनके पैरोकारों व मददगारों पर।

اَللَّهُمَّ ٱلْعَنْ ظَالِمِي ٱلْحُسَيْنِ وَقَاتِلِيهِ
अल्लाहुम्मल-अ़न ज़ालिमी ह़ुसैन व क़ातिलिहि
ऐ अल्लाह! हुसैन पर ज़ुल्म करने वालों और उन्हें क़त्ल करने वालों पर लानत कर,

وَٱلْمُتَابِعِينَ عَدُوَّهُ وَنَاصِرِيهِ
वल-मुताबिअ़ीन अ़दुव्वहू व नासिरिहि
और उनके दुश्मनों की पैरवी करने वालों और मददगारों पर,

وَٱلرَّاضِينَ بِقَتْلِهِ وَخَاذِلِيهِ لَعْناً وَبِيلاً
वल-ऱाज़ीन बक़त्लिहि व ख़ाज़िलिहि लअ़नन वबीला
और उनके क़त्ल पर राज़ी होने वालों और उन्हें छोड़ देने वालों पर सख़्त लानत।

اَللَّهُمَّ ٱلْعَنْ أَوَّلَ ظَالِمٍ ظَلَمَ آلَ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मल-अ़न अव्वल ज़ालिमिन ज़लमा आल-ए-मुहम्मद
ऐ अल्लाह! उस पहले ज़ालिम पर लानत कर जिसने आल-ए-मुहम्मद पर ज़ुल्म की बुनियाद रखी,

وَمَانِعِيهِمْ حُقُوقَهُمْ
व मानिअ़ीहिम ह़ुक़ूक़हुम
और उनके हक़ों से रोकने वालों पर।

اَللَّهُمَّ خُصَّ أَوَّلَ ظَالِمٍ وَغَاصِبٍ لآِلِ مُحَمَّدٍ بِٱللَّعْنِ
अल्लाहुम्मा ख़ुस्स अव्वल ज़ालिम व ग़ासिब लि-आल-ए-मुहम्मद बिल-लअ़न
ऐ अल्लाह! आल-ए-मुहम्मद पर ज़ुल्म व ग़स्ब करने वाले पहले शख़्स को ख़ास लानत में घेर।

وَكُلَّ مُسْتَنٍّ بِمَا سَنَّ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَامَةِ
व कुल्ल मुस्तन्निन बिमा सन्ना इला यौमिल-क़ियामा
और क़ियामत तक उसी राह पर चलने वाले हर एक पर।

اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ خَاتَمِ ٱلنَّبِيِّينَ
अल्लाहुम्मा सल्लि अ़ला मुहम्मद ख़ातमिन-नबिय्यीन
ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर दरूद भेज, जो नबियों के ख़ातिम हैं,

وَعَلَىٰ عَلِيٍّ سَيِّدِ ٱلْوَصِيِّينَ وَآلِهِ ٱلطَّاهِرِينَ
व अ़ला अ़लिय्यिन सय्यिदिल-वसिय्यीन व आलिहित-ताहिरीन
और अ़ली पर, जो वसियों के सरदार हैं, और उनकी पाक आल पर,

وَٱجْعَلْنَا بِهِمْ مُتَمَسِّكِينَ
वज्अ़लना बिहिम मुतमस्सिकीना
और हमें उनसे मज़बूती से जुड़ा हुआ रख,

وَبِوِلاَيَتِهِمْ مِنَ ٱلْفَائِزِينَ ٱلآمِنِينَ
व बिविलायतिहिम मिनल-फ़ाइज़ीनल-आमिनीन
और उनकी विलायत की वजह से हमें कामयाब और अमन पाने वालों में शामिल कर,

ٱلَّذِينَ لاَ خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلاَ هُمْ يَحْزَنُونَ
अल्लज़ीना ला ख़ौफ़ुन अ़लैहिम व ला हुम यह़ज़नून
जिन पर न कोई ख़ौफ़ होगा और न ही वे ग़मगीन होंगे।





ज़ियारत का यह तरीक़ा किताब इक़बालुल-आमाल में सय्यिद इब्ने ताउस ने बयान किया है, जिसे उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ (अलैहिस्सलाम) से रिवायत किया है।


اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ وَلِيِّكَ
अल्लाहुम्मा सल्लि अ़ला वलिय्यिक
ऐ अल्लाह! अपने वली पर दरूद भेज,

