رَحِمَكَ اللهُ يَا أَبَا الْحَسَنِ
रहिमकल्लाहु या अबल हसन
अल्लाह तुम पर रहमत करे, ऐ अबुल हसन।
كُنْتَ أَوَّلَ الْقَوْمِ إسْلاَماً وَأَخْلَصَهُمْ إيمَاناً
कुन्त अव्वलल क़ौमि इस्लामन व अख़लसहुम ईमानन
तुम सबसे पहले इस्लाम क़ुबूल करने वाले और सबसे ज़्यादा सच्चे ईमान वाले थे।
وَأشَدَّهُمْ يَقِيناً وَأَخْوَفَهُمْ للهِ
व अशद्दहुम यक़ीनन व अख़वफहुम लिल्लाह
और तुम यक़ीन में सबसे मज़बूत और अल्लाह से सबसे ज़्यादा डरने वाले थे।
وَأَعْظَمَهُمْ عَناءً وَأَحْوَطَهُمْ عَلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
व अज़महम अनाअन व अह्वतहुम अला रसूलिल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही
और तुम सबसे ज़्यादा मुसीबतें उठाने वाले और रसूलुल्लाह ﷺ की सबसे ज़्यादा हिफ़ाज़त करने वाले थे।
وَآمَنَهُمْ عَلَى أصْحَابِهِ وَأَفْضَلَهُمْ مَنَاقِبَ
व आमनहुम अला अस्हाबिही व अफ़ज़लहुम मनाक़िब
और तुम उनके साथियों के लिए सबसे ज़्यादा अमानतदार और खूबियों में सबसे बेहतर थे।
وَأَكْرَمَهُمْ سَوَابِقَ وَأَرْفَعَهُمْ دَرَجَةً
व अकरमहुम सवाबिक़ व अरफ़अहुम दरजतन
और तुम नेकियों में सबसे आगे और दर्जे में सबसे बुलंद थे।
وَأَقْرَبَهُمْ مِنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
व अक्रबहुम मिन रसूलिल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही
और तुम रसूलुल्लाह ﷺ के सबसे क़रीब थे।
وَأَشْبَهَهُمْ بِهِ هَدْياً وَخُلُقاً وَسَمْتاً وَفِعْلاً
व अश्बहहुम बिही हदयन व ख़ुलुक़न व सम्तन व फ़िअलन
और तुम चाल-ढाल, अख़लाक़, आदत और अमल में उनसे सबसे ज़्यादा मिलते-जुलते थे।
وَأَشْرَفَهُمْ مَنْزِلَةً وَأَكْرَمَهُمْ عَلَيْهِ
व अश्रफहुम मन्ज़िलतन व अकरमहुम अलैहि
और तुम मक़ाम में सबसे शरीफ़ और उनके नज़दीक सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाले थे।
فَجَزَاكَ اللهُ عَنِ الإسْلاَمِ وَعَنْ رَسُولِهِ وَعَنِ الْمُسْلِمِينَ خَيْراً.
फ़जज़ाकल्लाहु अनिल इस्लामि व अन रसूलिही व अनिल मुस्लिमीन ख़ैरन
तो अल्लाह तुम्हें इस्लाम, अपने रसूल और तमाम मुसलमानों की तरफ़ से बेहतरीन बदला अता करे।
قَوِيت َحِينَ ضَعُفَ أصْحَابُهُ
क़वीत ह़ीना ज़अुफ़ अस्हाबुहू
जब उनके साथी कमज़ोर पड़े, तब तुम मज़बूत बने।
وَبَرَزْتَ حِينَ اسْتَكَانُوا
व बरज़्त ह़ीना इस्तकानू
और जब उन्होंने सर झुका लिया, तब तुम आगे बढ़े।
وَنَهَضْتَ حِينَ وَهَنُوا
व नहज़्त ह़ीना वहनू
और जब वे हिम्मत हार गए, तब तुम डटकर खड़े हो गए।
وَلَزَمْتَ مِنْهَاجَ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ إذْ هُمْ أَصْحَابُهُ
व लज़िम्त मिनहाज रसूलिल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही इज़ हुम अस्हाबुहू
और तुम रसूलुल्लाह ﷺ के रास्ते पर डटे रहे, जब वही लोग उनके साथी कहलाते थे।
وَكُنْتَ خَلِيفَتَهُ حَقّاً
व कुन्त ख़लीफ़तहू हक्क़न
और तुम सच में उनके सही जानशीन थे।
لَمْ تُنَازِعْ وَلَمْ تُضْرَعْ
लम तुनाज़िअ व लम तुज़्रअ
न तुमने झगड़ा किया और न ही किसी से होड़ की।
بِرُغْمِ الْمُنَافِقِينَ وَغَيْظِ الكَافِرِينَ
बिरुग़मिल मुनाफ़िक़ीन व ग़ैज़िल काफ़िरीन
मुनाफ़िक़ों की मौजूदगी और काफ़िरों की जलन के बावजूद।
وَكُرْهِ الحاسِدِينَ وَصِغَرِ الفَاسِقِين.
