3 शाबान की दुआ
इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की विलादत


शैख़ अल-तूसी “मिस्बाह अल-मुतहज्जिद” में बयान करते हैं: इमाम हुसैन इब्न अली (अलैहिस्सलाम) तीसरे शाबान को पैदा हुए। अबुल-क़ासिम इब्न अला अल-हमदानी, जो इमाम हसन अल-अस्करी (अलैहिस्सलाम) के नायब थे, उन्हें एक तहरीर मिली जिसमें बताया गया कि हमारे मौला इमाम हुसैन इब्न अली (अलैहिस्सलाम) तीसरे शाबान को पैदा हुए। इसलिए इस दिन रोज़ा रखना और नीचे दी गई दुआ पढ़ना मुस्तहब है:


اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِحَقِّ ٱلْمَوْلُودِ فِي هٰذَا ٱلْيَوْمِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका बिहक़्क़िल मौलूदि फी हाज़ल यौमि
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस दिन पैदा होने वाले के हक़ के वास्ते सवाल करता हूँ,

ٱلْمَوْعُودِ بِشَهَادَتِهِ قَبْلَ ٱسْتِهْلالِهِ وَوِلادَتِهِ
अल-मौऊदि बिशहादतिही क़बला इस्तिहलालिही व विलादतिही
जिसकी शहादत का वादा उसकी ज़िंदगी और पैदाइश से पहले कर दिया गया,

بَكَتْهُ ٱلسَّمَاءُ وَمَنْ فِيهَا
बकतहुस्समाऊ व मन् फीहा
जिस पर आसमान और उसमें रहने वालों ने गिर्या किया,

وَٱلأَرْضُ وَمَنْ عَلَيْهَا
वल-अरज़ु व मन् अलैहा
और ज़मीन ने और जो उस पर रहते हैं उन्होंने भी,

وَلَمَّا يَطَأْ لابَتَيْهَا
व लम्मा यता’ लाबतैहा
उससे पहले कि उसके कदम ज़मीन पर पड़े,

قَتِيلِ ٱلْعَبْرَةِ
क़तीलिल-अबरति
आँसुओं में डूबा हुआ शहीद,

وَسَيِّدِ ٱلأُسْرَةِ
व सैय्यिदिल-उस्रति
और ख़ानदान-ए-नबूवत के सरदार,

ٱلْمَمْدُودِ بِٱلنُّصْرَةِ يَوْمَ ٱلْكَرَّةِ
अल-मम्दूदि बिन्नुस्रति यौमल-क़र्रति
जिसे क़यामत के दिन मदद और नुसरत अता की जाएगी,

ٱلْمُعَوِّضِ مِنْ قَتْلِهِ أَنَّ ٱلأَئِمَّةَ مِنْ نَسْلِهِ
अल-मुअव्विदि मिन क़त्लिही अन्नल-अइम्मता मिन नस्लिही
जिसकी शहादत के बदले उसकी नस्ल से इमामों को क़ायम किया गया,

وَٱلشِّفَاءَ فِي تُرْبَتِهِ
वश्शिफ़ा-अ फ़ी तुरबतिही
और जिसकी क़ब्र की मिट्टी में शिफ़ा रखी गई,

وَٱلْفَوْزَ مَعَهُ فِي أَوْبَتِهِ
वल-फ़ौज़ा मअहू फ़ी औबतिही
और उसके साथ लौटने में कामयाबी रखी गई,

وَٱلأَوْصِيَاءَ مِنْ عِتْرَتِهِ
वल-अवसिया-अ मिन इत्रतिही
और उसकी औलाद में से औसिया मुक़र्रर किए गए,

بَعْدَ قَائِمِهِمْ وَغَيْبَتِهِ
बअदा क़ाइमिहिम व गैबतिही
उनके क़ायम के ज़ुहूर और ग़ैबत के बाद,

حَتَّىٰ يُدْرِكُوٱ ٱلأَوْتَارَ
हत्ता युद्रिकुल-अवतार
ताकि वह बदला लें,

وَيَثْأَرُوٱ ٱلثَّارَ
व यथ्अरुस्सार
और क़िसास पूरा करें,

وَيُرْضُوٱ ٱلْجَبَّارَ
व युर्दुल-जब्बार
और अल्लाह जाबिर को राज़ी करें,

وَيَكُونُوٱ خَيْرَ أَنْصَارٍ
व यकूनू ख़ैर अंसारिन
और बेहतरीन मददगार साबित हों।

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ مَعَ ٱخْتِلافِ ٱللَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ
सल्लल्लाहु अलैहिम मअ अख़्तिलाफ़िल्लैलि वन्नहार
रात और दिन के बदलते रहने तक अल्लाह की रहमत और सलवात उन पर होती रहे।

اَللَّهُمَّ فَبِحَقِّهِمْ إِلَيْكَ أَتَوَسَّلُ
अल्लाहुम्मा फ़बिहक़्क़िहिम् इलैका अतवस्सलु
ऐ अल्लाह! मैं उनके हक़ के वास्ते तेरी बारगाह में वसीला पेश करता हूँ,

وَأَسْأَلُ سُؤَالَ مُقْتَرِفٍ مُعْتَرِفٍ
व अस्अलु सुआला मुक़्तरिफ़िन मुअतरिफ़िन
और उस गुनाहगार की तरह सवाल करता हूँ जो अपने गुनाह का इकरार करता है,

مُسِيءٍ إِلَىٰ نَفْسِهِ
मुसिईन इला नफ़्सिही
जिसने अपने ही नफ़्स पर ज़ुल्म किया,

مِمَّا فَرَّطَ فِي يَوْمِهِ وَأَمْسِهِ
मिम्मा फ़र्रता फी यौमिही व अम्सिही
अपने आज और बीते हुए कल की कोताहियों की वजह से।

يَسْأَلُكَ ٱلْعِصْمَةَ إِلَىٰ مَحَلِّ رَمْسِهِ
यस्अलुका अल्-इस्मता इला महल्लि रम्सिही
वह तुझसे क़ब्र तक अपनी हिफ़ाज़त की दुआ माँगता है।

اَللَّهُمَّ فَصَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعِتْرَتِهِ
अल्लाहुम्मा फ़सल्लि अला मुहम्मदिं व इत्रतिही
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनकी इत्रत पर रहमत नाज़िल फ़रमा,

وَٱحْشُرْنَا فِي زُمْرَتِهِ
वह्शुरना फी ज़ुम्रतिही
और हमें क़यामत के दिन उन्हीं के गिरोह में शामिल फ़रमा,

وَبَوِّئْنَا مَعَهُ دَارَ ٱلْكَرَامَةِ
व बव्विअना मअहू दारल-करामति
और हमें उनके साथ इज़्ज़त के घर में ठिकाना अता फ़रमा,

وَمَحَلِّ ٱلإِقَامَةِ
व महल्लिल-इक़ामति
और हमेशा रहने की जगह में,

اَللَّهُمَّ وَكَمَا أَكْرَمْتَنَا بِمَعْرِفَتِهِ فَأَكْرِمْنَا بِزُلْفَتِهِ
अल्लाहुम्मा व कमा अकरम्तना बिमा‘रिफ़तिही फ़अक्रिमना बिज़ुल्फ़तिही
ऐ अल्लाह! जैसे तूने हमें उनकी पहचान की नेमत अता की, वैसे ही हमें उनकी क़ुर्बत की इज़्ज़त भी अता फ़रमा,

وَٱرْزُقْنَا مُرَافَقَتَهُ وَسَابِقَتَهُ
वरज़ुक़ना मुराफ़क़तहू व साबिक़तहू
और हमें उनकी साथ-संगत और उनके क़रीब दर्जा नसीब फ़रमा,

وَٱجْعَلْنَا مِمَّنْ يُسَلِّمُ لأَمْرِهِ
वज्अलना मिम्मन युसल्लिमु लिअम्रिही
और हमें उन लोगों में कर दे जो पूरी तरह उनके हुक्म के आगे सर झुकाते हैं,

وَيُكْثِرُ ٱلصَّلاةَ عَلَيْهِ عِنْدَ ذِكْرِهِ
व युक्सिरुस्सलाता अलैहि इन्दा ज़िक्रिही
और जब भी उनका ज़िक्र हो, उन पर बहुत ज़्यादा दुरूद भेजते हैं,

وَعَلَىٰ جَمِيعِ أَوْصِيَائِهِ وَأَهْلِ أَصْفِيَائِهِ
व अला जमीइ अवसियाइही व अह्लि अस्फ़ियाइही
और उनके तमाम औसिया और चुने हुए बंदों पर भी,

ٱلْمَمْدُودِينَ مِنْكَ بِٱلْعَدَدِ ٱلإِثْنَيْ عَشَرَ
अल-मम्दूदीन मिंका बिल-अददिल-इस्नै अशर
जिन्हें तूने बारह की तादाद में मुक़र्रर फ़रमाया,

