सहिफ़ा सज्जादिया दुआ 43
सहिफ़ा सज्जादिया दुआ 43 — जब नया चाँद देखा जाए
د دُعَاؤُهُ إِذَا نَظَرَ إِلَى الْهِلَالِ
इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.), इमाम हुसैन इब्न अली (अ.) के बेटे की मुनाजात — दुआ 43, जब नया हिलाल (चाँद) देखा जाए

أَيُّهَا ٱلْخَلْقُ ٱلْمُطِيعُ
अय्युहल ख़ल्क़ुल मुतीउ
ऐ फ़रमाबरदार मख़लूक़,

ٱلدَّائِبُ ٱلسَّرِيعُ
अद्दाइबुस्सरीउ
जो लगातार और तेज़ी से चलने वाला है,

ٱلْمُتَرَدِّدُ فِي مَنَازِلِ ٱلتَّقْدِيرِ
अल मुतरद्दिदु फ़ी मनाज़िलित्तक़दीर
जो तक़दीर के मुक़ामात में आता-जाता रहता है,

ٱلْمُتَصَرِّفُ فِي فَلَكِ ٱلتَّدْبِيرِ
अल मुतसर्रिफ़ु फ़ी फ़लकित्तदबीर
जो तदबीर के दायरे में घूमता रहता है,

آمَنْتُ بِمَنْ نَوَّرَ بِكَ ٱلظُّلَمَ
आमंतु बिमन नुव्वरा बिकल ज़ुलमा
मैं उस ज़ात पर ईमान लाया जिसने तेरे ज़रिए अंधेरों को रौशन किया,

وَأَوْضَحَ بِكَ ٱلْبُهَمَ
व औज़ह बिकल बुहमा
और तेरे ज़रिए घने सायों को साफ़ कर दिया,

وَجَعَلَكَ آيَةً مِنْ آيَاتِ مُلْكِهِ
व जअलक आयतम् मिन आयाति मुल्किही
और तुझे अपनी बादशाहत की निशानियों में से एक निशानी बनाया,

وَعَلاَمَةً مِنْ عَلاَمَاتِ سُلْطَانِهِ
व अलामतम् मिन अलामाति सुल्तानिही
और अपनी हुकूमत की पहचान की अलामत बनाया,

فَحَدَّ بِكَ ٱلزَّمَانَ
फ़हद्दा बिकल ज़माना
फिर तेरे ज़रिए उसने वक़्त को मुक़र्रर किया,

وَٱمْتَهَنَكَ بِٱلْكَمَالِ وَٱلنُّقْصَانِ
व इम्तहनक बिल कमालि वन्नुक़सान
और बढ़ोतरी और कमी से तुझे आज़माया,

وَٱلطُّلُوعِ وَٱلأُفُولِ
वत्तुलूइ वल उफ़ूल
और उगने व डूबने से,

وَٱلإِنَارَةِ وَٱلْكُسُوفِ
वल इनारति वल कुसूफ़
और रौशनी व ग्रहण से,

فِي كُلِّ ذٰلِكَ أَنْتَ لَهُ مُطِيعٌ
फ़ी कुल्लि ज़ालिक अंता लहू मुतीउ
इन सब में तू उसी का फ़रमाबरदार है,

وَإِلَىٰ إِرَادَتِهِ سَرِيعٌ
व इला इरादतिही सरीउ
और उसकी मर्ज़ी की तरफ़ फौरन चल पड़ता है,

سُبْحَانَهُ مَا أَعْجَبَ مَا دَبَّرَ مِنْ أَمْرِكَ
सुब्हानहू मा अअजबहू मा दब्बरा मिन अम्रिक
वह पाक है! कितना हैरतअंगेज़ है जो उसने तेरे मामले में तय किया,

وَأَلْطَفَ مَا صَنَعَ فِي شَأْنِكَ
व अल्तफ़ा मा सनाʿ फ़ी शानिक
और कितना नफ़ीस है जो उसने तेरे हाल में किया,

