शैख़ अल-तूसी “मिस्बाह अल-मुतहज्जिद” में बयान करते हैं:
इमाम हुसैन इब्न अली (अलैहिस्सलाम)
तीसरे शाबान को पैदा हुए। अबुल-क़ासिम इब्न अला अल-हमदानी,
जो इमाम हसन अल-अस्करी (अलैहिस्सलाम) के नायब थे,
उन्हें एक तहरीर मिली जिसमें बताया गया कि हमारे मौला
इमाम हुसैन इब्न अली (अलैहिस्सलाम) तीसरे शाबान को पैदा हुए।
इसलिए इस दिन रोज़ा रखना और नीचे दी गई दुआ पढ़ना मुस्तहब है:
जैसे तूने हुसैन को उनके नाना मुहम्मद को अता फ़रमाया,
وَعَاذَ فُطْرُسُ بِمَهْدِهِ
व अाज़ा फ़ुतरुसु बि-मह्दिही
और जैसे फ़ुतरुस फ़रिश्ते ने उनके झूले की पनाह ली,
فَنَحْنُ عَائِذُونَ بِقَبْرِهِ مِنْ بَعْدِهِ
फ़नह्नु आइज़ूना बि-क़ब्रिही मिन बअ्दिही
वैसे ही हम उनकी शहादत के बाद उनकी क़ब्र की पनाह चाहते हैं,
نَشْهَدُ تُرْبَتَهُ وَنَنْتَظِرُ أَوْبَتَهُ
नश्हदु तुरबतहू व नन्तज़िरु औबतहू
हम उनकी मिट्टी की गवाही देते हैं और उनके लौटने का इंतज़ार करते हैं।
آمِينَ رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ
आमीन रब्बल-आलमीन
ऐ रब्बुल आलमीन! हमारी दुआ क़ुबूल फ़रमा।
उसके बाद तुम दुआ-ए-हुसैन पढ़ सकते हो, जो वह आख़िरी दुआ है जो इमाम हुसैन ने यौमे-आशूरा (दस मुहर्रम) के दिन उस वक़्त पढ़ी जब दुश्मनों ने उन्हें बड़ी तादाद में घेर लिया था:
इब्ने अय्याश ने हुसैन इब्न अली इब्न सुफ़यान अल-बाज़ुफ़ी से रिवायत की है कि उन्होंने इमाम जाफ़र अस-सादिक़ (अलैहिस्सलाम) को तीसरे शाबान, इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की विलादत के दिन, यह दुआ पढ़ते हुए सुना।
اَللَّهُمَّ أَنْتَ مُتَعَالِي ٱلْمَكَانِ
अल्लाहुम्मा अन्त मुता’आली अल-मकान
ऐ अल्लाह! तू बहुत बुलंद मक़ाम वाला है,
عَظِيمُ ٱلْجَبَرُوتِ
अज़ीमु अल-जबरूत
बहुत अज़ीम क़ुदरत वाला है,
شَدِيدُ ٱلْمِحَالِ
शदीदु अल-मिहाल
सख़्त ताक़त वाला है,
غَنِيٌّ عَنِ ٱلْخَلاَئِقِ
ग़निय्युन ‘अनिल-ख़लाइक़
मख़लूक़ से बे-नियाज़ है,
عَرِيضُ ٱلْكِبْرِيَاءِ
‘अरीदु अल-किब्रियाइ
बड़ी शान-ओ-अज़मत वाला है,
قَادِرٌ عَلَىٰ مَا تَشَاءُ
क़ादिरुन ‘अला मा तशा’ऊ
हर उस चीज़ पर क़ुदरत रखता है जो तू चाहता है,
قَرِيبُ ٱلرَّحْمَةِ
क़रीबु अर-रहमत
रहमत में बहुत क़रीब है,
صَادِقُ ٱلْوَعْدِ
सादिक़ु अल-व‘अद
वादा पूरा करने वाला है,
سَابِغُ ٱلنِّعْمَةِ
साबिग़ु अन-नि‘मत
नेमतों से भरपूर है,
حَسَنُ ٱلْبَلاَءِ
हसनु अल-बलाइ
आजमाइश में भी मेहरबान है,
قَرِيبٌ إِذَا دُعِيتَ
क़रीबुन इज़ा दु‘ईता
जब पुकारा जाए तो बहुत क़रीब होता है,
مُحِيطٌ بِمَا خَلَقْتَ
मुहीतुन बिमा ख़लक़्ता
अपनी सारी मख़लूक़ को घेरने वाला है,
قَابِلُ ٱلتَّوْبَةِ لِمَنْ تَابَ إِلَيْكَ
क़ाबिलु अत-तौबा लिमन ताबा इलैक
तेरी तरफ़ तौबा करने वालों की तौबा क़ुबूल करने वाला है,
قَادِرٌ عَلَىٰ مَا أَرَدْتَ
क़ादिरुन ‘अला मा अरद्ता
जो तू चाहता है उस पर पूरी क़ुदरत रखता है,
وَمُدْرِكٌ مَا طَلَبْتَ
व मुद्रिकुन मा तलब्ता
जो तू फ़ैसला करता है उसे पूरा करने वाला है,
وَشَكُورٌ إِذَا شُكِرْتَ
व शकूरुन इज़ा शुकिरता
शुक्र करने वालों को क़दर देने वाला है,
وَذَكُورٌ إِذَا ذُكِرْتَ
व ज़कूरुन इज़ा ज़ुकिरता
और ज़िक्र करने वालों को याद रखने वाला है।
أَدْعُوكَ مُحْتَاجاً
अद‘ऊका मुहताजन
मैं तुझे पुकारता हूँ, क्योंकि मैं तेरा मोहताज हूँ,
وَأَرْغَبُ إِلَيْكَ فَقِيراً
व अरग़बु इलैक फ़क़ीरन
मैं तेरी तरफ़ झुकता हूँ, क्योंकि मैं फ़क़ीर हूँ,
وَأَفْزَعُ إِلَيْكَ خَائِفاً
व अफ़ज़‘उ इलैक ख़ाइफ़न
मैं डरते हुए तेरी पनाह चाहता हूँ,
وَأَبْكِي إِلَيْكَ مَكْرُوباً
व अबकी इलैक मक्रूबन
मैं ग़मज़दा होकर तेरे सामने रोता हूँ,
وَأَسْتَعِينُ بِكَ ضَعِيفاً
व अस्त‘ईनु बिका ज़ईफ़न
मैं कमज़ोर होकर तुझसे मदद चाहता हूँ,
وَأَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ كَافِياً
व अतवक्कलु ‘अलैक काफ़ियन
और मैं तुझ पर ही भरोसा करता हूँ, क्योंकि तू ही काफ़ी है।
أُحْكُمْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِٱلْحَقِّ
उह्कुम बैनना व बैन क़ौमिना बिल-हक़्क़
हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा,
فَإِنَّهُمْ غَرُّونَا وَخَدَعُونَا
फ़इन्नहुम ग़र्रूना व ख़दा‘ऊना
क्योंकि उन्होंने हमें धोखा दिया और फ़रेब किया,
وَخَذَلُونَا وَغَدَرُوٱ بِنَا وَقَتَلُونَا
व ख़ज़लूना व ग़दरू बिन्ना व क़तलूना
हमें बे-यार-ओ-मददगार छोड़ा, हमारे साथ बेवफ़ाई की और हमें क़त्ल किया,