ٱلنُّجُومِ ٱلزُّهَرِ
अन्नुजूमिज्ज़ुहर
जो रौशन सितारों की तरह हैं,

وَٱلْحُجَجِ عَلَىٰ جَمِيعِ ٱلْبَشَرِ
वल-हुजजि अला जमीइ-लबशर
और तमाम इंसानों पर तेरी हुज्जत हैं।

اَللَّهُمَّ وَهَبْ لَنَا فِي هٰذَا ٱلْيَوْمِ خَيْرَ مَوْهِبَةٍ
अल्लाहुम्मा वहब लना फी हाज़ल यौमि ख़ैरा मौहिबतिन
ऐ अल्लाह! आज के दिन हमें बेहतरीन अता फ़रमा,

وَأَنْجِحْ لَنَا فِيهِ كُلِّ طَلِبَةٍ
व अन्जिह लना फीही कुल्लि तलबतिन
और हमारी हर दुआ को क़ुबूल फ़रमा,

كَمَا وَهَبْتَ ٱلْحُسَيْنَ لِمُحَمَّدٍ جَدِّهِ
कमा वहब्तल-हुसैना लि-मुहम्मदिं जद्दिही
जैसे तूने हुसैन को उनके नाना मुहम्मद को अता फ़रमाया,

وَعَاذَ فُطْرُسُ بِمَهْدِهِ
व अाज़ा फ़ुतरुसु बि-मह्दिही
और जैसे फ़ुतरुस फ़रिश्ते ने उनके झूले की पनाह ली,

فَنَحْنُ عَائِذُونَ بِقَبْرِهِ مِنْ بَعْدِهِ
फ़नह्नु आइज़ूना बि-क़ब्रिही मिन बअ्दिही
वैसे ही हम उनकी शहादत के बाद उनकी क़ब्र की पनाह चाहते हैं,

نَشْهَدُ تُرْبَتَهُ وَنَنْتَظِرُ أَوْبَتَهُ
नश्हदु तुरबतहू व नन्तज़िरु औबतहू
हम उनकी मिट्टी की गवाही देते हैं और उनके लौटने का इंतज़ार करते हैं।

آمِينَ رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ
आमीन रब्बल-आलमीन
ऐ रब्बुल आलमीन! हमारी दुआ क़ुबूल फ़रमा।


उसके बाद तुम दुआ-ए-हुसैन पढ़ सकते हो, जो वह आख़िरी दुआ है जो इमाम हुसैन ने यौमे-आशूरा (दस मुहर्रम) के दिन उस वक़्त पढ़ी जब दुश्मनों ने उन्हें बड़ी तादाद में घेर लिया था:
इब्ने अय्याश ने हुसैन इब्न अली इब्न सुफ़यान अल-बाज़ुफ़ी से रिवायत की है कि उन्होंने इमाम जाफ़र अस-सादिक़ (अलैहिस्सलाम) को तीसरे शाबान, इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की विलादत के दिन, यह दुआ पढ़ते हुए सुना।


اَللَّهُمَّ أَنْتَ مُتَعَالِي ٱلْمَكَانِ
अल्लाहुम्मा अन्त मुता’आली अल-मकान
ऐ अल्लाह! तू बहुत बुलंद मक़ाम वाला है,

عَظِيمُ ٱلْجَبَرُوتِ
अज़ीमु अल-जबरूत
बहुत अज़ीम क़ुदरत वाला है,

شَدِيدُ ٱلْمِحَالِ
शदीदु अल-मिहाल
सख़्त ताक़त वाला है,

غَنِيٌّ عَنِ ٱلْخَلاَئِقِ
ग़निय्युन ‘अनिल-ख़लाइक़
मख़लूक़ से बे-नियाज़ है,

عَرِيضُ ٱلْكِبْرِيَاءِ
‘अरीदु अल-किब्रियाइ
बड़ी शान-ओ-अज़मत वाला है,

قَادِرٌ عَلَىٰ مَا تَشَاءُ
क़ादिरुन ‘अला मा तशा’ऊ
हर उस चीज़ पर क़ुदरत रखता है जो तू चाहता है,

قَرِيبُ ٱلرَّحْمَةِ
क़रीबु अर-रहमत
रहमत में बहुत क़रीब है,

صَادِقُ ٱلْوَعْدِ
सादिक़ु अल-व‘अद
वादा पूरा करने वाला है,

سَابِغُ ٱلنِّعْمَةِ
साबिग़ु अन-नि‘मत
नेमतों से भरपूर है,

حَسَنُ ٱلْبَلاَءِ
हसनु अल-बलाइ
आजमाइश में भी मेहरबान है,

قَرِيبٌ إِذَا دُعِيتَ
क़रीबुन इज़ा दु‘ईता
जब पुकारा जाए तो बहुत क़रीब होता है,

مُحِيطٌ بِمَا خَلَقْتَ
मुहीतुन बिमा ख़लक़्ता
अपनी सारी मख़लूक़ को घेरने वाला है,

قَابِلُ ٱلتَّوْبَةِ لِمَنْ تَابَ إِلَيْكَ
क़ाबिलु अत-तौबा लिमन ताबा इलैक
तेरी तरफ़ तौबा करने वालों की तौबा क़ुबूल करने वाला है,