وَأَخِي نَبِيِّكَ
व अख़ी नबिय्यिक
जो तेरे नबी के भाई हैं,

وَوَزِيرِهِ وَحَبِيبِهِ وَخَلِيلِهِ
व वज़ीरिहि व हबीबिहि व ख़लीलिहि
उनके वज़ीर, उनके प्यारे और ख़ास दोस्त हैं,

وَمَوْضِعِ سِرِّهِ
व मौज़िअ़ि सिर्रिहि
उनके राज़ों के अमीन हैं,

وَخِيَرَتِهِ مِنْ أُسْرَتِهِ
व ख़ियरतिहि मिन उसरतिहि
उनके ख़ानदान में से चुने हुए हैं,

وَوَصِيِّهِ وَصَفْوَتِهِ وَخَالِصَتِهِ
व वसिय्यिहि व सफ़वतिहि व ख़ालिसतिहि
उनके वसी, उनके चुने हुए और उनके ख़ास हैं,

وَأَمِينِهِ وَوَلِيِّهِ
व अमीनिहि व वलिय्यिहि
उनके अमानतदार और उनके वली हैं,

وَأَشْرَفِ عِتْرَتِهِ ٱلَّذِينَ آمَنُوٱ بِهِ
व अशरफ़ि इत्रतिहिल्लज़ीना आमनू बिहि
उनकी इत्रत में सबसे शरफ़ वाले, जिन्होंने उन पर ईमान लाया,

وَأَبِي ذُرِّيَّتِهِ
व अबी ज़ुर्रिय्यतिहि
और उनकी नस्ल के वालिद हैं,

وَبَابِ حِكْمَتِهِ
व बाबि हिकमतिहि
उनकी हिकमत का दरवाज़ा हैं,

وَٱلنَّاطِقِ بِحُجَّتِهِ
वन्नातिक़ि बिहुज्जतिहि
उनकी दलील के साथ बोलने वाले हैं,

وَٱلدَّاعِي إِلَىٰ شَرِيعَتِهِ
वद्दाअ़ी इला शरीअ़तिहि
उनकी शरीअ़त की तरफ़ बुलाने वाले हैं,

وَٱلْمَاضِي عَلَىٰ سُنَّتِهِ
वलमाज़ी अ़ला सुन्नतिहि
उनकी सुन्नत पर चलने वाले हैं,

وَخَلِيفَتِهِ عَلَىٰ أُمَّتِهِ
व ख़लीफ़तिहि अ़ला उम्मतिहि
उनकी उम्मत पर उनके नायब हैं,

سَيِّدِ ٱلْمُسْلِمِينَ
सय्यिदिल मुस्लिमीन
मुसलमानों के सरदार हैं,

وَأَمِيرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
व अमीरिल मोमिनीन
और मोमिनों के अमीर हैं,

وَقَائِدِ ٱلْغُرِّ ٱلْمُحَجَّلِينَ
व क़ाइदिल ग़ुर्रिल मुहज्जलीन
और रौशन चेहरों वाले लोगों के पेशवा हैं,

أَفْضَلَ مَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ أَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ
अफ़ज़ल मा सल्लैता अ़ला अहदिं मिन ख़ल्क़िक
ऐ अल्लाह! उन पर वह सबसे बेहतरीन दरूद भेज जो तूने अपनी मख़लूक़ में किसी पर भेजा हो,

وَأَصْفِيَائِكَ وَأَوْصِيَاءِ أَنْبِيَائِكَ
व अस्फ़ियाइका व औसियाइ अंबियाइका
और अपने चुने हुए बंदों और नबियों के वसियों पर भी।

اَللَّهُمَّ إِنِّي أَشْهَدُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अशहदु
ऐ अल्लाह! मैं गवाही देता हूँ

أَنَّهُ قَدْ بَلَّغَ عَنْ نَبِيِّكَ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ مَا حُمِّلَ
अन्नहू क़द बल्लग़ अ़न नबिय्यिक सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिहि मा हुम्मिला
कि उन्होंने तेरे नबी की तरफ़ से वह सब पहुँचा दिया जो उन्हें सौंपा गया था,

وَرَعَىٰ مَا ٱسْتُحْفِظَ
व रअ़ा मा इस्तुह्फ़िज़
और जिसकी हिफ़ाज़त सौंपी गई थी, उसकी पूरी निगहबानी की,

وَحَفِظَ مَا ٱسْتُودِعَ
व हफ़िज़ा मा इस्तूदिअ़
और जो अमानत रखी गई थी, उसकी हिफ़ाज़त की,

وَحَلَّلَ حَلالَكَ
व हल्लला हलालक
तेरे हलाल को हलाल ठहराया,

وَحَرَّمَ حَرَامَكَ
व हर्रमा हरामक
और तेरे हराम को हराम ठहराया,

وَأَقَامَ أَحْكَامَكَ
व अक़ामा अहकामक
तेरे अहकाम को क़ायम किया,

وَدَعَا إِلَىٰ سَبِيلِكَ
व दअ़ा इला सबीलिक
और तेरे रास्ते की तरफ़ दावत दी,

وَوَالَىٰ أَوْلِيَاءَكَ
व वाला औलियाअ़क
तेरे औलिया से दोस्ती रखी,

وَعَادَىٰ أَعْدَاءَكَ
व अ़ादा अ़अ़दाअ़क
और तेरे दुश्मनों से दुश्मनी की,

وَجَاهَدَ ٱلنَّاكِثِينَ عَنْ سَبِيلِكَ
व जाहदन नाकिसीन अ़न सबीलिक
और तेरे रास्ते से फिर जाने वालों से जिहाद किया,

وَٱلْقَاسِطِينَ وَٱلْمَارِقِينَ عَنْ أَمْرِكَ
वल क़ासितीन वल मारिक़ीन अ़न अमरिक
और ज़ालिमों व दीन से निकल जाने वालों से भी,

صَابِراً مُحْتَسِباً
साबिरन मुहतसिबा
सब्र करते हुए और सवाब की उम्मीद रखते हुए,

مُقْبِلاً غَيْرَ مُدْبِرٍ
मुक़बिलन ग़ैर मुदबिर
आगे बढ़ते रहे, पीछे नहीं हटे,

لاَ تَأْخُذُهُ فِي ٱللَّهِ لَوْمَةُ لاَئِمٍ
ला तअ़ख़ुज़ुहू फ़िल्लाह लौमतु लाएम
अल्लाह के मामले में किसी की मलामत ने उन्हें नहीं रोका,

حَتَّىٰ بَلَغَ فِي ذٰلِكَ ٱلرِّضَا
हत्ता बलग़ फ़ी ज़ालिकर्रिज़ा
यहाँ तक कि उन्होंने तेरी रज़ा हासिल कर ली।

وَسَلَّمَ إِلَيْكَ ٱلْقَضَاءَ
व सल्लमा इलैका अल-क़ज़ा
और उसने तमाम फ़ैसले तेरे सुपुर्द कर दिए,

وَعَبَدَكَ مُخْلِصاً
व अबदक मुख़लिसन
और ख़ालिस नीयत के साथ तेरी इबादत की,

وَنَصَحَ لَكَ مُجْتَهِداً
व नसह लका मुज्तहिदन
और पूरी मेहनत से तेरी ख़ातिर ख़ैरख़्वाही की,

حَتَّىٰ أَتَاهُ ٱلْيَقِينُ
हत्ता अताहुल यक़ीन
यहाँ तक कि उसे यक़ीनी वक़्त (मौत) आ पहुँचा।

فَقَبَضْتَهُ إِلَيْكَ شَهِيداً سَعِيداً
फ़क़बज़्तहू इलैका शहीदन सईदन
तो तूने उसे अपने पास शहीद और सआदतमंद हालत में उठा लिया,

وَلِيّاً تَقِيّاً رَضِيّاً
वलिय्यन तक़िय्यन रज़िय्यन
वह तेरा वली, परहेज़गार और तेरी रज़ा वाला था,

زَكِيّاً هَادِياً مَهْدِيّاً
ज़किय्यन हादियन महदिय्यन
पाक, राह दिखाने वाला और खुद हिदायत पाया हुआ था।

اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَيْهِ
अल्लाहुम्मा सल्लि अ़ला मुहम्मद व अ़लैह
ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर और उन पर दरूद भेज,

أَفْضَلَ مَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ أَحَدٍ مِنْ أَنْبِيَائِكَ وَأَصْفِيَائِكَ
अफ़ज़ल मा सल्लैता अ़ला अहदिं मिन अंबियाइका व अस्फ़ियाइका
वैसा ही बेहतरीन दरूद जैसा तूने अपने नबियों और चुने हुए बंदों पर भेजा है,

يَا رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ
या रब्बल आलमीन
ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार।