ज़ियारत का ज़िक्र शैख़ अल-मुफीद, सय्यिद इब्न ताऊस, और अश-शहीद ने इस शकल में किया है:
जब आप यौम-ए-बेसत या उससे पहले की रात इमाम अली अमीरुल मोमिनीन (अलैहिस्सलाम) के रौज़ा-ए-मुक़द्दस की ज़ियारत का इरादा करें, तो आप गुम्बद-ए-मुक़द्दस के दरवाज़े पर रुकें, क़ब्र-ए-मुक़द्दस की तरफ़ रुख़ करके, और ये पढ़ें:
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ آدَمَ خَلِيفَةِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा आदमा खलीफति अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ आदम के वारिस—जो अल्लाह के ख़लीफ़ा थे।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ نُوحٍ صِفْوَةِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा नूहिन सिफ़वति अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ नूह के वारिस—जो अल्लाह के चुने हुए थे।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा इब्राहीमा खलीलि अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ इब्राहीम के वारिस—जो अल्लाह के ख़लील (दौस्त) थे।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ مُوسَىٰ كَلِيمِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा मूसा कलीमि अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ मूसा के वारिस—जो अल्लाह के कलीम थे।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ عِيسَىٰ رُوحِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा ईसा रूहि अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ ईसा के वारिस—जो अल्लाह की रूह थे।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ مُحَمَّدٍ سَيِّدِ رُسُلِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अलैका या वारिसा मुहम्मदिन सय्यिदि रुसुलि अल्लाहि
सलाम हो आप पर, ऐ मुहम्मद के वारिस—जो अल्लाह के रसूलों के सरदार हैं।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अलैका या अमीरा अल-मोमिनीन
सलाम हो आप पर, ऐ अमीरुल मोमिनीन।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا إِمَامَ ٱلْمُتَّقِينَ
अस्सलामु अलैका या इमामा अल-मुत्तक़ीन
सलाम हो आप पर, ऐ इमामुल मुत्तक़ीन।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ ٱلْوَصِيِّينَ
अस्सलामु अलैका या सय्यिदा अल-वसिय्यीन
सलाम हो आप पर, ऐ सय्यिदुल वसिय्यीन।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَصِيَّ رَسُولِ رَبِّ ٱلْعَالَمِينَ
अस्सलामु अलैका या वसिय्या रसूलि रब्बि अल-आलमीन
सलाम हो आप पर, ऐ रब्बुल आलमीन के रसूल के वसी।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ عِلْمِ ٱلأَوَّلِينَ وَٱلآخِرِينَ
अस्सलामु अलैका या वारिसा इल्मि अल-अव्वलीना वल-आख़िरीन
सलाम हो आप पर, ऐ अव्वलीन और आख़िरीन के इल्म के वारिस।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلنَّبَأُ ٱلْعَظِيمُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अन-नबअउल अज़ीम
सलाम हो आप पर, ऐ नबअ-ए-अज़ीम।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلصِّرَاطُ ٱلْمُسْتَقِيمُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अस-सीरातुल मुस्तक़ीम
सलाम हो आप पर, ऐ सीरात-ए-मुस्तक़ीम।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلْمُهَذُّبُ ٱلْكَرِيمُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अल-मुहज़्ज़बुल करीम
सलाम हो आप पर, ऐ मुहज़्ज़ब और करीम।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلْوَصِيُّ ٱلتَّقِيُّ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अल-वसिय्यु अत-तक़िय्यु
सलाम हो आप पर, ऐ वसी-ए-मुत्तक़ी।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلرَّضِيُّ ٱلزَّكِيُّ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अर-रज़िय्यु अज़-ज़किय्यु
सलाम हो आप पर, ऐ रज़ी और ज़की।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلْبَدْرُ ٱلْمُضِيءُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अल-बद्रुल मुदीउ
सलाम हो आप पर, ऐ चमकता हुआ पूरा चाँद।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلصِّدِّيقُ ٱلأَكْبَرُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अस्सिद्दीक़ुल अकबरु
सलाम हो आप पर, ऐ सबसे बड़े सिद्दीक़।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلْفَارُوقُ ٱلأَعْظَمُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अल-फारूक़ुल अ’ज़मु
सलाम हो आप पर, ऐ सबसे बड़े फ़ारूक़ (हक़ और बातिल में फ़र्क़ करने वाले)।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلسِّرَاجُ ٱلْمُنِيرُ
अस्सलामु अलैका अय्युहा अस्सिराजुल मुनीरु
सलाम हो आप पर, ऐ रोशन चराग़।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا إِمَامَ ٱلْهُدَىٰ
अस्सलामु अलैका या इमामल हुदा
सलाम हो आप पर, ऐ हिदायत के इमाम।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عَلَمَ ٱلتُّقَىٰ
अस्सलामु अलैका या अलमा अत-तुक़ा
सलाम हो आप पर, ऐ तक़वा का अलम।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حُجَّةَ ٱللَّهِ ٱلْكُبْرَىٰ
अस्सलामु अलैका या हुज्जतल्लाहिल कुबरा
सलाम हो आप पर, ऐ अल्लाह की सबसे बड़ी हुज्जत।
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا خَاصَّةَ ٱللَّهِ وَخَالِصَتَهُ
अस्सलामु अलैका या खास्सतल्लाहि वा खालिसतहु
सलाम हो आप पर, ऐ अल्लाह के ख़ास और ख़ालिस बंदे।
وَأَمِينَ ٱللَّهِ وَصَفْوَتَهُ
वा अमीनल्लाहि वा सफ़वतहु
और अल्लाह के अमीन और उसके चुने हुए।
وَبَابَ ٱللَّهِ وَحُجَّتَهُ
वा बाबल्लाहि वा हुज्जतहु
और अल्लाह का दरवाज़ा और उसकी हुज्जत।
وَمَعْدِنَ حُكْمِ ٱللَّهِ وَسِرَّهُ
वा मअ़दिना हुक्मिल्लाहि वा सिर्रहु
और अल्लाह के हुक्म का मअ़दन और उसका राज़।
وَعَيْبَةَ عِلْمِ ٱللَّهِ وَخَازِنَهُ
वा अय्बता इल्मिल्लाहि वा खाज़िनहु
और अल्लाह के इल्म का ख़ज़ाना और उसके निगहबान।
وَسَفِيرَ ٱللَّهِ فِي خَلْقِهِ
वा सफ़ीरल्लाहि फी खल्क़िही
और उसकी मख़लूक़ के दरमियान अल्लाह के सफ़ीर।
أَشْهَدُ أَنَّكَ أَقَمْتَ ٱلصَّلاَةَ
अश्हदु अन्नका अक़म्ता अस्सलात
मैं गवाही देता हूँ कि आपने नमाज़ क़ायम की,
वा आतैता अज़्ज़कात
और ज़कात अदा की,
وَأَمَرْتَ بِٱلْمَعْرُوفِ
वा अमरता बिल-मअ़रूफ़ि
और नेकी का हुक्म दिया,
وَنَهَيْتَ عَنِ ٱلْمُنْكَرِ
वा नहैता अनिल-मुन्करि
और बदी से रोका,
वत्तबा’ता अर्रसूल
और रसूल की पैरवी की,
وَتَلَوْتَ ٱلْكِتَابَ حَقَّ تِلاَوَتِهِ
वा तलौता अल-किताबा हक़्क़ा तिलावतिही
और किताब की तिलावत उसका हक़ अदा करते हुए की,
वा बल्लग़्ता अनिल्लाहि
और अल्लाह की तरफ़ से पैग़ाम पहुँचाया,
وَوَفَيْتَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ
वा वफ़ैता बिअह्दिल्लाहि
और अल्लाह के अहद को पूरा किया,
وَتَمَّتْ بِكَ كَلِمَاتُ ٱللَّهِ
वा तम्मत् बिका कलीमातुल्लाहि
और आप ही के ज़रिये अल्लाह के कलिमात मुकम्मल हुए,
وَجَاهَدْتَ فِي ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِ
वा जाहद्ता फी अल्लाहि हक़्क़ा जिहादिही
और आपने अल्लाह की राह में उसका हक़ अदा करते हुए जिहाद किया,
وَنَصَحْتَ لِلَّهِ وَلِرَسُولِهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
वा नसह्ता लिल्लाहि वा लिरसूलिही सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
और आपने अल्लाह के लिए और उसके रसूल के लिए नसीहत की—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही,
وَجُدْتَ بِنَفْسِكَ صَابِراً مُحْتَسِباً
वा जुद्ता बिनफ्सिका साबिरन मुहतसिबन
और आपने सब्र और इहतिसाब के साथ अपनी जान निसार की, अल्लाह के अज्र की तलब में,
مُجَاهِداً عَنْ دِينِ ٱللَّهِ
मुजाहिदन अन दीनी अल्लाहि
अल्लाह के दीन की हिफाज़त के लिए जिहाद करते हुए,
مُوَقِّياً لِرَسُولِ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
मुवक़्क़ियन लिरसूलि अल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
अल्लाह के रसूल की हिफ़ाज़त करते हुए—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही,
طَالِباً مَا عِنْدَ ٱللَّهِ
तालिबन मा इन्दा अल्लाहि
अल्लाह के पास जो है, उसकी तलब में,
رَاغِباً فِيمَا وَعَدَ ٱللَّهُ
राग़िबन फीमा वअदा अल्लाहु
और उस चीज़ के शौक़ में जो अल्लाह ने वादा फ़रमाया है।
وَمَضَيْتَ لِلَّذِي كُنْتَ عَلَيْهِ شَهِيداً
वा मज़ैता लिल्लज़ी कुंता अलैहि शहीदन
और आप उसी पर शहीद होकर दुनिया से रुख़्सत हुए,
वा शाहीदन वा मश्हूदन
गवाह भी और जिन पर गवाही दी जाए ऐसे भी।
فَجَزَاكَ ٱللَّهُ عَنْ رَسُولِهِ
फजज़ाका अल्लाहु अन रसूलिही
तो अल्लाह आपको उसके रसूल की तरफ़ से अज्र अता फरमाए,
وَعَنِ ٱلإِسْلاَمِ وَأَهْلِهِ
वा अनिल-इस्लामि वा अह्लिही
और इस्लाम व अहल-ए-इस्लाम की तरफ़ से भी,
مِنْ صِدِّيقٍ أَفْضَلَ ٱلْجَزَاءِ
मिन सिद्दीक़िन अफ़दला अल-जज़ाई
सिद्दीक़ के लिए सबसे बेहतर अज्र के साथ।
أَشْهَدُ أَنَّكَ كُنْتَ أَوَّلَ ٱلْقَوْمِ إِسْلاَماً
अश्हदु अन्नका कुंता अव्वलल-क़ौमि इस्लामन
मैं गवाही देता हूँ कि आप क़ौम में सबसे पहले इस्लाम लाए,
وَأَخْلَصَهُمْ إِيـمَاناً
वा अख़लसहुम ईमानन
और ईमान में सबसे ज़्यादा ख़ालिस थे,
वा अशद्दहुम यक़ीनन
और यक़ीन में सबसे ज़्यादा मज़बूत थे,
वा अख़वफहुम लिल्लाहि
और अल्लाह से सबसे ज़्यादा डरने वाले थे,
वा अ’ज़महुम अनाअन
और (दीन के लिए) सबसे ज़्यादा मुसीबतें उठाने वाले थे,
وَأَحْوَطَهُمْ عَلَىٰ رَسُولِ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