व कुरहिल हासिदीन व सिग़रिल फ़ासिक़ीन
और हसद करने वालों की दुश्मनी और बदकारों की जिल्लत के बावजूद।
فَقُمْتَ بِالأمْرِ حِينَ فَشِلُوا
फ़क़ुम्त बिल अम्रि हीन फ़शिलू
तो जब वे नाकाम हो गए, तुमने ज़िम्मेदारी सँभाल ली।
وَنَطَقْتَ حِينَ تَتَعْتَعُوا
व नतक्त हीन तअतअऊ
और जब वे हक़ बोलने में लड़खड़ाए, तुमने सच बयान किया।
وَمَضَيْتَ بِنُورِ اللهِ إذْ وَقَفُوا
व मज़ैत बिनूरिल्लाह इज़ वक़फ़ू
और जब वे रुक गए, तुम अल्लाह के नूर के साथ आगे बढ़ते रहे।
फ़त्तबऊका फ़हुदू
फिर जब उन्होंने तुम्हारा पीछा किया, तो हिदायत पा गए।
وَكُنْتَ أخْفَضَهُمْ صَوْتاً وَأعْلاهُمْ قُنُوتاً
व कुन्त अख़फ़ज़हुम सौतन व आ‘लाहुम क़ुनूतन
तुम आवाज़ में सबसे धीमे और इबादत में सबसे बुलंद थे।
وَأَقَلَّهُمْ كَلاماً وَأَصْوَبَهُمْ نُطْقاً
व अक़ल्लहुम कलामन व अस्वबहुम नुत्क़न
तुम कम बोलते थे, लेकिन तुम्हारी बात सबसे ज़्यादा सही होती थी।
وَأكْبَرَهُمْ رَأْياً وَأَشْجَعَهُمْ قَلْباً
व अकबरहुम रअयन व अश्जअहुम क़ल्बन
तुम राय में सबसे बड़े और दिल के सबसे बहादुर थे।
وَأَشَدَّهُمْ يَقِيناً وَأَحْسَنَهُمْ عَمَلاً وَأَعْرَفَهُمْ بِالأُمُورِ.