جَعَلَكَ مِفْتَاحَ شَهْرٍ حَادِثٍ لأَمْرٍ حَادِثٍ
जअलक मिफ़ताहा शह्रिन हादिसिन् लिअम्रिन हादिस्
उसने तुझे नए हाल के लिए नए महीने की कुंजी बनाया,

فَأَسْأَلُ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكَ
फ़असअलुल्लाह रब्बी व रब्बक
तो मैं अल्लाह से सवाल करता हूँ, जो मेरा भी रब है और तेरा भी,

وَخَالِقِي وَخَالِقَكَ
व ख़ालिक़ी व ख़ालिक़क
मेरा पैदा करने वाला और तेरा पैदा करने वाला,

وَمُقَدِّرِي وَمُقَدِّرَكَ
व मुक़द्दिरी व मुक़द्दिरक
मेरा तक़दीर बनाने वाला और तेरा तक़दीर बनाने वाला,

وَمُصَوِّرِي وَمُصَوِّرَكَ
व मुसव्विरी व मुसव्विरक
मुझे सूरत देने वाला और तुझे सूरत देने वाला,

أَنْ يُصَلِّيَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
अन युसल्लिया अला मुहम्मदिं व आले मुहम्मद
कि वह मुहम्मद और उनकी आल पर रहमत भेजे,

وَأَنْ يَجْعَلَكَ هِلاَلَ بَرَكَةٍ لاَ تَمْحَقُهَا ٱلأَيَّامُ
व अन यजअलक हिलाला बरकातिन ला तम्हक़ुहल अय्याम
और तुझे बरकत का ऐसा हिलाल बनाए जिसे दिन मिटा न सकें,

وَطَهَارَةٍ لاَ تُدَنِّسُهَا ٱلآثَامُ
व तहारतिन ला तुदन्निसुहल आसाम
और पाकीज़गी का ऐसा हिलाल जिसे गुनाह गंदा न कर सकें,

هِلاَلَ أَمْنٍ مِنَ ٱلآفَاتِ
हिलाला अम्निन मिनल आफ़ात
आफ़तों से अमन का हिलाल,

وَسَلاَمَةٍ مِنَ ٱلسَّيِّئَاتِ
व सलामतिन मिनस्सय्यिआत
और बुराइयों से सलामती का हिलाल,

هِلاَلَ سَعْدٍ لاَ نَحْسَ فِيهِ
हिलाला सअदिन् ला नह्सा फीह
ख़ुशक़िस्मती का ऐसा हिलाल जिसमें बदक़िस्मती न हो,

وَيُمْنٍ لاَ نَكَدَ مَعَهُ
व युम्निन ला नकदा मअहू
और भलाई व बरकत का ऐसा हिलाल जिसके साथ कोई तंगी न हो

وَيُسْرٍ لاَ يُمَازِجُهُ عُسْرٌ
व युस्रिन ला युमाज़िज़ुहू उस्र
और ऐसी आसानी जो किसी मुश्किल से मिली-जुली न हो,

وَخيْرٍ لاَ يَشُوبُهُ شَرٍّ
व ख़ैरिन ला यशूबुहू शर्र
और ऐसी भलाई जिसमें कोई बुराई शामिल न हो,

هِلالَ أَمْنٍ وَإِيـمَانٍ
हिलाला अम्निन व ईमानिन
अमन और ईमान का हिलाल,

وَنِعْمَةٍ وَإِحْسَانٍ
व नि'मतिन व इहसानिन
नेअमत और एहसान का,

وَسَلاَمَةٍ وَإِسْلاَمٍ
व सलामतिन व इस्लामिन
सलामती और इताअत का,

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिं व आले मुहम्मद
ऐ अल्लाह, मुहम्मद और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा,

وَٱجْعَلْنَا مِنْ أَرْضَىٰ مَنْ طَلَعَ عَلَيْهِ
वजअलना मिन अर्दा मन् तलाʿ अलेह
और हमें उन लोगों में शामिल कर जो इसके तले सबसे ज़्यादा राज़ी हों,

وَأَزْكَىٰ مَنْ نَظَرَ إِلَيْهِ
व अज्का मन् नज़र इलैह
और जो इसे देखने वालों में सबसे ज़्यादा पाक हों,

وَأَسْعَدَ مَنْ تَعَبَّدَ لَكَ فِيهِ
व असʿदा मन् तअब्बदा लका फीह
और जो इसके अंदर तेरी इबादत करने वालों में सबसे ख़ुशक़िस्मत हों,

وَوَفِّقْنَا ٱللَّهُمَّ فِيهِ لِلطَّاعَةِ وَٱلتَّوْبَةِ
व वफ़्फ़िक़ना अल्लाहुम्मा फीह लित्ताअत वत्तौबा
और ऐ अल्लाह, इस महीने में हमें इताअत और तौबा की तौफ़ीक़ अता फ़रमा,

وَٱعْصِمْنَا فِيهِ مِنَ ٱلآثَامِ وَٱلْحَوْبَةِ
व अʿसिमना फीह मिनल आसाम वल हौबा
और इसमें हमें गुनाहों और सज़ा के सबब से महफ़ूज़ रख,

وَأَوْزِعْنَا فِيهِ شُكْرَ ٱلنِّعْمَةِ
व औज़िʿना फीह शुक्रनिन्निʿमत
और इसमें हमें अपनी नेअमतों का शुक्र अदा करने वाला बना,

وَأَلْبِسْنَا فِيهِ جُنَنَ ٱلْعَافِيَةِ
व अल्बिसना फीह जुननल आफ़ियत
और इसमें हमें आफ़ियत की ढाल पहनाए रख,

وَأَتْمِمْ عَلَيْنَا بِٱسْتِكْمَالِ طَاعَتِكَ فِيهِ ٱلْمِنَّةَ
व अत्मिम अलेना बिस्तिकमालि ताअतिक फीहिल मिन्नत
और इसमें तेरी पूरी इताअत के ज़रिए हम पर अपनी नेमत मुकम्मल फ़रमा,

إِنَّكَ أَنْتَ ٱلْمَنَّانُ ٱلْحَمِيدُ
इन्नका अंतल मन्नानुल हमीद
बेशक तू बहुत नेमत देने वाला, बहुत तारीफ़ के क़ाबिल है,

وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ ٱلطَّيِّبِينَ
व सल्लल्लाहु अला मुहम्मदिं व आलिहित्तय्यिबीन
और अल्लाह मुहम्मद और उनकी पाक आल पर दरूद भेजे,

وَٱجْعَلْ لَنَا فِيهِ عَوْناً مِنْكَ عَلَىٰ مَا نَدَبْتَنَا إِلَيْهِ
वजअल लना फीह औनन् मिन्क अला मा नदब्तना इलैह
और इसमें हमें अपनी तरफ़ से मदद अता फ़रमा ताकि हम वह कर सकें जिसका तूने हुक्म दिया है,

مِنْ مُفْتَرَضِ طَاعَتِكَ
मिन मुफ़्तरज़ि ताअतिक
यानी वह इताअत जो तूने हम पर फ़र्ज़ की है,

وَتَقَبَّلْهَا إِنَّكَ ٱلأَكْرَمُ مِنْ كُلِّ كَرِيمٍ
व तक़ब्बलहा इन्नका अल-अकरमु मिन कुल्लि करीम
और इसे क़ुबूल फ़रमा, क्योंकि तू हर सख़ी से बढ़कर सख़ी है,

وَٱلأَرْحَمُ مِنْ كُلِّ رَحِيمٍ
वल अरहमु मिन कुल्लि रहीम
और हर रहम करने वाले से बढ़कर रहम करने वाला है,

آمِينَ آمِينَ رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ
आमीन आमीन रब्बल आलमीन
आमीन, आमीन, ऐ सारे जहानों के रब