قَادِرٌ عَلَىٰ مَا أَرَدْتَ
क़ादिरुन ‘अला मा अरद्ता
जो तू चाहता है उस पर पूरी क़ुदरत रखता है,

وَمُدْرِكٌ مَا طَلَبْتَ
व मुद्रिकुन मा तलब्ता
जो तू फ़ैसला करता है उसे पूरा करने वाला है,

وَشَكُورٌ إِذَا شُكِرْتَ
व शकूरुन इज़ा शुकिरता
शुक्र करने वालों को क़दर देने वाला है,

وَذَكُورٌ إِذَا ذُكِرْتَ
व ज़कूरुन इज़ा ज़ुकिरता
और ज़िक्र करने वालों को याद रखने वाला है।

أَدْعُوكَ مُحْتَاجاً
अद‘ऊका मुहताजन
मैं तुझे पुकारता हूँ, क्योंकि मैं तेरा मोहताज हूँ,

وَأَرْغَبُ إِلَيْكَ فَقِيراً
व अरग़बु इलैक फ़क़ीरन
मैं तेरी तरफ़ झुकता हूँ, क्योंकि मैं फ़क़ीर हूँ,

وَأَفْزَعُ إِلَيْكَ خَائِفاً
व अफ़ज़‘उ इलैक ख़ाइफ़न
मैं डरते हुए तेरी पनाह चाहता हूँ,

وَأَبْكِي إِلَيْكَ مَكْرُوباً
व अबकी इलैक मक्रूबन
मैं ग़मज़दा होकर तेरे सामने रोता हूँ,

وَأَسْتَعِينُ بِكَ ضَعِيفاً
व अस्त‘ईनु बिका ज़ईफ़न
मैं कमज़ोर होकर तुझसे मदद चाहता हूँ,

وَأَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ كَافِياً
व अतवक्कलु ‘अलैक काफ़ियन
और मैं तुझ पर ही भरोसा करता हूँ, क्योंकि तू ही काफ़ी है।

أُحْكُمْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِٱلْحَقِّ
उह्कुम बैनना व बैन क़ौमिना बिल-हक़्क़
हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा,

فَإِنَّهُمْ غَرُّونَا وَخَدَعُونَا
फ़इन्नहुम ग़र्रूना व ख़दा‘ऊना
क्योंकि उन्होंने हमें धोखा दिया और फ़रेब किया,

وَخَذَلُونَا وَغَدَرُوٱ بِنَا وَقَتَلُونَا
व ख़ज़लूना व ग़दरू बिन्ना व क़तलूना
हमें बे-यार-ओ-मददगार छोड़ा, हमारे साथ बेवफ़ाई की और हमें क़त्ल किया,

وَنَحْنُ عِتْرَةُ نَبِيِّكَ
व नह्नु ‘इत्रतु नबिय्यिका
हालाँकि हम तेरे नबी की इत्रत हैं,

وَوَلَدُ حَبِيبِكَ
व वलदु हबीबिका
और तेरे महबूब की औलाद हैं,

مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِٱللَّهِ
मुहम्मद बिन ‘अब्दिल्लाह
यानी मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह,

ٱلَّذِي ٱصْطَفَيْتَهُ بِٱلرِّسَالَةِ
अल्लज़ी इस्तफ़ैतहू बिर्रिसालत
जिन्हें तूने रिसालत के लिए चुन लिया,

وَٱئْتَمَنْتَهُ عَلَىٰ وَحْيِكَ
व इतमनतहू ‘अला वह्यिका
और अपनी वह़ी की अमानत उनके सुपुर्द की,

فَٱجْعَلْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا فَرَجاً وَمَخْرَجاً
फ़ज‘अल लना मिन अम्रिना फ़रजन् व मख़रजन
तो हमारे लिए हमारे मामले में राहत और निकलने का रास्ता बना दे,

بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ
बिरहमतिका या अरहमा अर-राहिमीन
अपनी रहमत से, ऐ सब रहम करने वालों में सबसे ज़्यादा रहम करने वाले!