व अशद्दहुम यक़ीनन व अहसनहुम अमलन व अ‘रफ़हुम बिल उमूर
तुम यक़ीन में सबसे मज़बूत, अमल में सबसे बेहतर और मामलों को सबसे ज़्यादा जानने वाले थे।
كُنْتَ وَاللهِ يَعْسُوباً لِلدِّينِ أَوَّلاً وَآخِراً:
कुन्त वल्लाहि यअसूबसन लिद्दीनि अव्वलन व आख़िरन
ख़ुदा की क़सम, तुम शुरू से आख़िर तक दीन के सरदार रहे।
اَلأوَّلَ حِينَ تَفَرَّقَ النَّاسُ وَالآخِرُ حِينَ فَشِلُوا
अल अव्वल हीन तफ़र्रक़न नास वल आख़िर हीन फ़शिलू
जब लोग बिखर गए तब तुम सबसे पहले डटे रहे, और जब वे हार गए तब तुम आख़िरी तक क़ायम रहे।
كُنْتَ لِلْمُؤْمِنِينَ أباً رَحِيماً إذْ صَارُوا عَلَيْكَ عِيَالاً
कुन्त लिल मोमिनीन अबन रहीमन इज़ सारू अलैका इयालन
तुम मोमिनों के लिए मेहरबान बाप जैसे थे, जब वे तुम्हारे सहारे बन गए।
فَحَمَلْتَ أَثْقَالَ مَا عَنْهُ ضَعُفُوا
फ़हमल्त अस्क़ाल मा अनहु ज़अुफ़ू
तो तुमने वह बोझ उठाया जिसे उठाने की उनमें ताक़त न थी।
وَحَفِظْتَ مَا أَضَاعُوا وَرَعَيْتَ مَا أَهْمَلُوا
व हफ़िज़्त मा अज़ाऊ व रअय्त मा अह्मलू
और तुमने उसे संभाला जिसे उन्होंने खो दिया, और उसकी देखभाल की जिसे उन्होंने नज़रअंदाज़ किया।
وَشَمَّرْتَ إذْ اجْتَمَعُوا وَعَلَوْتَ إذْ هَلَعُوا
व शम्मर्त इज़ इज्तमऊ व अलौत इज़ हलअू
और जब वे इकट्ठा हुए तो तुम तैयार हो गए, और जब वे घबरा गए तो तुम आगे बढ़ गए।
وَصَبَرْتَ إذْ أَسْرَعُوا وَأَدْرَكْتَ أَوْتَارَ مَا طَلَبُوا
व सबरता इज़ अस्रऊ व अदरकता अवतार मा तलभू
और जब वे जल्दी कर गए, तुमने सब्र किया, और जिन बातों को वे चाहते थे, उन्हें पूरा कर दिखाया।
وَنَالُوا بِكَ مَا لَمْ يَحْتَسِبُوا
व नालू बिका मा लम यहतसिबू
और उन्होंने तुम्हारे ज़रिये वह हासिल किया जिसकी उन्हें उम्मीद भी न थी।
كُنْتَ عَلَى الْكَافِرِينَ عَذَاباً صَبّاً وَنَهْباً
कुन्ता अलल काफ़िरीन अज़ाबन सब्बन व नह्बन
तुम काफ़िरों पर लगातार और सख़्त अज़ाब बनकर टूटते रहे।
وَلِلْمُؤْمِنِينَ عَمَداً وَحِصْناً
व लिल मोमिनीन अमदन व हिस्नन
और मोमिनों के लिए सहारा और मज़बूत क़िला थे।
فُطِرْتَ واللهِ بِنَعْمَائِهَا وَفُزْتَ بِحَبَائِها
फ़ुतिरता वल्लाहि बिनअमाइहा व फ़ुज़्ता बिहबाइहा
ख़ुदा की क़सम, तुम उसकी नेमतों पर पैदा किए गए और उसी की नेमतों से कामयाब हुए।
وَأَحْرَزْتَ سَوَابِغَهَا وَذَهَبْتَ بِفَضَائِلِهَا
व अह्रज़्ता सवाबिग़हा व ज़हब्ता बि फ़ज़ाइलिहा
और तुमने उसकी तमाम खूबियों को समेट लिया और उसकी सारी फ़ज़ीलतें पा लीं।
لَمْ تَفْلُلْ حُجَّتُكَ وَلَمْ يَزِغْ قَلْبُكَ
लम तफ़लुल हुज्जतुक व लम यज़िग़ क़लबुक
न तुम्हारी दलील कमज़ोर पड़ी और न तुम्हारा दिल टेढ़ा हुआ।
وَلَمْ تَضْعُفْ بَصِيرَتُكَ وَلَمْ تَجْبُنْ نَفْسُكَ وَلَمْ تَخُنْ
व लम तज़उफ़ बसीरतुक व लम तजबुन नफ़्सुक व लम तख़ुन
न तुम्हारी समझ कमज़ोर हुई, न तुम्हारा हौसला टूटा, और न ही तुमने कभी ख़यानत की।
كُنْتَ كَالجَبَلِ لا تُحَرِّكُهُ العَوَاصِفُ
कुन्ता कल जबलि ला तुहर्रिकुहुल अवासिफ़
तुम पहाड़ की तरह मज़बूत थे, जिसे आँधियाँ भी हिला न सकीं।
وَكُنْتَ كَمَا قَالَ: أَمِنَ النَّاسُ فِي صُحْبَتِكَ وَذَاتِ يَدِكَ.