वा अह्वतहुम अला रसूलि अल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
और रसूलुल्लाह की हिफ़ाज़त में सबसे ज़्यादा होशियार व चौकस थे—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही,
वा अफ़ज़ला हुम मनाक़िब
और फज़ीलतों में सबसे बेहतर थे,
वा अक्सराहुम सवाबिक़
और सब पर सबक़त ले जाने वाले थे,
वा अरफ़अहुम दरजतन
और दर्जे में सबसे बुलंद थे,
وَأَشْرَفَهُمْ مَنْزِلَةً
वा अश्रफहुम मन्ज़िलतन
और मर्तबे में सबसे अशरफ़ थे,
वा अकरमहुम अलैहि
और उसके नज़दीक सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाले थे।
فَقَوِيْتَ حِينَ وَهَنُوٱ
फक़वीता हीना वहनू
तो आप उस वक़्त मज़बूत रहे जब वो कमज़ोर पड़ गए,
وَلَزِمْتَ مِنْهَاجَ رَسُولِ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
वा लज़िम्ता मिनहाजा रसूलि अल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
और आप रसूलुल्लाह के तरीक़े पर डटे रहे—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही।
وَأَشْهَدُ أَنَّكَ كُنْتَ خَلِيفَتَهُ حَقّاً
वा अश्हदु अन्नका कुंता खलीफतहु हक़्क़न
और मैं गवाही देता हूँ कि आप वाक़ई उनके सच्चे ख़लीफ़ा थे (यानी हुज़ूर-ए-अक़दस),
لَمْ تُنَازَعْ بِرَغْمِ ٱلْمُنَافِقِينَ
लम तुनाज़अ बिरग़्मि अल-मुनाफ़िक़ीन
मुनाफ़िक़ीन के होते हुए भी आपसे इस मक़ाम में कोई मुकाबला न कर सका,
वा ग़ैज़ि अल-काफ़िरीन
और काफ़िरों की जि़द्द व अदावत के बावजूद,
वा दिग़्नि अल-फ़ासिक़ीन
और फ़ासिक़ों के कीने व बुग़्ज़ के बावजूद।
وَقُمْتَ بِٱلأَمْرِ حِينَ فَشِلُوٱ
वा क़ुम्ता बिल-अम्रि हीना फ़शिलू
और जब वो नाकाम हो गए तो आपने उमूर को संभाला,
وَنَطَقْتَ حِينَ تَتَعْتَعُوٱ
वा नतक़्ता हीना ततअ’तअ’ू
और जब वो हकलाने लगे तो आपने हक़ बयान किया,
وَمَضَيْتَ بِنُورِ ٱللَّهِ إِذْ وَقَفُوٱ
वा मज़ैता बिनूरिल्लाहि इज़ वक़फ़ू
और जब वो रुक गए तो आप नूर-ए-इलाही के साथ आगे बढ़े।
فَمَنِ ٱتَّبَعَكَ فَقَدِ ٱهْتَدَىٰ
फमनित्तबअका फ़क़दि इहतदा
पस जो आपकी पैरवी करे, वह यक़ीनन हिदायत पा गया।
كُنْتَ أَوَّلَهُمْ كَلاَماً
कुंता अव्वलहुम कलामन
आप उनमें सबसे पहले बोलने वाले थे,
वा अशद्दहुम ख़िसामन
और मुख़ालिफ़ों का सबसे मज़बूती से जवाब देने वाले थे,
वा अस्वबहुम मन्तिक़न
और सबसे दुरुस्त मंतिक़ वाले थे,
वा असद्दहुम रअ’यन
और राय में सबसे ज़्यादा सदीद थे,
वा अश्जअहुम क़ल्बन
और सबसे ज़्यादा दिलेर थे,
वा अक्थarahum यक़ीनन
और सबसे ज़्यादा यक़ीन वाले थे,
वा अहसनहुम अमलन
और अमल में सबसे बेहतर थे,
وَأَعْرَفَهُمْ بِٱلأُمُورِ
वा अ’रफहुम बिल-उमूरि
और उमूर को सबसे ज़्यादा जानने वाले थे।
كُنْتَ لِلْمُؤمِنِينَ أَباً رَحِيماً
कुंता लिल-मोमिनीन अबन रहीमन
मोमिनीन के लिए आप रहमदिल बाप की तरह थे,
إِذْ صَارُوٱ عَلَيْكَ عِيَالاً
इज़ सारू अलैका इयालन
क्योंकि वो आपके तहत कफ़ील बनकर (आप पर) आश्रित हो गए थे;
فَحَمَلْتَ أَثْقَالَ مَا عَنْهُ ضَعُفُوٱ
फह़मल्ता अथक़ाला मा अन्हु ज़अ’फू
तो आपने उन बोझों को उठाया जिनको उठाने से वो कमज़ोर थे,
वा हफिज़्ता मा अदाअू
और आपने उसे महफूज़ रखा जिसे उन्होंने ज़ाया कर दिया,
وَرَعَيْتَ مَا أَهْمَلُوٱ
वा रअ’यता मा अहमलू
और आपने उसकी निगहबानी की जिसे उन्होंने नज़रअंदाज़ किया,
وَشَمَّرْتَ إِذْ جَبُنُوٱ
वा शम्मरता इज़ जबुनू
और जब वो बुज़दिली दिखाने लगे तो आपने कमर कस ली,
वा अलौता इज़ हलेअू
और जब वो घबरा गए तो आप आगे बढ़े,
वा सबरता इज़ जज़िअू
और जब वो बेचैन हुए तो आपने सब्र किया।
كُنْتَ عَلَىٰ ٱلْكَافِرِينَ عَذَاباً صَبّاً
कुंता अला अल-काफ़िरीन अज़ाबन सब्बन
आप काफ़िरों पर लगातार अज़ाब बनकर रहे,
वा ग़िलज़तन वा ग़ैज़न
और (उन पर) सख़्ती और ग़ुस्सा भी थे।
وَلِلْمُؤْمِنِينَ غَيْثاً وَخِصْباً وَعِلْماً
वा लिल-मोमिनीन ग़ैथन वा ख़िस्बन वा इल्मन
और मोमिनीन के लिए रहमत की बारिश, बरकत और इल्म का सरचश्मा थे।
लम तुफ़लल हुज्जतुक
आपकी हुज्जत कभी कमज़ोर न हुई,
वा लम यज़िग़ क़लबुक
और आपका दिल कभी टेढ़ा न हुआ,
وَلَمْ تَضْعُفْ بَصِيرَتُكَ
वा लम तज़्अ’फ़ बसीरतुक
और आपकी बसीरत कभी कमज़ोर न पड़ी,
वा लम तज्बुन नफ्सुक
और आपकी हिम्मत कभी न डरी।
كُنْتَ كَٱلْجَبَلِ لاَ تُحَرِّكُهُ ٱلْعَوَاصِفُ
कुंता कल-जबलि ला तुहर्रिकुहु अल-अवासीफ़
आप पहाड़ की तरह थे—तूफ़ान भी आपको हिला न सके,
وَلاَ تُزِيلُهُ ٱلْقَوَاصِفُ
वा ला तुज़ीलुहु अल-क़वासिफ़
और मुसीबतें भी आपको जगा से हटा न सकीं।
كُنْتَ كَمَا قَالَ رَسُولُ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
कुंता कमा क़ाला रसूलु अल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
आप वैसे ही थे जैसा अल्लाह के रसूल ने बयान किया—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही—कि आपके बारे में फ़रमाया:
क़विय्यन फी बदनिक
कि आप अपने बदन में क़वी हैं,
مُتَوَاضِعاً فِي نَفْسِكَ
मुतवाज़िअन फी नफ्सिक
और अपनी ज़ात में मुतवाज़े हैं,
अज़ीमन इन्दा अल्लाहि
और अल्लाह के नज़दीक अज़ीम हैं,
कबीरण फी अल-अर्द
और ज़मीन पर बड़ा रुतबा रखते हैं,
जलीलन फी अस्समाइ
और आसमानों में बुलंद मर्तबा रखते हैं।
لَمْ يَكُنْ لأَحَدٍ فِيكَ مَهْمَزٌ
लम यकुन लिअहदिन फीका मह्मज़ुन
आपमें किसी के लिए कोई ऐब निकालने की गुंजाइश न थी,
وَلاَ لِقَائِلٍ فِيكَ مَغْمَزٌ
वा ला लिक़ाइलिन फीका मग़्मज़ुन
और न किसी कहने वाले के लिए आप पर बदगोई का मौका,
وَلاَ لِخَلْقٍ فِيكَ مَطْمَعٌ
वा ला लिख़ल्क़िन फीका मत्मअुन
और आप किसी मख़लूक़ की तरफ़ लालच न रखते थे,
وَلاَ لأَحَدٍ عِنْدَكَ هَوَادَةٌ
वा ला लिअहदिन इन्दका हवादतुन
और न आप किसी के साथ नाइंसाफ़ाना नरमी बरतते थे।
يُوجَدُ ٱلضَّعِيفُ ٱلذَّلِيلُ عِنْدَكَ قَوِيّاً عَزِيزاً حَتَّىٰ تَأْخُذَ لَهُ بِحَقِّهِ
यूजदु अद्दईफु अज़्ज़लीलु इन्दका क़विय्यन अज़ीजन हत्ता तअख़ुज़ा लहू बिहक़्क़िही
कमज़ोर और ज़लील शख़्स आपकी नज़र में क़वी और अज़ीज़ होता था, यहाँ तक कि आप उसके लिए उसका हक़ दिला देते,
وَٱلْقَوِيُّ ٱلْعَزِيزُ عِنْدَكَ ضَعِيفاً حَتَّىٰ تَأْخُذَ مِنْهُ ٱلْحَقَّ
वल-क़विय्यु अल-अज़ीज़ु इन्दका ज़ईफन हत्ता तअख़ुज़ा मिन्हु अल-हक़्क़
और क़वी व अज़ीज़ शख़्स आपकी नज़र में ज़ईफ होता था, यहाँ तक कि आप उससे दूसरों का हक़ वसूल कर लेते।
الْقَرِيبُ وَٱلْبَعِيدُ عِنْدَكَ فِي ذٰلِكَ سَوَاءٌ
अल-क़रीबु वल-बईदु इन्दका फी ज़ालिका सवाअुन
इस मामले में आपके नज़दीक क़रीब और दूर—दोनों बराबर थे।
شَأْنُكَ ٱلْحَقُّ وَٱلصِّدْقُ وَٱلرِّفْقُ
शा’नुका अल-हक़्क़ु वस्सिद्क़ु वर्ऱिफ़्क़ु
आपका शिआर हक़, सिद्क़ और रिफ़्क़ (नर्मी) था,
وَقَوْلُكَ حُكْمٌ وَحَتْمٌ
वा क़ौलुका हुक्मुन वा हत्मुन
और आपका क़ौल हुक्म भी था और फ़ैसला-ए-क़तई भी,
وَأَمْرُكَ حِلْمٌ وَعَزْمٌ
वा अम्रुका हिल्मुन वा अज़्मुन
और आपका अम्र हिल्म (बुर्दबारी) और अज़्म (पुख़्ता इरादा) था,
وَرَأْيُكَ عِلْمٌ وَحَزْمٌ
वा रअयुका इल्मुन वा हज़्मुन
और आपकी राय इल्म और हज़्म (दृढ़ता) थी।
इ’तदला बिका अद्दीनु
आपके ज़रिये दीन का निज़ाम मुअतदिल हुआ,
वा सहुला बिका अल-असीरु
और मुश्किल आसान हो गई,
وَأُطْفِئَتْ بِكَ ٱلنِّيرَانُ
वा उत्फ़िअत बिका अन्नीरानु
और आगें बुझा दी गईं,
وَقَوِيَ بِكَ ٱلإِيـمَانُ
वा क़विया बिका अल-ईमानु
और ईमान मज़बूत हुआ,
وَثَبَتَ بِكَ ٱلإِسْلاَمُ
वा सबता बिका अल-इस्लामु
और इस्लाम साबित-क़दम हुआ,
وَهَدَّتْ مُصِيبَتُكَ ٱلأَنَامَ
वा हद्दत मुसिबतुक अल-अनाम
और आपको खो देने की मुसीबत ने तमाम लोगों को तोड़ कर रख दिया।
فَإِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
फ़इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिउन
बेशक हम अल्लाह के हैं और बेशक उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।
لَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ قَتَلَكَ
लअना अल्लाहु मन क़तलक
अल्लाह की लानत हो उस पर जिसने आपको क़त्ल किया,
وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ خَالَفَكَ
वा लअना अल्लाहु मन ख़ालफ़क
और अल्लाह की लानत हो उस पर जिसने आपकी मुख़ालफ़त की,
وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَيْكَ
वा लअना अल्लाहु मन इफ़्तरा अलैक
और अल्लाह की लानत हो उस पर जिसने आप पर झूठ बाँधा,
وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ ظَلَمَكَ وَغَصَبَكَ حَقَّكَ
वा लअना अल्लाहु मन ज़लमक वा ग़सबक हक़्क़क
और अल्लाह की लानत हो उस पर जिसने आप पर ज़ुल्म किया और आपका हक़ ग़स्ब किया,
وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ بَلَغَهُ ذٰلِكَ فَرَضِيَ بِهِ
वा लअना अल्लाहु मन बलग़हु ज़ालिका फ़रज़िया बिही
और अल्लाह की लानत हो उस पर जिसे ये बात पहुँची फिर वह इससे राज़ी रहा।
إِنَّا إِلَىٰ ٱللَّهِ مِنْهُمْ بُرَاءٌ
इन्ना इला अल्लाहि मिन्हुम बुराअुन
यक़ीनन हम अल्लाह के सामने उनसे बरी हैं।
لَعَنَ ٱللَّهُ أُمَّةً خَالَفَتْكَ
लअना अल्लाहु उम्मतन ख़ालफ़त्क
अल्लाह की लानत हो उस उम्मत पर जिसने आपकी मुख़ालफ़त की,
वा जहदत विलायतक
और आपकी विलायत का इनकार किया,
وَتَظَاهَرَتْ عَلَيْكَ وَقَتَلَتْكَ
वा तज़ाहरत अलैक वा क़तलत्क
और आपके ख़िलाफ़ एक-दूसरे की मदद की और आपको शहीद किया,
وَحَادَتْ عَنْكَ وَخَذَلَتْكَ
वा हादत अनक वा ख़ज़लत्क
और आपसे हट गई और आपको तन्हा छोड़ दिया।
الْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي جَعَلَ ٱلنَّارَ مَثْوَاهُمْ
अल्हम्दु लिल्लाहि अल्लज़ी जअला अन्नारा मस्वाहुम
सब हम्द उस अल्लाह के लिए है जिसने आग को उनका ठिकाना बनाया,
وَبِئْسَ ٱلْوِرْدُ ٱلْمَوْرُودُ
वा बिअ’सा अल-विर्दु अल-मौरूदु