व कुन्ता कमा क़ाला अमिनन नासु फ़ी सुहबतिका व ज़ाति यदिका
और तुम वैसे ही थे जैसा कहा गया—लोग तुम्हारी संगत और तुम्हारे हाथों में अमानत से महफ़ूज़ रहते थे।
وَكُنْتَ كَمَا قَالَ: ضَعِيفاً فِي بَدَنِكَ قَوِيّاً فِي أَمْرِ اللهِ
व कुन्ता कमा क़ाला ज़ईफ़न फ़ी बदनिका क़विय्यन फ़ी अम्रिल्लाह
और जैसा कहा गया—जिस्म में सादा, मगर अल्लाह के हुक्म में बेहद मज़बूत थे।
مُتَوَاضِعاً فِي نَفْسِكَ عَظِيماً عِنْدَ اللهِ
मुतवाज़िअन फ़ी नफ़्सिका अज़ीमन इंदल्लाह
ख़ुद अपने आप में विनम्र, लेकिन अल्लाह के नज़दीक बहुत महान।
كَبِيراً في الأرْضِ جَلِيلاً عِنْدَ الْمُؤْمِنِينَ
कबीरन फ़िल अरज़ि जलीलन इंदल मोमिनीन
ज़मीन पर बड़े मक़ाम वाले और मोमिनों की नज़र में बहुत ऊँचे थे।
لَمْ يَكُنْ لأِحَدٍ فِيكَ مَهْمِزٌ وَلا لِقَائِلٍ فِيكَ مَغْمَزٌ
लम यकुन ली अहदिन फ़ीका महमिज़ुन व ला लिक़ाइलिन फ़ीका मग़मज़ुन
तुममें किसी को कोई ऐब न मिला, और न ही किसी को तुम पर उंगली उठाने का मौक़ा।
وَلا لأِحَدٍ فِيكَ مَطْمَعٌ وِلا لأحَدٍ عِنْدَكَ هَوَادَةٌ.
व ला ली अहदिन फ़ीका मतमअुन व ला ली अहदिन इंदका हवादा
न किसी को तुमसे लालच था और न तुम किसी के साथ नाइंसाफ़ नरमी करते थे।
الضَّعِيفُ الذَّلِيلُ عِنْدَكَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ حَتَّى تَأخُذَ لَهُ بِحَقِّهِ
अज़्ज़ईफ़ुज़ ज़लीलु इंदका क़विय्युन अज़ीज़ुन हत्ता तअख़ुज़ा लहू बिहक्क़िही
कमज़ोर और दबा हुआ इंसान तुम्हारे पास ताक़तवर और इज़्ज़त वाला होता था, जब तक तुम उसका हक़ दिला न दो।
وَالْقَوِيُّ العَزِيزُ عِنْدَكَ ضَعِيفٌ ذَلِيلٌ حَتَّى تَأخُذَ مِنْهُ الْحَقَّ
वल क़विय्यु लअज़ीज़ु इंदका ज़ईफ़ुन ज़लीलुन हत्ता तअख़ुज़ा मिन्हुल हक़्क़
और ताक़तवर और इज़्ज़त वाला भी तुम्हारे पास कमज़ोर और दबा हुआ होता था, जब तक तुम उससे दूसरों का हक़ वापस न ले लेते।
وَالْقَرِيبُ وَالْبَعِيدُ عِنْدَكَ فِي ذَلِكَ سَوَاءٌ.
वल क़रीबु वल बईदु इंदका फ़ी ज़ालिका सवाअन
तुम्हारी नज़र में इसमें क़रीबी और दूर वाला सब बराबर थे।
شَأْنُكَ الْحَقُّ وَالصِّدْقُ وَالرِّفْقُ
शानुका लहक़्क़ु वस्सिद्क़ु वर्रिफ़्क़
तुम्हारी पहचान हक़, सच्चाई और नरमी थी।
وَقَوْلُكَ حُكْمٌ وَحَتْمٌ
व क़ौलुका हुक्मुन व हत्मुन
तुम्हारा हर क़ौल फ़ैसला और आख़िरी हुक्म होता था।
وَأَمْرُكَ حِلْمٌ وَحَزْمٌ
व अम्रुका हिल्मुन व हज़्मुन
और तुम्हारा हर अमल सब्र और मज़बूती से भरा होता था।
وَرَأْيُكَ عِلْمٌ وَعَزْمٌ فِي مَا فَعَلْتَ
व रअयुका इल्मुन व अज़्मुन फ़ी मा फ़अल्ता
और जो कुछ तुमने किया, वह इल्म और पुख़्ता इरादे से किया।
وَقَدْ نُهِجَ بِكَ السَّبِيلُ وَسُهِّلَ بِكَ الْعَسِيرُ
व क़द नुहिजा बिका स्सबी़लु व सुह्हिला बिका लअसीरु
तुम्हारे ज़रिये सही रास्ता साफ़ हुआ और मुश्किलें आसान बना दी गईं।
وَأُطْفِئَتِ النِّيرَانُ وَاعْتَدَلَ بِكَ الدِّينُ وَقَوِيَ بِكَ الإسْلاَمُ وَالمُؤمِنُونَ
व उत्फ़िअतिन्नीरानु वअतदला बिका द्दीनु व क़विया बिका लइस्लामु वल मोमिनून
तुम्हारे कारण फ़ितने बुझ गए, दीन सीधा हो गया, और इस्लाम व मोमिन मज़बूत हो गए।
وَسَبَقْتَ سَبْقاً بَعِيداً وَأتْعَبْتَ مَنْ بَعْدَكَ تَعَباً شَدِيداً
व सबक़्ता सब्क़न बईदन व अतअब्ता मन बादका तअबन शदीदन
तुम बहुत आगे निकल गए और अपने बाद आने वालों को भारी मशक्क़त में डाल दिया।
فَجَلَلْتَ عَنِ الْبُكَاءِ وَعَظُمَتْ رَزِيَّتُكَ فِي السَّمَاءِ
फ़जलल्ता अनिल बुकाइ व अज़ुमत रज़ीय्यतुक फ़िस्समाअ
तुम रोए जाने से भी बुलंद हो, और तुम्हारी जुदाई का सदमा आसमान वालों के लिए भी बहुत बड़ा था।
وَهَدَّتْ مُصِيبَتُكَ الأَنامُ
व हद्दत मुसीबतुकल अनाम
तुम्हारी मुसिबत ने तमाम लोगों को तोड़ कर रख दिया।
فَإنّا للهِ وَإنّا إلَيهِ رَاجِعُونَ
फ़इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटने वाले हैं।
رَضِينَا عَنِ اللهِ قَضَائَهُ وسَلَّمْنا للهِ أمْرَهُ
रज़ीना अनिल्लाहि क़ज़ाअहू व सल्लमना लिल्लाहि अम्रहू
हम अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी हैं और उसी के हुक्म के आगे सर झुकाते हैं।
فَواللهِ لَمْ يُصَبِ المُسْلِمونَ بِمِثْلِك أبَداً.
फ़वल्लाहि लम युसबिल मुसलिमून बिमिस्लिका अबदन
अल्लाह की क़सम, मुसलमान कभी तुम जैसी हस्ती से महरूम नहीं हुए।
كُنْتَ لِلمُؤمِنِينَ كَهْفاً وَحِصْناً وَقُنَّةً رَاسِياً
कुन्ता लिल्मोमिनीन कहफ़न व हिस्नन व क़ुन्नतन रासिया
तुम मोमिनों के लिए पनाह, क़िला और अडिग चोटी की तरह थे।
وَعَلى الكَافِرينَ غِلْظَةً وَغَيْظاً
व अलल काफ़िरीन ग़िलज़तन व ग़ैज़न
और काफ़िरों पर सख़्ती और जलन बनकर छाए रहते थे।
فَألْحَقَكَ اللهُ بِنَبِيِّهِ وَلاَ حَرَمَنا أجْرَكَ ولا أَضَلَّنا بَعْدَكَ.
फ़अल्हक़कल्लाहु बिनबिय्यिही वला हरमना अज्रका वला अज़ल्लना बादक
अल्लाह तुम्हें अपने नबी से मिला दे, हमें तुम्हारे ग़म के सवाब से महरूम न करे, और तुम्हारे बाद हमें गुमराह न होने दे।