और बहुत बुरा है वह ठिकाना जहाँ उन्हें ले जाया जाएगा।
أَشْهَدُ لَكَ يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ وَوَلِيَّ رَسُولِهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ بِٱلْبَلاَغِ وَٱلأَدَاءِ
अश्हदु लका या वलिय्य अल्लाहि वा वलिय्य रसूलिही सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही बिल-बलाग़ि वल-अदाई
मैं आपकी गवाही देता हूँ, ऐ वली-ए-अल्लाह और रसूल के वली—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही—कि आपने पैग़ाम पहुँचाया और (फ़र्ज़) अदा किया।
وَأَشْهَدُ أَنَّكَ حَبِيبُ ٱللَّهِ وَبَابُهُ
वा अश्हदु अन्नका हबीबु अल्लाहि वा बाबुहू
और मैं गवाही देता हूँ कि आप अल्लाह के हबीब हैं और उसकी तरफ़ जाने का दरवाज़ा हैं,
وَأَنَّكَ جَنْبُ ٱللَّهِ وَوَجْهُهُ ٱلَّذِي مِنْهُ يُؤْتَىٰ
वा अन्नका जन्बु अल्लाहि वा वज्हुहू अल्लज़ी मिन्हु यू’ता
और आप अल्लाह का जन्ब हैं और उसका वह वज्ह हैं जिसके ज़रिये (उसकी बारगाह में) हाज़िरी दी जाती है,
وَأَنَّكَ سَبِيلُ ٱللَّهِ
वा अन्नका सबीलु अल्लाहि
और आप अल्लाह का रास्ता हैं,
वा अन्नका अब्दु अल्लाहि
और आप अल्लाह के बंदे हैं,
وَأَخُو رَسُولِهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
वा अख़ू रसूलिही सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
और आप उसके रसूल के भाई हैं—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही।
أَتَيْتُكَ زَائِراً لِعَظِيمِ حَالِكَ وَمَنْزِلَتِكَ عِنْدَ ٱللَّهِ وَعِنْدَ رَسُولِهِ
अतैतुका ज़ाइरन लिअ’ज़ीमि हालिक व मंज़िलतिक इन्दा अल्लाहि व इन्दा रसूलिही
मैं आपकी ज़ियारत के लिए हाज़िर हुआ हूँ, आपके अज़ीम हाल और अल्लाह व उसके रसूल के नज़दीक आपकी मंज़िलत की वजह से।
مُتَقَرِّباً إِلَىٰ ٱللَّهِ بِزِيَارَتِكَ
मुतक़र्रिबन इला अल्लाहि बिज़ियारतिक
मैं आपकी ज़ियारत के ज़रिये अल्लाह का क़ुर्ब चाहता हूँ,
رَاغِباً إِلَيْكَ فِي ٱلشَّفَاعَةِ
राग़िबन इलैक फी अश्शफ़ाअ’ति
और शफ़ाअत के बारे में आपकी तरफ़ रग़बत रखता हूँ।
أَبْتَغِي بِشَفَاعَتِكَ خَلاَصَ نَفْسِي
अब्तग़ी बिशफ़ाअ’तिक ख़लास नफ्सी
मैं आपकी शफ़ाअत के ज़रिये अपनी नجات चाहता हूँ,
مُتَعَوِّذاً بِكَ مِنَ ٱلنَّارِ
मुतअ’व्विज़न बिका मिन अन्नारि
और जहन्नम से पनाह के लिए आपकी पनाह लेता हूँ,
هَارِباً مِنْ ذُنُوبِيَ ٱلَّتِي ٱحْتَطَبْتُهَا عَلَىٰ ظَهْرِي
हारिबन मिन ज़ुनूबिया अल्लती इहततब्तुहा अला ज़ह्री
मैं अपने उन गुनाहों से भाग रहा हूँ जिन्हें मैंने अपनी पीठ पर बोझ की तरह लाद लिया है,
فَزِعاً إِلَيْكَ رَجَاءَ رَحْمَةِ رَبِّي
फ़ज़िअन इलैक रजाअ ऱह्मति रब्बी
और अपने रब की रहमत की उम्मीद में आपकी तरफ़ रुजू करता हूँ।
أَتَيْتُكَ أَسْتَشْفِعُ بِكَ يَا مَوْلاَيَ إِلَىٰ ٱللَّهِ
अतैतुका अस्तश्फिअ’ु बिका या मौलाया इला अल्लाहि
मैं आपके पास आया हूँ, ऐ मेरे मौला, कि आपके ज़रिये अल्लाह की बारगाह में शफ़ाअत चाहता हूँ,
وَأَتَقَرَّبُ بِكَ إِلَيْهِ لِيَقْضِيَ بِكَ حَوَائِجِي
वा अतक़र्रबु बिका इलैहि लियक़दिया बिका हवाइजि
और आपके वसीले से उसकी तरफ़ क़ुर्ब चाहता हूँ ताकि वह आपकी बरकत से मेरी हाजतें पूरी करे;
فَٱشْفَعْ لِي يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
फ़श्फअ’ ली या अमीर अल-मोमिनीन
तो मेरे लिए शफ़ाअत कीजिए, ऐ अमीरुल मोमिनीन।
فَإِنِّي عَبْدُ ٱللَّهِ وَمَوْلاَكَ وَزَائِرُكَ
फ़इन्नी अब्दु अल्लाहि वा मौलाक व ज़ाइरुक
यक़ीनन मैं अल्लाह का बंदा हूँ, आपका गुलाम और आपका ज़ाइर हूँ,
وَلَكَ عِنْدَ ٱللَّهِ ٱلْمَقَامُ ٱلْمَعْلُومُ
वा लका इन्दा अल्लाहि अल-मक़ामु अल-मअ’लूम
और अल्लाह के नज़दीक आपका मक़ाम-ए-मअ’लूम है,
वल-जाहु अल-अज़ीम
और बड़ा जाह व मर्तबा,
वश्शा’नु अल-कबीरु
और बड़ा शान व मक़ाम,
وَٱلشَّفَاعَةُ ٱلْمَقْبُولَةُ
वश्शफ़ाअ’तु अल-मक़बूलतु
और शफ़ाअत जो क़बूल की जाती है।
اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन वा आलि मुहम्मद
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और आले-ए-मुहम्मद पर दुरूद भेज।
وَصَلِّ عَلَىٰ عَبْدِكَ وَأَمِينِكَ ٱلأَوْفَىٰ
वा सल्लि अला अब्दिका वा अमीनिका अल-अव्फ़ा
और अपने बंदे और अपने सबसे वफ़ादार अमीन पर दुरूद भेज,
वा उरवतिका अल-वुस्क़ा
तेरी मज़बूत-तर पकड़ पर,
वा यदिका अल-उलया
तेरे बुलंद दस्त पर,
वा कलिमतिका अल-हुस्ना
तेरे बेहतरीन कलिमा पर,
وَحُجَّتِكَ عَلَىٰ ٱلْوَرَىٰ
वा हुज्जतिका अला अल-वरा
और तमाम मख़लूक़ पर तेरी हुज्जत पर,
वा सिद्दीक़िका अल-अकबरि
और तेरे सबसे बड़े सिद्दीक़ पर,
सय्यिदि अल-अवसियाइ
अवसिया के सरदार पर,
वा रुक्नि अल-अवलियाइ
औलिया के रुक्न पर,
वा इमादि अल-अस्फियाइ
अस्फिया के इमाद पर,
अमीरि अल-मोमिनीन
अमीरुल मोमिनीन पर,
وَيَعْسُوبِ ٱلْمُتَّقِينَ
वा यअ’सूबि अल-मुत्तक़ीन
मुत्तक़ीन के यअ’सूब पर,
وَقُدْوَةِ ٱلصِّدِّيقِينَ
वा क़ुद्वति अस्सिद्दीक़ीन
सिद्दीक़ीन के क़ुद्वा पर,
वा इमामि अस्सालिहीन
सालिहीन के इमाम पर,
ٱلْمَعْصُومِ مِنَ ٱلزَّلَلِ
अल-मअ’सूमि मिन अज़्ज़लल
जो لغزش से महफूज़ है,
وَٱلْمَفْطُومِ مِنَ ٱلْخَلَلِ
वल-मफ्तूमि मिन अल-ख़लल
जो ख़लल से बचाया गया है,
وَٱلْمُهَذَّبِ مِنَ ٱلْعَيْبِ
वल-मुहज़्ज़बि मिन अल-अय्ब
जो ऐब से पाक किया गया है,
وَٱلْمُطَهَّرِ مِنَ ٱلرَّيْبِ
वल-मुतह्हरि मिन अर-रैब
जो शक से मुबरा और मुतह्हर है,
अख़ी नबीय्यिक
तेरे नबी के भाई,
वा वसिय्यि रसूलिक
और तेरे रसूल के वसी,
وَٱلْبَائِتِ عَلَىٰ فِرَاشِهِ
वल-बाइति अला फ़िराशिही
जो उसकी जगह उसकी बिस्तर पर (उस रात) सोया,
وَٱلْمُوَاسِي لَهُ بِنَفْسِهِ
वल-मुवासी लहू बिनफ्सिही
और जिसने अपनी जान से उसका साथ निभाया,
وَكَاشِفِ ٱلْكَرْبِ عَنْ وَجْهِهِ
वा काशिफि अल-करबि अन वज्हिही
और जिसने उसकी परेशानी को उसके चेहरे से दूर किया,
ٱلَّذِي جَعَلْتَهُ سَيْفاً لِنُبُوَّتِهِ
अल्लज़ी जअल्तहु सैफ़न लिनुबुव्वतिही
जिसे तूने उसकी नुबूवत के लिए तलवार बनाया,
وَمُعْجِزاً لِرِسَالَتِهِ
वा मु’जिज़न लिरिसालतिही
और उसकी रिसालत के लिए मुअ’जिज़ा बनाया,
وَدَلاَالَةً وَاضِحَةً لِحُجَّتِهِ
वा दलालतन वाज़िहतन लिहुज्जतिही
और उसकी हुज्जत के लिए वाज़ेह दलील बनाया,
वा हामिलन लिरायतिही
उसका परचम उठाने वाला,
वा विक़ायतन लिमुह्जतिही
और उसकी जान की हिफ़ाज़त करने वाला,
वा हादियन लिउम्मतिही
और उसकी उम्मत का राहनुमा,
वा यदन लिबअ’सिही
और उसकी क़ुव्वत का सहारा,
वा ताजन लिरअ’सिही
और उसके सर का ताज,
वा बाबन लिनस्रिही
और उसकी नुसरत का दरवाज़ा,
वा मिफ्ताहन लिज़फ़रिही
और उसकी फ़तह की कुंजी,
حَتَّىٰ هَزَمَ جُنُودَ ٱلشِّرْكِ بِأَيْدِكَ
हत्ता हज़मा जुनूदा अश्शिर्कि बिअय्दिक
यहाँ तक कि आपके हाथों की मदद से उसने शिर्क के लशकरों को शिकस्त दी,
وَأَبَادَ عَسَاكِرَ ٱلْكُفْرِ بِأَمْرِكَ
वा अबादा असाकिरा अल-कुफ़्रि बिअम्रिक
और आपके हुक्म से कुफ़्र की फ़ौजों को नेस्त-ओ-नाबूद किया,
وَبَذَلَ نَفْسَهُ فِي مَرْضَاتِكَ وَمَرْضَاةِ رَسُولِكَ
वा बज़ला नफ्सहु फी मर्ज़ातिक वा मर्ज़ाति रसूलिक
और उसने तेरी और तेरे रसूल की रज़ा के लिए अपनी जान निसार कर दी,
وَجَعَلَهَا وَقْفاً عَلَىٰ طَاعَتِهِ
वा जअलहा वक़्फ़न अला ताअतिही
और उसे उसकी इताअत के लिए वक़्फ़ कर दिया,
وَمَجِنّاً دُونَ نَكْبَتِهِ
वा मजिन्नन दूना नक्बतिही
और हर आफ़त से बचाने के लिए अपने आप को ढाल बना लिया,
حَتَّىٰ فَاضَتْ نَفْسُهُ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ فِي كَفِّهِ
हत्ता फ़ाज़त नफ्सुहू सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही फी कफ़्फ़िही
यहाँ तक कि नबी—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही—की रूह (दुनिया से) रुख़्सत हुई, और उनका चेहरा अली के हाथ में था,
वस्तलबा बर्दहा
और उसने उसकी ठंडक महसूस की,
وَمَسَحَهُ عَلَىٰ وَجْهِهِ
वा मसहहु अला वज्हिही
और उससे अपना चेहरा मल लिया।
وَأَعَانَتْهُ مَلائِكَتُكَ عَلَىٰ غُسْلِهِ وَتَجْهِيزِهِ
वा अ’आनतहु मलाइकतुक अला ग़ुस्लिही वा तज्हीज़िही
और तेरे फ़रिश्तों ने उसे ग़ुस्ल देने और तज्हीज़ करने में मदद की।
وَصَلَّىٰ عَلَيْهِ وَوَارَىٰ شَخْصَهُ
वा सल्ला अलैहि वा वारा शख़्सहु
फिर उसने उन पर नमाज़ अदा की, उनके जिस्म को दफ़्न किया,
वा क़ज़ा दैनहु
और उनका क़र्ज़ अदा किया,
वा अंज़ज़ा वअ’दहु
और उनका वादा पूरा किया,
वा लज़िमा अह्दहु
और उनके अह्द पर क़ायम रहा,
वहतज़ा मिथालहु
और उनकी मिसाल पर चला,
वा हफ़िज़ा वसिय्यतहु
और उनकी वसीयत की हिफ़ाज़त की।
وَحِينَ وَجَدَ أَنْصَاراً نَهَضَ مُسْتَقِلاًّ بِأَعْبَاءِ ٱلْخِلاَفَةِ
वा हीना वजदा अंसारन नह़दा मुस्तक़िल्लन बिअ’बाइ अल-ख़िलाफ़ति
और जब उसने मददगार पाए तो ख़िलाफ़त के बोझ उठाकर ख़ुद खड़ा हुआ,
مُضْطَلِعاً بِأَثْقَالِ ٱلإِمَامَةِ
मुद्तलिअ’न बिअथक़ालि अल-इमामति
और इमामत के भारी बोझ सँभाल लिए।
فَنَصَبَ رَايَةَ ٱلْهُدَىٰ فِي عِبَادِكَ
फनसब रायतल-हुदा फी इबादिक
तो उसने तेरे बंदों के दरमियान हिदायत का परचम क़ायम किया,
وَنَشَرَ ثَوْبَ ٱلأَمْنِ فِي بِلاَدِكَ
वा नशर सव्बल-अम्नि फी बिलादिक
और तेरे मुल्कों में अम्न का लिबास फैला दिया,
وَبَسَطَ ٱلْعَدْلَ فِي بَرِيَّتِكَ
वा बसत अल-अद्ला फी बरिय्यतिक
और तेरी मख़लूक़ में अद्ल को फैलाया,
وَحَكَمَ بِكِتَابِكَ فِي خَلِيقَتِكَ
वा हकमा बिकिताबिक फी ख़लीक़तिक
और उसने तेरी किताब के मुताबिक़ तेरी मख़लूक़ में फ़ैसले किए,
वा अक़ामा अल-हुदूद
और हुदूद क़ायम किए,
वा क़मअ’अ अल-जुहूद
और जिहूद (इन्कार) को कुचल दिया,
वा क़व्वमा अज़्ज़ैग़
और ज़ैग़ (कजी/इनहिराफ़) को दुरुस्त कर दिया,
वा सक्कना अल-ग़म्रता
और ग़म्रा (हैरानी/इश्तिबाह) को शांत कर दिया,
वा अबादा अल-फ़त्रता
और फ़त्रत (सुस्ती/ठहराव) को मिटा दिया,
वा सद्दा अल-फुरजता
और दरार/ख़ला को भर दिया,
وَقَتَلَ ٱلنَّاكِثَةَ وَٱلْقَاسِطَةَ وَٱلْمَارِقَةَ
वा क़तला अन्नाकिसता वल-क़ासितता वल-मारिक़ता
और नाकिसीन, क़ासितीन और मारिक़ीन से जंग की और उन्हें क़त्ल किया,
وَلَمْ يَزَلْ عَلَىٰ مِنْهَاجِ رَسُولِ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَوَتِيرَتِهِ
वा लम यज़ल अला मिन्हाजि रसूलि अल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही वा वतीरतिही
और वह हमेशा रसूलुल्लाह—सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही—के मिन्हाज और तरीक़े पर क़ायम रहा,
वा लुत्फ़ि शाकिलतिही
और उनके लुत्फ़ भरे अंदाज़ पर,
वा जमालि सीरतिही
और उनकी ख़ूबसूरत सीरत पर,
मुक़्तदियन बिसुन्नतिही
उनकी सुन्नत की इत्तिबा करता रहा,
मुतअ’ल्लिक़न बिहिम्मतिही
और उनकी हिम्मत से वाबस्ता रहा,
मुबाशिरन लितरीक़तिही
और उनके तरीक़े पर अमल-पैरा रहा।
وَأَمْثِلَتُهُ نَصْبُ عَيْنَيْهِ
वा अम्सिलतहु नस्बु अ’यनैहि
और उनकी मिसालें उसके सामने थीं जैसे आँखों के सामने,
يَحْمِلُ عِبَادَكَ عَلَيْهَا
यह्मिलु इबादक अलैहा
तो वह तेरे बंदों को उन पर चलने का पाबंद करता था,
वा यद’ऊहुम इलैहा
और उन्हें उन्हीं की तरफ़ बुलाता था,
إِلَىٰ أَنْ خُضِبَتْ شَيْبَتُهُ مِنْ دَمِ رَأْسِهِ
इला अन ख़ुज़िबत शैबतहु मिन दमी रअ’सिही
यहाँ तक कि उसकी सफ़ेद दाढ़ी उसके सर के ख़ून से रंग गई।
اَللَّهُمَّ فَكَمَا لَمْ يُؤْثِرْ فِي طَاعَتِكَ شَكّاً عَلَىٰ يَقِينٍ
अल्लाहुम्मा फ़कमा लम यू’सिर फी ताअतिक शक्कन अला यक़ीनिन
ऐ अल्लाह! जैसे उसने तेरी इताअत में यक़ीन पर शक को तरजीह न दी,
وَلَمْ يُشْرِكْ بِكَ طَرْفَةَ عَيْنٍ
वा लम युश्रिक बिका तर्फ़ता अ’यनिन
और उसने पलक झपकने भर के लिए भी तुझमें किसी को शरीक न ठहराया,
صَلِّ عَلَيْهِ صَلاَةً زَاكِيَةً نَامِيَةً
सल्लि अलैहि सलातन ज़ाकियतन नामियतन
उस पर ऐसी सलात भेज जो पाक, बढ़ने वाली और बढ़ती रहने वाली हो,
يَلْحَقُ بِهَا دَرَجَةَ ٱلنُّبُوَّةِ فِي جَنَّتِكَ
यल्हक़ु बिहा दरजत अन्नुबुव्वति फी जन्नतिक
जिसके ज़रिये वह तेरी जन्नत में दर्जा-ए-नुबूवत तक पहुँचे,
وَبَلِّغْهُ مِنَّا تَحِيَّةً وَسَلاَماً
वा बल्लिघ्हु मिन्ना तहिय्यतन व सलामन
और हमारी तरफ़ से उसे तहिय्यत और सलाम पहुँचा दे,
وَآتِنَا مِنْ لَدُنْكَ فِي مُوَالاَتِهِ فَضْلاً وَإِحْسَاناً
वा आतिना मिन लदुन्क फी मुवालातिही फ़ज़्लन व इहसानन
और उसकी मौलात के बदले हमें अपनी तरफ़ से फ़ज़्ल और एहसान अता फ़रमा,
وَمَغْفِرَةً وَرِضْوَاناً
वा मग़फ़िरतन व रिज़वानन
और मग़फ़िरत और रिज़वान (रज़ामंदी),
إِنَّكَ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْجَسِيمِ
इन्नका ज़ुल-फ़ज़्लि अल-जसीम
बेशक तू बड़े फ़ज़्ल वाला है।
بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ
बिरह्मतिक या अरहमा अर्राहिमीन
तेरी रहमत के वसीले से, ऐ सबसे बढ़कर रहम करने वाला।
फिर आप पहले दायाँ और फिर बायाँ गाल क़ब्र पर रखिए, क़िब्ला रुख़ होकर नमाज़-ए-ज़ियारत पढ़िए, और जो चाहें दुआ कीजिए।
फिर आप (मशहूर) तस्बीह-ए-ज़हरा पढ़ सकते हैं और ये कहिए:
اَللَّهُمَّ إِنَّكَ بَشَّرْتَنِي
अल्लाहुम्मा इन्नका बश्शरْतनी
ऐ अल्लाह! तूने मुझे खुशख़बरी दी,
عَلَىٰ لِسَانِ نَبِيِّكَ وَرَسُولِكَ
अला लिसानि नबीय्यिक वा रसूलिक
अपने नबी और अपने रसूल की ज़बान के ज़रिये,
مُحَمَّدٍ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَآلِهِ
मुहम्मदिन सलवातुका अलैहि वा आलिही
मुहम्मद—तेरी सलवात उन पर और उन की आल पर—
فَقُلْتَ: «وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ آمَنُوٱ أَنَّ لَهُمْ قَدَمَ صِدْقٍ عِنْدَ رَبِّهِمْ.»
फ़क़ुल्ता: «वा बश्शिरिल्लज़ीना आमनू अन्ना लहुम क़दमा सिद्क़िन इन्दा रब्बिहिम»
जैसा कि तूने फ़रमाया: “और ईमान लाने वालों को खुशख़बरी दे कि उनके लिए उनके रब के पास क़दम-ए-सिद्क़ है।”
اَللَّهُمَّ وَإِنِّي مُؤْمِنٌ بِجَمِيعِ أَنْبِيَائِكَ وَرُسُلِكَ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِمْ
अल्लाहुम्मा वा इन्नी मोमिनुन बिजमीई अंबियाइका वा रुुसुलिका सलवातुका अलैहिम
ऐ अल्लाह! मैं तेरे तमाम अंबिया और रुुसुल पर ईमान रखता हूँ—तेरी सलवात उन पर—
فَلا تَقِفْنِي بَعْدَ مَعْرِفَتِهِمْ مَوْقِفاً
फ़ला तक़िफ़नी बअ’दा मअ’रिफ़तिहिम मौक़िफ़न
तो उनकी मअ’रिफ़त के बाद मुझे ऐसे मौक़िफ़ में न खड़ा करना,
تَفْضَحُنِي فِيهِ عَلَىٰ رُؤُوسِ ٱلأَشْهَادِ
तफ़ज़हनी फीहि अला रु’ऊसि अल-अश्हाद
जहाँ तू मुझे गवाहों के सामने रुस्वा कर दे;
بَلْ قِفْنِي مَعَهُمْ وَتَوَفَّنِي عَلَىٰ ٱلتَّصْدِيقِ بِهِمْ
बल क़िफ़नी मअ’हुम वा तवफ़्फ़नी अला अत-तस्दीक़ि बिहिम
बल्कि मुझे उनके साथ खड़ा कर और मुझे इस हाल में मौत दे कि मैं उनकी तस्दीक़ करता रहूँ।
اَللَّهُمَّ وَأَنْتَ خَصَصْتَهُمْ بِكَرَامَتِكَ
अल्लाहुम्मा वा अंता ख़सस्तहुम बिकरामतिक
ऐ अल्लाह! तूने उन्हें अपनी करामत से ख़ास किया,
وَأَمَرْتَنِي بِٱتِّبَاعِهِمْ
वा अमरतनी बित्तिबाअ’िहिम
और मुझे उनका इत्तिबा करने का हुक्म दिया।
اَللَّهُمَّ وَإِنِّي عَبْدُكَ وَزَائِرُكَ
अल्लाहुम्मा वा इन्नी अब्दुका वा ज़ाइरुका
ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा और तेरा ज़ाइर हूँ,
مُتَقَرِّباً إِلَيْكَ بِزِيَارَةِ أَخِي رَسُولِكَ
मुतक़र्रिबन इलैक बिज़ियारति अख़ी रसूलिक
तेरे रसूल के भाई की ज़ियारत के ज़रिये तेरा क़ुर्ब चाहता हूँ।
وَعَلَىٰ كُلِّ مَأْتِيٍّ وَمَزُورٍ حَقٌّ لِمَنْ أَتَاهُ وَزَارَهُ
वा अला कुल्लि मअ’तिय्यिन वा मज़ूरिन हक़्क़ुन लिमन अताहु वा ज़ारहु
और हर मअ’ती व मज़ूर पर उस शख़्स का हक़ है जो उसके पास आए और उसकी ज़ियारत करे।
وَأَنْتَ خَيْرُ مَأْتِيٍّ
वा अंता ख़ैरु मअ’तिय्यिन
और तू सबसे बेहतर मअ’ती है,
वा अكرमु मज़ूरिन
और सबसे करीम मज़ूर है;
فَأَسْأَلُكَ يَا اللَّّهُ يَا رَحْمٰنُ يَا رَحِيمُ
फ़अस्अलुका या अल्लाहु या रहमानु या रहीमु
पस मैं तुझसे सवाल करता हूँ—ऐ अल्लाह, ऐ रहमान, ऐ रहीम—
या जवादु या माजिदु
ऐ जवाद, ऐ माजिद—
या अहदु या समदु
ऐ अहद, ऐ समद—
يَا مَنْ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
या मन लम यलिद व लम यूलद
ऐ वह जो न जनाता है और न जना गया—
وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُواً أَحَدٌ
वा लम यकुन लहू कुफुवन अहदुन
और उसका कोई हमसर नहीं,
وَلَمْ يَتَّخِذْ صَاحِبَةً وَلاَ وَلَداً
वा लम यत्तख़िज़ साहिबतन वला वलदन
और उसने न कोई साथी/बीवी बनाई और न कोई औलाद,
أَنْ تُصَلِّيَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
अन तुसल्लिया अला मुहम्मदिन वा आलि मुहम्मद
कि तू मुहम्मद और आल-ए-मुहम्मद पर दुरूद भेजे,
وَأَنْ تَجْعَلَ تُحْفَتَكَ إِيَّايَ مِنْ زِيَارَتِي أَخَا رَسُولِكَ
वा अन तजअ’ला तुह्फ़तका इय्याया मिन ज़ियारती अखा रसूलिक
और मेरे लिए मेरी इस ज़ियारत (तेरे रसूल के भाई की ज़ियारत) के बदले अपनी तरफ़ से तुह्फ़ा ये मुक़र्रर फ़रमा,
فَكَاكَ رَقَبَتِي مِنَ ٱلنَّارِ
फ़काका रक़बती मिन अन्नार
कि मेरी गर्दन को आग से आज़ाद कर दे,
وَأَنْ تَجْعَلَنِي مِمَّنْ يُسَارِعُ فِي ٱلْخَيْرَاتِ
वा अन तजअ’लनी मिम्मन युसारिअ’ु फी अलख़ैरात
और मुझे उन लोगों में शामिल कर दे जो ख़ैरात में जल्दी करते हैं,
وَيَدْعُوكَ رَغَباً وَرَهَباً
वा यद’ऊका रग़बन व रहबन
और तुझे शौक़ और ख़ौफ़ के साथ पुकारते हैं,
وَتَجْعَلَنِي لَكَ مِنَ ٱلْخَاشِعِينَ
वा तजअ’लनी लक मिन अल-ख़ाशिअ’ीन
और मुझे अपने सामने ख़ाशिअ’ (झुका हुआ/ख़ुशूअ’ वाला) बना दे।
اَللَّهُمَّ إِنَّكَ مَنَنْتَ عَلَيَّ بِزِيَارَةِ مَوْلاَيَ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ
अल्लाहुम्मा इन्नका मनन्ता अलय्य बिज़ियारति मौलाया अलीय्यि ब्नि अबी तालिबिन
ऐ अल्लाह! तूने मुझ पर एहसान किया कि मुझे मेरे मौला अली बिन अबी तालिब की ज़ियारत नसीब हुई,
وَوِلايَتِهِ وَمَعْرِفَتِهِ
वा विलायतिही वा मअ’रिफ़तिही
और उनकी विलायत और उनकी मअ’रिफ़त (पहचान) का फ़ज़्ल अता हुआ;
فَٱجْعَلْنِي مِمَّنْ يَنْصُرُهُ وَيَنْتَصِرُ بِهِ
फ़जअ’लनी मिम्मन यन्सुरुहू वा यन्तसिरु बिही
तो मुझे उन लोगों में कर दे जो उनका नुसरत करते हैं और जिनके ज़रिये तू फ़तह अता फ़रमाता है।
وَمُنَّ عَلَيَّ بِنَصْرِكَ لِدِينِكَ
वा मुन्ना अलय्य बिनस्रिक लिदीनिक
और मुझ पर एहसान फ़रमा कि मैं तेरे दीन की मदद करूँ।
اَللَّهُمَّ وَٱجْعَلْنِي مِنْ شِيعَتِهِ وَتَوَفَّنِي عَلَىٰ دِينِهِ
अल्लाहुम्मा वजअ’लनी मिन शीयअ’तिही वा तवफ़्फ़नी अला दीनिही
ऐ अल्लाह! मुझे उनकी शिया में शामिल कर और मुझे उनके दीन पर मौत दे।
اَللَّهُمَّ أَوْجِبْ لِي مِنَ ٱلرَّحْمَةِ وَٱلرِّضْوَانِ
अल्लाहुम्मा औजिब ली मिन अर्रह्मति वर्रिद्वान
ऐ अल्लाह! मेरे लिए रहमत और रिज़वान (रज़ामंदी) वाजिब कर दे,
وَٱلْمَغْفِرَةِ وَٱلإِحْسَانِ
वल-मग़फ़िरति वल-इहसान
और मग़फ़िरत और एहसान,
وَٱلرِّزْقِ ٱلْوَاسِعِ ٱلْحَلاَلِ ٱلطَّيِّبِ
वर्रिज़्क़ि अल-वासिअ’ि अल-हलालि अत-तय्यिब
और वसीअ’ हलाल और पाक रोज़ी,
مَا أَنْتَ أَهْلُهُ يَا أَرْحمَ ٱلرَّاحِمِينَ
मा अंता अह्लुहू या अरहमा अर्राहिमीन
वह (अता कर) जो तेरे शायान-ए-शान है, ऐ सबसे बढ़कर रहम करने वाला!
وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَالَمِينَ
वल्हम्दु लिल्लाहि रब्बि अल-आलमीन
और हम्द अल्लाह के लिए है जो रब्बुल आलमीन है।
रजब की 27 तारीख़ को पढ़ी जाने वाली हज़रत इमाम अली (अलैहिस्सलाम) की दो और ज़ियारतें: