यह दुआ तमाम पाक आइम्मा (अलैहिमुस्सलाम) की ज़ियारत के बाद पढ़ी जा सकती है। सय्यद इब्ने ताउस ने अपनी किताब मिस्बाहुज़-ज़ाइर में ख़ास तौर पर इसे ज़ियारत आइम्मतुल मोमिनीन के फ़ौरन बाद पढ़ने का ज़िक्र किया है।
لَّهُمَّ إِنِّي زُرْتُ هَذَا الْإِمَامَ
अल्लाहुम्मा इन्नी ज़ुरतु हाज़ल इमाम
ऐ अल्लाह! मैं इस इमाम की ज़ियारत करता हूँ
मुक़िर्रन बि इमामतिही
और उनकी इमामत का इक़रार करता हूँ
مُعْتَقِداً لِفَرْضِ طَاعَتِهِ
मुअ्तक़िदन लि फ़र्ज़े ताअतिही
और उनकी इताअत को फ़र्ज़ मानता हूँ
فَقَصَدْتُ مَشْهَدَهُ بِذُنُوبِي وَ عُيُوبِي
फ़क़सदतु मश्हदहू बि ज़ुनूबी व अयूबी
इसलिए मैं अपने गुनाहों और ऐबों के साथ उनके रौज़े पर हाज़िर हुआ हूँ
व मुबिक़ाते आसामी
और अपने गुनाहों की तबाहकारियों के साथ
وَ كَثْرَةِ سَيِّئَاتِي وَ خَطَايَايَ
व कसरते सैय्यिआती व ख़तायाया
और अपनी बहुत-सी बुराइयों और ग़लतियों के साथ
وَ مَا تَعْرِفُهُ مِنِّي
व मा तआरिफ़ुहू मिन्नी
और जो कुछ तू मुझ में जानता है
मुस्तजीरन बि अफ़्विका
तेरे माफ़ करने में पनाह चाहता हुआ
मुस्तईज़न बि हिल्मिका
तेरी हिल्म से मदद माँगता हुआ
राजियन रहमतका
तेरी रहमत की उम्मीद रखते हुए
लाजिअन इला रुक्निका
तेरे सहारे की तरफ़ रुख़ करता हुआ
आइज़न बि रअफ़तिका
तेरी मेहरबानी में पनाह चाहता हुआ
مُسْتَشْفِعاً بِوَلِيِّكَ وَ ابْنِ أَوْلِيَائِكَ
मुस्तशफ़िअन बि वलिय्यिका वब्नि औलियाइका
तेरे वली और तेरे औलिया के फ़रज़ंद के वसीले से शफ़ाअत चाहता हूँ
وَ صَفِيِّكَ وَ ابْنِ أَصْفِيَائِكَ
व सफ़िय्यिका वब्नि अस्फ़ियाइका
तेरे चुने हुए बंदे और तेरे चुने हुओं के फ़रज़ंद के ज़रिये
وَ أَمِينِكَ وَ ابْنِ أُمَنَائِكَ
व अमीनिका वब्नि उमनाइका
तेरे अमीन और तेरे अमीनों के फ़रज़ंद के वसीले से
وَ خَلِيفَتِكَ وَ ابْنِ خُلَفَائِكَ
व ख़लीफ़तिका वब्नि ख़ुलफ़ाइका
तेरे नायब और तेरे नायबों के फ़रज़ंद के ज़रिये
الَّذِينَ جَعَلْتَهُمُ الْوَسِيلَةَ إِلَى رَحْمَتِكَ وَ رِضْوَانِكَ
अल्लज़ीना जअल्तहुमुल वसीलत इला रहमतिका व रिज़वानिका
जिन्हें तूने अपनी रहमत और रज़ा तक पहुँचने का वसीला बनाया है
وَ الذَّرِيعَةَ إِلَى رَأْفَتِكَ وَ غُفْرَانِكَ
वज़्ज़रीअत इला रअफ़तिका व ग़ुफ़रानिका
और अपनी मेहरबानी और मग़फ़िरत तक पहुँचने का ज़रिया
االلَّهُمَّ وَ أَوَّلُ حَاجَتِي إِلَيْكَ
अल्लाहुम्मा व अव्वलु हाजती इलैका
ऐ अल्लाह! मेरी पहली हाजत तुझसे यह है
أَنْ تَغْفِرَ لِي مَا سَلَفَ مِنْ ذُنُوبِي عَلَى كَثْرَتِهَا
अन तग़फ़िरा ली मा सलफ़ा मिन ज़ुनूबी अला कसरतिहा
कि तू मेरे पिछले तमाम गुनाह माफ़ कर दे चाहे वे बहुत ज़्यादा हों
وَ أَنْ تَعْصِمَنِي فِيمَا بَقِيَ مِنْ عُمْرِي
व अन तअसिमनी फ़ीमा बक़िया मिन उम्रि
और मेरी बाक़ी उम्र में मुझे गुनाह से बचाए रखे
وَ تُطَهِّرَ دِينِي مِمَّا يُدَنِّسُهُ
व तुतह्हिरा दीनी मिम्मा युदन्निसुहू
और मेरे दीन को हर उस चीज़ से पाक कर दे जो उसे गंदा करती है
وَ يَشِينُهُ وَ يُزْرِي بِهِ
व यशीन्हु व युज़्री बिही
या उसे रुस्वा और कमज़ोर करती है
وَ تَحْمِيَهُ مِنَ الرَّيْبِ وَ الشَّكِّ
व तह्मीहू मिनर रैबि वश्शक्कि
और उसे शक, वहम से महफ़ूज़ रखे
وَ الْفَسَادِ وَ الشِّرْكِ
वल फ़सादि वश्शिर्कि
और फ़साद व शिर्क से बचाए
وَ تُثَبِّتَنِي عَلَى طَاعَتِكَ
व तुसब्बितनी अला ताअतिक
और मुझे अपनी इताअत पर क़ायम रखे
व ताअति रसूलिक
और तेरे रसूल की इताअत पर
وَ ذُرِّيَّتِهِ النُّجَبَاءِ السُّعَدَاءِ
व ज़ुर्रिय्यतिहिन्नुजबाइ स्सुअदाइ
और उनकी पाक व नेक औलाद की इताअत पर
सलवातुका अलैहिम
उन सब पर तेरी दरूद हो
وَ رَحْمَتُكَ وَ سَلاَمُكَ وَ بَرَكَاتُكَ
व रहमतुका व सलामुका व बरकातुका
और तेरी रहमत, सलामती और बरकतें हों
وَ تُحْيِيَنِي مَا أَحْيَيْتَنِي عَلَى طَاعَتِهِمْ
व तुह्यियनी मा अह्यैतनी अला ताअतिहिम
और जब तक तू मुझे ज़िन्दा रखे उनकी इताअत पर ज़िन्दा रखे
وَ تُمِيتَنِي إِذَا أَمَتَّنِي عَلَى طَاعَتِهِمْ
व तुमीतनी इज़ा अमत्तनी अला ताअतिहिम
और जब मुझे मौत दे तो उनकी इताअत पर मौत दे
وَ أَنْ لاَ تَمْحُوَ مِنْ قَلْبِي مَوَدَّتَهُمْ وَ مَحَبَّتَهُمْ
व अन ला तम्हू मिन क़ल्बी मवद्दतहुम व महब्बतहुम
और मेरे दिल से उनकी दोस्ती और मोहब्बत को मिटाना नहीं
व बुग़्ज़ा अअदाइहिम
और उनके दुश्मनों से नफ़रत को क़ायम रखना
وَ مُرَافَقَةَ أَوْلِيَائِهِمْ وَ بِرَّهُمْ
व मुराफ़क़त औलियाइहिम व बिर्रहुम
और उनके औलिया की संगत और उनके साथ नेकी करना
وَ أَسْأَلُكَ يَا رَبِّ أَنْ تَقْبَلَ ذَلِكَ مِنِّي
व अस्अलुका या रब्बि अन तक़्बल ज़ालिका मिन्नी
और ऐ मेरे रब! मैं तुझसे दुआ करता हूँ कि तू इसे मुझसे क़ुबूल फ़रमा
وَ تُحَبِّبَ إِلَيَّ عِبَادَتَكَ
व तुहब्बिब इलैय्य इबादतका
और अपनी इबादत को मेरे दिल में प्यारा बना दे
وَ الْمُوَاظَبَةَ عَلَيْهَا
वल मुवाज़बत अलैहा
और उस पर पाबंदी अता फ़रमा
व तुनश्शितनी लहा
और मुझे उसमें चुस्ती व फुर्ती दे
وَ تُبَغِّضَ إِلَيَّ مَعَاصِيَكَ وَ مَحَارِمَكَ
व तुबग़्ग़िद इलैय्य मआसियक व महारिमक
और तेरी नाफ़रमानियों और हराम चीज़ों से मुझे नफ़रत दिला दे
व तदफ़अनी अन्हा
और मुझे उनसे दूर रख
وَ تُجَنِّبَنِي التَّقْصِيرَ فِي صَلَوَاتِي
व तुजन्निबनी तक़्सीर फ़ी सलवाती
और मेरी नमाज़ों में कोताही से मुझे बचा
वल इस्तिहानत बिहा
और उन्हें हल्का समझने से
वल तराख़ी अन्हा
और उनमें सुस्ती करने से
وَ تُوَفِّقَنِي لِتَأْدِيَتِهَا كَمَا فَرَضْتَ وَ أَمَرْتَ بِهِ
व तुवफ़्फ़िक़नी लितअदियतिहा कमा फ़रज़्ता व अमरता बिही
और मुझे उनकी अदायगी की तौफ़ीक़ दे जैसा तूने फ़र्ज़ किया और हुक्म दिया
अला सुन्नति रसूलिक
तेरे रसूल की सुन्नत के मुताबिक़
صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَ آلِهِ
सलवातुका अलैहि व आलिही
उन पर और उनकी आल पर तेरी दरूद हों
وَ رَحْمَتُكَ وَ بَرَكَاتُكَ
व रहमतुका व बरकातुका
और तेरी रहमतें और बरकतें हों
ख़ुज़ूअन व ख़ुशूअन
आजिज़ी और दिल की हाज़िरी के साथ
وَ تَشْرَحَ صَدْرِي لإِيتَاءِ الزَّكَاةِ
व तश्रह सद्री लि ईताइज़् ज़काति
और मेरा दिल ज़कात अदा करने के लिए खोल दे
وَ إِعْطَاءِ الصَّدَقَاتِ
व ईताइस् सदक़ाति
और सदक़ा देने के लिए
व बज़्लिल मअरूफ़
और भलाई खर्च करने के लिए
وَ الْإِحْسَانِ إِلَى شِيعَةِ آلِ مُحَمَّدٍ
वल इहसानि इला शीयअति आलि मुहम्मद
और आले मुहम्मद की शिया के साथ एहसान करने के लिए
عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ وَ مُوَاسَاتِهِمْ
अलैहिमुस्सलाम व मुवासातिहिम
उन पर सलाम हो और उनके साथ हमदर्दी करने की तौफ़ीक़ दे
وَ لاَ تَتَوَفَّانِي إِلاَّ بَعْدَ أَنْ تَرْزُقَنِي حِجَّ بَيْتِكَ الْحَرَامِ
व ला ततवफ़्फ़ानी इल्ला बादा अन तरज़ुक़नी हिज्जा बैतिकल हराम
और मुझे मौत न देना जब तक मुझे अपने हरम वाले घर का हज अता न कर दे
وَ زِيَارَةَ قَبْرِ نَبِيِّكَ
व ज़ियारत क़ब्रि नबिय्यिक
और तेरे नबी की क़ब्र की ज़ियारत
وَ قُبُورِ الْأَئِمَّةِ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ
व क़ुबूरिल आइम्मति अलैहिमुस्सलाम
और आइम्मा की क़ब्रों की ज़ियारत अता फ़रमा
وَ أَسْأَلُكَ يَا رَبِّ تَوْبَةً نَصُوحاً تَرْضَاهَا
व अस्अलुका या रब्बि तौबतन नसूहन तर्द़ाहा
और ऐ रब! मैं तुझसे ऐसी सच्ची तौबा माँगता हूँ जिसे तू पसंद करे
व निय्यतन तह्मदुहा
और ऐसी नियत जिसे तू सराहे
وَ عَمَلاً صَالِحاً تَقْبَلُهُ
व अमलन सालिहन तक़्बलुहू
और ऐसा नेक अमल जिसे तू क़ुबूल फ़रमाए
وَ أَنْ تَغْفِرَ لِي وَ تَرْحَمَنِي إِذَا تَوَفَّيْتَنِي
व अन तग़फ़िर ली व तरहमनी इज़ा तवफ़्फ़ैतनी
और जब तू मुझे मौत दे तो मुझे बख़्श दे और मुझ पर रहम फ़रमा
وَ تُهَوِّنَ عَلَيَّ سَكَرَاتِ الْمَوْتِ
व तुहव्विन अलैय्य सकरातिल मौत
और मौत की सख़्तियों को मुझ पर आसान फ़रमा
وَ تَحْشُرَنِي فِي زُمْرَةِ مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ
व तह्शुरनी फ़ी ज़ुमरति मुहम्मद व आलिही
और मुझे मुहम्मद और उनकी आल के गिरोह में शामिल फ़रमा
صَلَوَاتُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَ عَلَيْهِمْ
सलवातुल्लाहि अलैहि व अलैहिम
अल्लाह की दरूद उन पर और उन सब पर हो
وَ تُدْخِلَنِي الْجَنَّةَ بِرَحْمَتِكَ
व तुदख़िलनी अलजन्नत बिरहमतिका
और अपनी रहमत से मुझे जन्नत में दाख़िल फ़रमा
وَ تَجْعَلَ دَمْعِي غَزِيراً فِي طَاعَتِكَ
व तज्अल दम्ई ग़ज़ीरन फ़ी ताअतिक
और अपनी इताअत में मेरी आँखों से बहुत आँसू बहा
وَ عَبْرَتِي جَارِيَةً فِيمَا يُقَرِّبُنِي مِنْكَ
व अबरती जारियतन फ़ीमा युक़र्रिबुनी मिन्क
और मेरी आँखों के आँसू उन कामों में बहते रहें जो मुझे तेरे क़रीब करें
وَ قَلْبِي عَطُوفاً عَلَى أَوْلِيَائِكَ
व क़ल्बी अतूफ़न अला औलियाइक
और मेरे दिल को अपने औलिया पर नरम और मेहरबान बना दे
وَ تَصُونَنِي فِي هَذِهِ الدُّنْيَا
व तसूननी फ़ी हाज़िहिद दुनिया
और इस दुनिया में मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा
مِنَ الْعَاهَاتِ وَ الْآفَاتِ
मिनल आहाति वल आफ़ात
आफ़तों, नाक़िसियों और मुसीबतों से
وَ الْأَمْرَاضِ الشَّدِيدَةِ
वल अमराज़िश् शदीदा
सख़्त बीमारियों से
وَ الْأَسْقَامِ الْمُزْمِنَةِ
वल अस्क़ामिल मुज़मिना
और पुरानी लाइलाज बीमारियों से
وَ جَمِيعِ أَنْوَاعِ الْبَلاَءِ وَ الْحَوَادِثِ
व जमीइ अनवाइल बलाइ वल हवादिस
और हर तरह की बलाओं और हादसों से
وَ تَصْرِفَ قَلْبِي عَنِ الْحَرَامِ
व तस्रिफ़ क़ल्बी अनिल हराम
और मेरे दिल को हराम से फेर दे
وَ تُبَغِّضَ إِلَيَّ مَعَاصِيَكَ
व तुबग़्ग़िद इलैय्य मआसियक
और तेरी नाफ़रमानियों से मुझे नफ़रत दिला दे
وَ تُحَبِّبَ إِلَيَّ الْحَلاَلَ
व तुहब्बिब इलैय्यल हलाल
और हलाल को मेरे दिल में प्यारा बना दे
وَ تَفْتَحَ لِي أَبْوَابَهُ
व तफ़तह ली अबवाबहू
और उसके दरवाज़े मेरे लिए खोल दे
وَ تُثَبِّتَ نِيَّتِي وَ فِعْلِي عَلَيْهِ
व तुसब्बित निय्यती व फ़िअली अलैहि
और मेरी नियत और अमल को उस पर मज़बूत कर दे
व तमुद्द फ़ी उम्रि
और मेरी उम्र में बढ़ोतरी फ़रमा
وَ تُغْلِقَ أَبْوَابَ الْمِحَنِ عَنِّي
व तुग़्लिक़ अबवाबल मिहन अन्नी
और इम्तिहानों और मुसीबतों के दरवाज़े मुझ पर बंद कर दे
وَ لاَ تَسْلُبَنِي مَا مَنَنْتَ بِهِ عَلَيَّ
व ला तस्लुबनी मा मनन्त बिही अलैय्य
और जो नेमतें तूने मुझे दी हैं उनसे मुझे महरूम न कर
وَ لاَ تَسْتَرِدَّ شَيْئًا مِمَّا أَحْسَنْتَ بِهِ إِلَيَ
व ला तस्तरिद्द शयअन मिम्मा अहसन्त बिही इलैय्य
और जो एहसान तूने मुझ पर किया है उसमें से कुछ भी वापस न ले
وَ لاَ تَنْزِعَ مِنِّي النِّعَمَ الَّتِي أَنْعَمْتَ بِهَا عَلَيَّ
व ला तनज़िअ मिन्नी न्निअमल्लती अनअम्ता बिहा अलैय्य
और जो नेमतें तूने मुझ पर अता की हैं उन्हें मुझसे छीन न ले
وَ تَزِيدَ فِيمَا خَوَّلْتَنِي
व तज़ीद फ़ीमा ख़व्वलतनी
बल्कि जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें और इज़ाफ़ा फ़रमा
وَ تُضَاعِفَهُ أَضْعَافاً مُضَاعَفَةً
व तुदाइफ़हू अदआफ़न मुदाअफ़ा
और उसे कई गुना बढ़ा दे
وَ تَرْزُقَنِي مَالاً كَثِيراً
व तरज़ुक़नी मालन् कसीरा
और मुझे बहुत सा माल अता फ़रमा
वासिअन साइग़न
जो खुला, फ़राख़ और आसान हो
هَنِيئاً نَامِياً وَافِياً
हनीअन नामियन् वाफ़ियन
जो हलाल, बढ़ने वाला और पूरा हो
وَ عِزّاً بَاقِياً كَافِياً
व इज़्ज़न बाक़ियन काफ़ियन
और ऐसी इज़्ज़त अता फ़रमा जो हमेशा रहने वाली और काफ़ी हो
وَ جَاهاً عَرِيضاً مَنِيعاً
व जाहाʹन अरीज़न मनीʹअन
और ऐसी इज़्ज़त अता फ़रमा जो वसीअ, मज़बूत और क़ायम रहने वाली हो
وَ نِعْمَةً سَابِغَةً عَامَّةً
व निअʹमतन साबिग़तन आम्मतन
और ऐसी नेमत अता फ़रमा जो फैली हुई और सब के लिए आम हो
وَ تُغْنِيَنِي بِذَلِكَ عَنِ الْمَطَالِبِ الْمُنَكَّدَةِ
व तुग़नीʹयनी बिज़ालिक अनिल मतालिबिल मुनक्कदा
और इसके ज़रिये मुझे ज़िल्लत भरी मांगों से बेनियाज़ कर दे
وَ الْمَوَارِدِ الصَّعْبَةِ
वल मवारिदिस्सअʹबा
और मुश्किल और दुश्वार रास्तों से बचा ले
وَ تُخَلِّصَنِي مِنْهَا مُعَافًى
व तुखल्लिसनी मिन्हा मुआʹफन
और मुझे उनसे निजात दे पूरी आफ़ियत के साथ
فِي دِينِي وَ نَفْسِي وَ وَلَدِي
फ़ी दीनी व नफ़्सी व वलदी
मेरे दीन, मेरी जान और मेरी औलाद के मामले में
وَ مَا أَعْطَيْتَنِي وَ مَنَحْتَنِي
व मा अʹतैतनी व मनहतनी
और हर उस चीज़ में जो तूने मुझे अता की और बख़्शी
وَ تَحْفَظَ عَلَيَّ مَالِي
व तहफ़ज़ अʹलैय्य माली
और मेरे माल की हिफ़ाज़त फ़रमा
وَ جَمِيعَ مَا خَوَّلْتَنِي
व जमीʹअ मा ख़व्वलतनी
और हर उस चीज़ की जो तूने मेरे हवाले की है
وَ تَقْبِضَ عَنِّي أَيْدِيَ الْجَبَابِرَةِ
व तक़बिज़ अʹन्नी अयदियल जबाबिरा
और ज़ालिमों के हाथों से मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा
وَ تَرُدَّنِي إِلَى وَطَنِي
व तरुद्दनी इला वतनी
और मुझे सलामती के साथ मेरे वतन वापस पहुँचा दे
وَ تُبَلِّغَنِي نِهَايَةَ أَمَلِي فِي دُنْيَايَ وَ آخِرَتِي
व तुबल्लिग़नी निहायता अमली फ़ी दुनयाया व आख़िरती
और मेरी दुनिया और आख़िरत में मेरी उम्मीदों को आख़िरी हद तक पहुँचा दे
وَ تَجْعَلَ عَاقِبَةَ أَمْرِي مَحْمُودَةً حَسَنَةً سَلِيمَةً
व तजʹअल आक़िबता अमरी महमूदतन हसनतन सलीमतन
और मेरे अंजाम को क़ाबिल-ए-तारीफ़, अच्छा और सलामत बना दे
وَ تَجْعَلَنِي رَحِيبَ الصَّدْرِ
व तजʹअलनी रहीबस्सद्र
और मेरा दिल खुला और वसीअ बना दे
वासिअल हाल
और मुझे फराख़हाली अता फ़रमा
हसनल ख़ुलुक़
और अच्छे अख़लाक़ वाला बना दे
बअʹीदन मिनल बुख़्लि
और मुझे बुख़्ल और कंजूसी से दूर रख
वल निफ़ाक़ि वल किज़्बि
और निफ़ाक़ और झूठ से बचा
وَ الْبَهْتِ وَ قَوْلِ الزُّورِ
वल बह्ति व क़ौलिज़्ज़ूर
और तोहमत और झूठी गवाही से भी
وَ تُرْسِخَ فِي قَلْبِي مَحَبَّةَ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ شِيعَتِهِمْ
व तुरसिख़ फ़ी क़ल्बी महब्बता मुहम्मद व आले मुहम्मद व शीअतिहिम
और मेरे दिल में मुहम्मद, आले मुहम्मद और उनके शियों की मुहब्बत मज़बूती से जमा दे
وَ تَحْرُسَنِي يَا رَبِّ فِي نَفْسِي وَ أَهْلِي
व तहरुसनी या रब्बि फ़ी नफ़्सी व अहली
ऐ मेरे रब, मेरी और मेरे घर वालों की हिफ़ाज़त फ़रमा
व माली व वलदी
मेरे माल और मेरी औलाद की
وَ أَهْلِ حُزَانَتِي وَ إِخْوَانِي
व अहले हुज़ानती व इख़्वानी
और उन लोगों की जो मेरी ज़िम्मेदारी में हैं, और मेरे भाइयों की
وَ أَهْلِ مَوَدَّتِي وَ ذُرِّيَّتِي
व अहले मवद्दती व ज़ुर्रिय्यती
और जिनसे मुझे मुहब्बत है और मेरी नस्ल की
बिरहमतिका व जूदिका
अपनी रहमत और अपने फ़ज़्ल से
اللَّهُمَّ هَذِهِ حَاجَاتِي عِنْدَكَ
अल्लाहुम्मा हाज़िही हाजाती इंदक
ऐ अल्लाह, ये मेरी हाजतें हैं जो तेरे सामने हैं
وَ قَدِ اسْتَكْثَرْتُهَا لِلُؤْمِي وَ شُحِّي
व क़द इस्तकसरतुहा लिलूʹमी व शुह्ही
मैंने अपनी कमीनी तबीयत और कंजूसी की वजह से इन्हें बहुत बड़ा समझ लिया है
وَ هِيَ عِنْدَكَ صَغِيرَةٌ حَقِيرَةٌ
व हिया इंदक सग़ीʹरतन हक़ीʹरतन
और ये तेरी नज़र में बहुत छोटी और हक़ीर हैं
وَ عَلَيْكَ سَهْلَةٌ يَسِيرَةٌ
व अलैका सहʹलतन यसीʹरतन
और तेरे लिए बिल्कुल आसान और हल्की हैं
فَأَسْأَلُكَ بِجَاهِ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ
फ़-असअलुका बिजाहि मुहम्मद व आले मुहम्मद
पस मैं तुझसे मुहम्मद और आले मुहम्मद के वसीले से सवाल करता हूँ
عَلَيْهِ وَ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ عِنْدَكَ
अलैहि व अलैहिमुस्सलाम इंदक
जिन पर और जिनके आल पर तेरे यहाँ सलाम हो
व बिहक़्क़िहिम अलैका
और उनके उस हक़ के वास्ते जो तेरे ज़िम्मे है
وَ بِمَا أَوْجَبْتَ لَهُمْ
व बिमा औजब्ता लहुम
और उस चीज़ के वास्ते जो तूने उनके लिए फ़र्ज़ ठहराई
وَ بِسَائِرِ أَنْبِيَائِكَ وَ رُسُلِكَ
व बिसाइरि अंबियाइका व रुसुलिका
और तेरे तमाम अंबिया और रसूलों के वास्ते
وَ أَصْفِيَائِكَ وَ أَوْلِيَائِكَ
व अस्फ़ियाइका व औलियाइका
और तेरे बरगुज़ीदा बंदों और औलिया के वास्ते
الْمُخْلَصِينَ مِنْ عِبَادِكَ
अल-मुख़लिसीना मिन इबादिका
जो तेरे बंदों में से चुने हुए और ख़ालिस हैं
وَ بِاسْمِكَ الْأَعْظَمِ الْأَعْظَمِ
व बिस्मिकाल-अʹज़मिल-अʹज़म
और तेरे सबसे बड़े और अज़ीम नाम के वास्ते
لَمَّا قَضَيْتَهَا كُلَّهَا
लम्मा क़ज़ैतहा कुल्लहा
कि तू मेरी तमाम हाजतें पूरी फ़रमा दे
व असअफ्तनी बिहा
और इनके ज़रिये मेरी मदद और राहत फ़रमा
وَ لَمْ تُخَيِّبْ أَمَلِي وَ رَجَائِي
व लम तुखय्यिब अमली व रजाइ
और मेरी उम्मीद और आस को नाकाम न कर
اللَّهُمَّ وَ شَفِّعْ صَاحِبَ هَذَا الْقَبْرِ فِيَ
अल्लाहुम्मा व शफ़्फ़िʹ साहित हाज़ल-क़ब्रि फ़िय्या
ऐ अल्लाह, इस क़ब्र वाले को मेरे हक़ में शफ़ीअ बना दे
يَا سَيِّدِي يَا وَلِيَّ اللَّهِ يَا أَمِينَ اللَّهِ
या सय्यिदी या वलिय्यल्लाह या अमीनल्लाह
ऐ मेरे आक़ा, ऐ अल्लाह के वली, ऐ अल्लाह के अमीन
أَسْأَلُكَ أَنْ تَشْفَعَ لِي إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَ جَلَّ
असअलुका अन तशफ़अ ली इलल्लाहि अज़्ज़ व जल्ल
मैं आपसे सवाल करता हूँ कि अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल के दरबार में मेरी शफ़ाअत करें
فِي هَذِهِ الْحَاجَاتِ كُلِّهَا
फ़ी हाज़िहिल-हाजाति कुल्लिहा
इन तमाम हाजतों के बारे में
بِحَقِّ آبَائِكَ الطَّاهِرِينَ
बिहक़्क़ि आबाइकल-ताहिरीन
आपके पाक और मुतहर आबा के हक़ के वास्ते
وَ بِحَقِّ أَوْلاَدِكَ الْمُنْتَجَبِينَ
व बिहक़्क़ि औलादिकल-मुन्तजबीना
और आपके चुने हुए फ़र्ज़ंदों के हक़ के वास्ते
فَإِنَّ لَكَ عِنْدَ اللَّهِ تَقَدَّسَتْ أَسْمَاؤُهُ
फ़-इन्ना लका इंदल्लाहि तक़द्दसत अस्माउहु
क्योंकि अल्लाह के यहाँ, जिनके नाम पाक हैं, आपका बड़ा मुक़ाम है
الْمَنْزِلَةَ الشَّرِيفَةَ
अल-मंज़िलतश्शरीफ़ा
एक बुज़ुर्ग और शरीफ़ मर्तबा
وَ الْمَرْتَبَةَ الْجَلِيلَةَ
वल-मरतबतल-जलीला
और बहुत आला दर्जा
वल-जाहल-अरीज़
और वसीअ इज़्ज़त और वक़ार
اللَّهُمَّ لَوْ عَرَفْتُ مَنْ هُوَ أَوْجَهُ عِنْدَكَ
अल्लाहुम्मा लौ अʹरफ़्तु मन हुआ औजहु इंदक
ऐ अल्लाह, अगर मैं किसी ऐसे शख़्स को जानता जो तेरे यहाँ ज़्यादा मक़बूल होता
मिन हाज़ल इमामि
इस इमाम से
وَ مِنْ آبَائِهِ وَ أَبْنَائِهِ الطَّاهِرِينَ
व मिन आबाइहि व अबनाइहि अत्-ताहिरीन
और उनके पाक आबा और पाक औलाद से
عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ وَ الصَّلاَةُ
अलैहिमुस्सलाम वस्सलातु
उन सब पर सलाम और दुरूद हो
لَجَعَلْتُهُمْ شُفَعَائِي
लजअल्तुहुम शुफ़अाई
तो मैं उन्हें ही अपना सिफ़ारिश करने वाला बनाता
وَ قَدَّمْتُهُمْ أَمَامَ حَاجَتِي وَ طَلِبَاتِي هَذِهِ
व क़द्दम्तुहुम अमामा हाजती व तलिबाती हाज़िही
और इन्हीं के वसीले से अपनी हाजतें और दरख़्वास्तें पेश करता
फस्मअ् मिन्नी
पस मेरी बात सुन
वस्तजिब ली
और मेरी दुआ क़ुबूल फ़रमा
وَ افْعَلْ بِي مَا أَنْتَ أَهْلُهُ
वफ़अल् बी मा अंता अहलुहु
और मेरे साथ वही कर जो तेरी शान के लायक़ है
يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
या अरहमर्-राहिमीन
ऐ सबसे बढ़कर रहम करने वाले
االلَّهُمَّ وَ مَا قَصُرَتْ عَنْهُ مَسْأَلَتِي
अल्लाहुम्मा व मा क़सुरत् अन्हु मसअलती
ऐ अल्लाह, और जो चीज़ें मेरी दुआ में शामिल न हो सकीं
وَ عَجَزَتْ عَنْهُ قُوَّتِي
व अजज़त् अन्हु क़ुव्वती
और जिन पर मेरी ताक़त क़ाबू न पा सकी
وَ لَمْ تَبْلُغْهُ فِطْنَتِي
व लम तब्लुग़्हु फ़ित्नती
और जिन तक मेरी समझ न पहुँच सकी
مِنْ صَالِحِ دِينِي و وَ دُنْيَايَ وَ آخِرَتِي
मिन सालिहि दीनी व दुन्याया व आख़िरती
जो मेरे दीन, मेरी दुनिया और मेरी आख़िरत की भलाई के लिए हों
फमनुन् बिहि अलय्या
तो उन्हें भी मुझ पर अता फ़रमा
وَ احْفَظْنِي وَ احْرُسْنِي
वह्फ़ज़्नी वह्रुस्नी
और मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा, मेरी निगहबानी कर
وَ هَبْ لِي وَ اغْفِرْ لِي
व हब् ली वग़्फ़िर् ली
और मुझे अता फ़रमा तथा मुझे बख़्श दे
وَ مَنْ أَرَادَنِي بِسُوءٍ أَوْ مَكْرُوهٍ
व मन अरादऩी बिसूइन औ मक्रूहिन
और जो कोई मेरे लिए बुराई या नुक़सान चाहता हो
मिन शैतानिन मरीद
चाहे वह सरकश शैतान हो
औ सुल्तानिन अनीद
या ज़िद्दी और ज़ालिम हाकिम
औ मुख़ालिफ़िन फ़ी दीनिन
या दीन में मुख़ालिफ़
أَوْ مُنَازِعٍ فِي دُنْيَا
औ मुनाज़िअिन फ़ी दुनिया
या दुनिया के मामले में झगड़ालू
أَوْ حَاسِدٍ عَلَيَّ نِعْمَةً
औ हासिदिन अलय्या निʿमतन
या मुझ पर नेमत की वजह से हसद करने वाला
औ ज़ालिमिन औ बाग़िन
या ज़ालिम या सरकश
फ़क़बिद् अन्नी यदहू
तो उसके हाथ मुझसे रोक दे
وَ اصْرِفْ عَنِّي كَيْدَهُ
वस्रिफ् अन्नी कैदहू
और उसकी चालों को मुझसे फेर दे
وَ اشْغَلْهُ (عَنِّي) بِنَفْسِهِ
वश्घल्हु (अन्नी) बिनफ़्सिही
और उसे मेरी तरफ़ से हटाकर उसी में उलझा दे
वक्फ़िनी शर्रहु
और मुझे उसकी बुराई से बचा ले
وَ شَرَّ أَتْبَاعِهِ وَ شَيَاطِينِهِ
व शर्र अत्बाइहि व शयातीनीहि
और उसके मानने वालों और उसके शैतानों की बुराई से भी
وَ أَجِرْنِي مِنْ كُلِّ مَا يَضُرُّنِي وَ يُجْحِفُ بِي
व अजिरनी मिन कुल्लि मा यदुर्रुनी व युज्हिफ़ु बी
और मुझे हर उस चीज़ से पनाह दे जो मुझे नुक़सान पहुँचाए और मुझ पर ज़ुल्म करे
وَ أَعْطِنِي جَمِيعَ الْخَيْرِ كُلِّهِ (كُلَّهُ)
व आ‘तिनी जमीअल-ख़ैरि कुल्लिहि
और मुझे तमाम भलाई अता फ़रमा
مِمَّا أَعْلَمُ وَ مِمَّا لاَ أَعْلَمُ
मिम्मा अ‘लमु व मिम्मा ला अ‘लमु
चाहे मैं उसे जानता हूँ या नहीं जानता
االلَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व आलि मुहम्मद
ऐ अल्लाह, मुहम्मद और आले मुहम्मद पर दुरूद भेज
وَ اغْفِرْ لِي وَ لِوَالِدَيَّ
वग़्फ़िर ली व लिवालिदय्य
और मुझे और मेरे वालिदैन को बख़्श दे
ووَ لِإِخْوَانِي وَ أَخَوَاتِي
व लि-इख़्वानी व अख़वाती
और मेरे भाइयों और बहनों को
وَ أَعْمَامِي وَ عَمَّاتِي
व अ‘मामी व अम्माती
और मेरे चाचा और मेरी फूफियाँ
وَ أَخْوَالِي وَ خَالاَتِي
व अख़्वाली व ख़ालाती
और मेरे मामू और मेरी ख़ालाएँ
وَ أَجْدَادِي وَ جَدَّاتِي
व अज्दादी व जद्दाती
और मेरे दादा-दादी और नाना-नानी को
وَ أَوْلاَدِهِمْ وَ ذَرَارِيهِمْ
व औलादिहिम व ज़रारीहिम
और उनकी औलाद और नस्लों को
وَ أَزْوَاجِي وَ ذُرِّيَاتِي
व अज्वाजी व ज़ुर्रिय्याती
और मेरी बीवियों और मेरी औलाद को
وَ أَقْرِبَائِي وَ أَصْدِقَائِي
व अकरिबाई व अस्दिक़ाई
और मेरे रिश्तेदारों और मेरे दोस्तों को
وَ جِيرَانِي وَ إِخْوَانِي فِيكَ
व जीरानी व इख़्वानी फीका
और मेरे पड़ोसियों और तेरे लिए मेरे भाइयों को
مِنْ أَهْلِ الشَّرْقِ وَ الْغَرْبِ
मिन अहलिश्शर्क़ि वल-ग़र्ब
जो मशरिक़ और मग़रिब के रहने वाले हैं
وَ لِجَمِيعِ أَهْلِ مَوَدَّتِي
व लिजमीअि अह्लि मवद्दती
और उन सब के लिए जिनसे मैं मुहब्बत रखता हूँ
مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَ الْمُؤْمِنَاتِ
मिनल-मु’मिनीन वल-मु’मिनात
मर्द और औरत मोमिनों में से
الْأَحْيَاءِ مِنْهُمْ وَ الْأَمْوَاتِ
अल-अह्याई मिन्हुम वल-अम्वात
चाहे वे ज़िन्दा हों या मरहूम
وَ لِجَمِيعِ مَنْ عَلَّمَنِي خَيْراً
व लिजमीअि मन अल्लमनी ख़ैरन
और हर उस शख़्स के लिए जिसने मुझे कोई भलाई सिखाई
أَوْ تَعَلَّمَ مِنِّي عِلْماً
औ तअल्लमा मिन्नी इल्मन
या जिसने मुझसे कोई इल्म हासिल किया
اللَّهُمَّ أَشْرِكْهُمْ فِي صَالِحِ دُعَائِي
अल्लाहुम्मा अश्रिक्हुम फी सालिहि दुआई
ऐ अल्लाह, उन्हें मेरी नेक दुआओं में शरीक फ़रमा
وَ زِيَارَتِي لِمَشْهَدِ حُجَّتِكَ وَ وَلِيِّكَ
व ज़ियारती लिमश्हदि हुज्जतिक व वलिय्यिक
और तेरी हुज्जत और तेरे वली की ज़ियारत में भी
وَ أَشْرِكْنِي فِي صَالِحِ أَدْعِيَتِهِمْ
व अश्रिक्नी फी सालिहि अद‘इयतिहिम
और मुझे भी उनकी नेक दुआओं में शरीक कर
بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
बिरहमतिका या अरहमर्-राहिमीन
अपनी रहमत से, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले
وَ بَلِّغْ وَلِيَّكَ مِنْهُمُ السَّلاَمَ
व बल्लिग़् वलिय्यक मिन्हुमुस्सलाम
और उनकी तरफ़ से अपने वली तक सलाम पहुँचा दे
وَ السَّلاَمُ عَلَيْكَ وَ رَحْمَةُ اللَّهِ وَ بَرَكَاتُهُ
वस्सलामु अलैका व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और तुम पर सलाम हो और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें
يَا سَيِّدِي يَا مَوْلاَيَ يَا ....
या सय्यिदी या मौलाया या …
ऐ मेरे सरदार, ऐ मेरे मौला, ऐ …
सल्लल्लाहु अलैक
अल्लाह तुम पर दुरूद भेजे
وَ عَلَى رُوحِكَ وَ بَدَنِكَ
व अला रूहि-क व बदनिक
और तुम्हारी रूह और तुम्हारे जिस्म पर
أَنْتَ وَسِيلَتِي إِلَى اللَّهِ
अन्त वसीलती इलल्लाहि
तू ही अल्लाह तक पहुँचने का मेरा ज़रिया है
व ज़रीअती इलैहि
और उसी तक पहुँचने का मेरा वसीला है
وَ لِي حَقُّ مُوَالاَتِي وَ تَأْمِيلِي
व ली हक़्क़ु मुवालाती व तअमीली
और मुझे तुझसे वफ़ादारी और तुझसे उम्मीद रखने का हक़ हासिल है
فَكُنْ شَفِيعِي إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَ جَلَّ
फ़कुन शफ़ीई इलल्लाहि अज़्ज़ व जल्ल
तो तू अल्लाह अज़्ज़ो जल्ल के सामने मेरा सिफ़ारिशी बन जा
فِي الْوُقُوفِ عَلَى قِصَّتِي هَذِهِ
फ़िल-वुक़ूफ़ि अला क़िस्सती हाज़िही
ताकि वह मेरी इस अर्ज़दाश्त पर तवज्जोह फ़रमाए
وَ صَرْفِي عَنْ مَوْقِفِي هَذَا بِالنُّجْحِ
व सर्फ़ी अन मौक़िफ़ी हाज़ा बिन्नुज्हि
और मेरी इस हालत में मेरी तमाम दरख़्वास्तों को कामयाबी अता फ़रमाए
بِمَا سَأَلْتُهُ كُلِّهِ بِرَحْمَتِهِ وَ قُدْرَتِهِ
बिमा सअल्तुहु कुल्लिही बिरहमतिही व क़ुदरतिही
जो मैंने उसकी रहमत और क़ुदरत के सहारे उससे माँगा है
اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي عَقْلاً كَامِلاً
अल्लाहुम्मा अरज़ुक़नी अक़्लन कामिलन
ऐ अल्लाह, मुझे मुकम्मल अक़्ल अता फ़रमा
व लुब्बन राजिहन
और गहरी समझ व दानिश बख़्श
व इज़्ज़न बाक़ियन
और हमेशा बाक़ी रहने वाली इज़्ज़त अता कर
व क़ल्बन ज़किय्यन
और पाक व साफ़ दिल बख़्श
व अमलन कसीरन
और बहुत ज़्यादा नेक अमल अता फ़रमा
व अदबन बारिअन
और आला दर्जे का अदब व अख़लाक़ दे
وَ اجْعَلْ ذَلِكَ كُلَّهُ لِي
वज्अल ज़ालिका कुल्लहु ली
और इन सब को मेरे हक़ में बेहतर बना दे
وَ لاَ تَجْعَلْهُ عَلَيَّ
व ला तज्अल्हु अलैय्या
और इन्हें मेरे ख़िलाफ़ न बना
بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِي
बिरहमतिका या अरहमर्-राहिमीन
अपनी रहमत से, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले
अरबी सही एराब के साथ
َللَّهُمَّ إِنِّي زُرْتُ هَذَا الْإِمَامَ مُقِرّاً بِإِمَامَتِهِ مُعْتَقِداً لِفَرْضِ طَاعَتِهِ
فَقَصَدْتُ مَشْهَدَهُ بِذُنُوبِي وَ عُيُوبِي وَ مُوبِقَاتِ آثَامِي وَ كَثْرَةِ سَيِّئَاتِي وَ خَطَايَايَ وَ مَا تَعْرِفُهُ مِنِّي
مُسْتَجِيراً بِعَفْوِكَ مُسْتَعِيذاً بِحِلْمِكَ رَاجِياً رَحْمَتَكَ لاَجِئاً إِلَى رُكْنِكَ عَائِذاً بِرَأْفَتِكَ
مُسْتَشْفِعاً بِوَلِيِّكَ وَ ابْنِ أَوْلِيَائِكَ وَ صَفِيِّكَ وَ ابْنِ أَصْفِيَائِكَ وَ أَمِينِكَ وَ ابْنِ أُمَنَائِكَ
وَ خَلِيفَتِكَ وَ ابْنِ خُلَفَائِكَ الَّذِينَ جَعَلْتَهُمُ الْوَسِيلَةَ إِلَى رَحْمَتِكَ وَ رِضْوَانِكَ وَ الذَّرِيعَةَ إِلَى رَأْفَتِكَ وَ غُفْرَانِكَ
اللَّهُمَّ وَ أَوَّلُ حَاجَتِي إِلَيْكَ أَنْ تَغْفِرَ لِي مَا سَلَفَ مِنْ ذُنُوبِي عَلَى كَثْرَتِهَا
وَ أَنْ تَعْصِمَنِي فِيمَا بَقِيَ مِنْ عُمْرِي وَ تُطَهِّرَ دِينِي مِمَّا يُدَنِّسُهُ وَ يَشِينُهُ وَ يُزْرِي بِهِ
وَ تَحْمِيَهُ مِنَ الرَّيْبِ وَ الشَّكِّ وَ الْفَسَادِ وَ الشِّرْكِ
وَ تُثَبِّتَنِي عَلَى طَاعَتِكَ وَ طَاعَةِ رَسُولِكَ وَ ذُرِّيَّتِهِ النُّجَبَاءِ السُّعَدَاءِ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِمْ وَ رَحْمَتُكَ وَ سَلاَمُكَ وَ بَرَكَاتُكَ
وَ تُحْيِيَنِي مَا أَحْيَيْتَنِي عَلَى طَاعَتِهِمْ وَ تُمِيتَنِي إِذَا أَمَتَّنِي عَلَى طَاعَتِهِمْ
وَ أَنْ لاَ تَمْحُوَ مِنْ قَلْبِي مَوَدَّتَهُمْ وَ مَحَبَّتَهُمْ وَ بُغْضَ أَعْدَائِهِمْ وَ مُرَافَقَةَ أَوْلِيَائِهِمْ وَ بِرَّهُمْ
وَ أَسْأَلُكَ يَا رَبِّ أَنْ تَقْبَلَ ذَلِكَ مِنِّي وَ تُحَبِّبَ إِلَيَّ عِبَادَتَكَ وَ الْمُوَاظَبَةَ عَلَيْهَا
وَ تُنَشِّطَنِي لَهَا وَ تُبَغِّضَ إِلَيَّ مَعَاصِيَكَ وَ مَحَارِمَكَ وَ تَدْفَعَنِي عَنْهَا
وَ تُجَنِّبَنِي التَّقْصِيرَ فِي صَلَوَاتِي وَ الاِسْتِهَانَةَ بِهَا وَ التَّرَاخِيَ عَنْهَا وَ تُوَفِّقَنِي لِتَأْدِيَتِهَا كَمَا فَرَضْتَ
وَ أَمَرْتَ بِهِ عَلَى سُنَّةِ رَسُولِكَ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَ آلِهِ وَ رَحْمَتُكَ وَ بَرَكَاتُكَ خُضُوعاً وَ خُشُوعاً
وَ تَشْرَحَ صَدْرِي لإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَ إِعْطَاءِ الصَّدَقَاتِ وَ بَذْلِ الْمَعْرُوفِ
وَ الْإِحْسَانِ إِلَى شِيعَةِ آلِ مُحَمَّدٍ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ وَ مُوَاسَاتِهِمْ
وَ لاَ تَتَوَفَّانِي إِلاَّ بَعْدَ أَنْ تَرْزُقَنِي حِجَّ بَيْتِكَ الْحَرَامِ وَ زِيَارَةَ قَبْرِ نَبِيِّكَ وَ قُبُورِ الْأَئِمَّةِ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ
وَ أَسْأَلُكَ يَا رَبِّ تَوْبَةً نَصُوحاً تَرْضَاهَا وَ نِيَّةً تَحْمَدُهَا وَ عَمَلاً صَالِحاً تَقْبَلُهُ
وَ أَنْ تَغْفِرَ لِي وَ تَرْحَمَنِي إِذَا تَوَفَّيْتَنِي وَ تُهَوِّنَ عَلَيَّ سَكَرَاتِ الْمَوْتِ
وَ تَحْشُرَنِي فِي زُمْرَةِ مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ صَلَوَاتُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَ عَلَيْهِمْ وَ تُدْخِلَنِي الْجَنَّةَ بِرَحْمَتِكَ
وَ تَجْعَلَ دَمْعِي غَزِيراً فِي طَاعَتِكَ وَ عَبْرَتِي جَارِيَةً فِيمَا يُقَرِّبُنِي مِنْكَ وَ قَلْبِي عَطُوفاً عَلَى أَوْلِيَائِكَ
وَ تَصُونَنِي فِي هَذِهِ الدُّنْيَا مِنَ الْعَاهَاتِ وَ الْآفَاتِ وَ الْأَمْرَاضِ الشَّدِيدَةِ وَ الْأَسْقَامِ الْمُزْمِنَةِ
وَ جَمِيعِ أَنْوَاعِ الْبَلاَءِ وَ الْحَوَادِثِ وَ تَصْرِفَ قَلْبِي عَنِ الْحَرَامِ
وَ تُبَغِّضَ إِلَيَّ مَعَاصِيَكَ وَ تُحَبِّبَ إِلَيَّ الْحَلاَلَ وَ تَفْتَحَ لِي أَبْوَابَهُ
وَ تُثَبِّتَ نِيَّتِي وَ فِعْلِي عَلَيْهِ وَ تَمُدَّ فِي عُمْرِي وَ تُغْلِقَ أَبْوَابَ الْمِحَنِ عَنِّي
وَ لاَ تَسْلُبَنِي مَا مَنَنْتَ بِهِ عَلَيَّ وَ لاَ تَسْتَرِدَّ شَيْئًا مِمَّا أَحْسَنْتَ بِهِ إِلَيَ
وَ لاَ تَنْزِعَ مِنِّي النِّعَمَ الَّتِي أَنْعَمْتَ بِهَا عَلَيَّ وَ تَزِيدَ فِيمَا خَوَّلْتَنِي وَ تُضَاعِفَهُ أَضْعَافاً مُضَاعَفَةً
وَ تَرْزُقَنِي مَالاً كَثِيراً وَاسِعاً سَائِغاً هَنِيئاً نَامِياً وَافِياً وَ عِزّاً بَاقِياً كَافِياً
وَ جَاهاً عَرِيضاً مَنِيعاً وَ نِعْمَةً سَابِغَةً عَامَّةً وَ تُغْنِيَنِي بِذَلِكَ عَنِ الْمَطَالِبِ الْمُنَكَّدَةِ وَ الْمَوَارِدِ الصَّعْبَةِ
وَ تُخَلِّصَنِي مِنْهَا مُعَافًى فِي دِينِي وَ نَفْسِي وَ وَلَدِي وَ مَا أَعْطَيْتَنِي وَ مَنَحْتَنِي
وَ تَحْفَظَ عَلَيَّ مَالِي وَ جَمِيعَ مَا خَوَّلْتَنِي وَ تَقْبِضَ عَنِّي أَيْدِيَ الْجَبَابِرَةِ وَ تَرُدَّنِي إِلَى وَطَنِي
وَ تُبَلِّغَنِي نِهَايَةَ أَمَلِي فِي دُنْيَايَ وَ آخِرَتِي وَ تَجْعَلَ عَاقِبَةَ أَمْرِي مَحْمُودَةً حَسَنَةً سَلِيمَةً
وَ تَجْعَلَنِي رَحِيبَ الصَّدْرِ وَاسِعَ الْحَالِ حَسَنَ الْخُلُقِ
بَعِيداً مِنَ الْبُخْلِ وَ الْمَنْعِ وَ النِّفَاقِ وَ الْكِذْبِ وَ الْبَهْتِ وَ قَوْلِ الزُّورِ
وَ تُرْسِخَ فِي قَلْبِي مَحَبَّةَ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ شِيعَتِهِمْ
وَ تَحْرُسَنِي يَا رَبِّ فِي نَفْسِي وَ أَهْلِي وَ مَالِي وَ وَلَدِي وَ أَهْلِ حُزَانَتِي
وَ إِخْوَانِي وَ أَهْلِ مَوَدَّتِي وَ ذُرِّيَّتِي بِرَحْمَتِكَ وَ جُودِكَ
اللَّهُمَّ هَذِهِ حَاجَاتِي عِنْدَكَ وَ قَدِ اسْتَكْثَرْتُهَا لِلُؤْمِي وَ شُحِّي وَ هِيَ عِنْدَكَ صَغِيرَةٌ حَقِيرَةٌ وَ عَلَيْكَ سَهْلَةٌ يَسِيرَةٌ
فَأَسْأَلُكَ بِجَاهِ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ عَلَيْهِ وَ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ عِنْدَكَ وَ بِحَقِّهِمْ عَلَيْكَ
وَ بِمَا أَوْجَبْتَ لَهُمْ وَ بِسَائِرِ أَنْبِيَائِكَ وَ رُسُلِكَ وَ أَصْفِيَائِكَ وَ أَوْلِيَائِكَ الْمُخْلَصِينَ مِنْ عِبَادِكَ
وَ بِاسْمِكَ الْأَعْظَمِ الْأَعْظَمِ لَمَّا قَضَيْتَهَا كُلَّهَا وَ أَسْعَفْتَنِي بِهَا وَ لَمْ تُخَيِّبْ أَمَلِي وَ رَجَائِي
اللَّهُمَّ وَ شَفِّعْ صَاحِبَ هَذَا الْقَبْرِ فِيَ
يَا سَيِّدِي يَا وَلِيَّ اللَّهِ يَا أَمِينَ اللَّهِ أَسْأَلُكَ أَنْ تَشْفَعَ لِي إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَ جَلَّ فِي هَذِهِ الْحَاجَاتِ كُلِّهَا
بِحَقِّ آبَائِكَ الطَّاهِرِينَ وَ بِحَقِّ أَوْلاَدِكَ الْمُنْتَجَبِينَ
فَإِنَّ لَكَ عِنْدَ اللَّهِ تَقَدَّسَتْ أَسْمَاؤُهُ الْمَنْزِلَةَ الشَّرِيفَةَ وَ الْمَرْتَبَةَ الْجَلِيلَةَ وَ الْجَاهَ الْعَرِيضَ
اللَّهُمَّ لَوْ عَرَفْتُ مَنْ هُوَ أَوْجَهُ عِنْدَكَ مِنْ هَذَا الْإِمَامِ وَ مِنْ آبَائِهِ وَ أَبْنَائِهِ الطَّاهِرِينَ عَلَيْهِمُ السَّلاَمُ وَ الصَّلاَةُ
لَجَعَلْتُهُمْ شُفَعَائِي وَ قَدَّمْتُهُمْ أَمَامَ حَاجَتِي وَ طَلِبَاتِي هَذِهِ
فَاسْمَعْ مِنِّي وَ اسْتَجِبْ لِي وَ افْعَلْ بِي مَا أَنْتَ أَهْلُهُ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
اللَّهُمَّ وَ مَا قَصُرَتْ عَنْهُ مَسْأَلَتِي وَ عَجَزَتْ عَنْهُ قُوَّتِي وَ لَمْ تَبْلُغْهُ فِطْنَتِي مِنْ صَالِحِ دِينِي وَ دُنْيَايَ وَ آخِرَتِي
فَامْنُنْ بِهِ عَلَيَّ وَ احْفَظْنِي وَ احْرُسْنِي وَ هَبْ لِي وَ اغْفِرْ لِي وَ مَنْ أَرَادَنِي بِسُوءٍ أَوْ مَكْرُوهٍ مِنْ شَيْطَانٍ مَرِيدٍ
أَوْ سُلْطَانٍ عَنِيدٍ أَوْ مُخَالِفٍ فِي دِينٍ أَوْ مُنَازِعٍ فِي دُنْيَا أَوْ حَاسِدٍ عَلَيَّ نِعْمَةً أَوْ ظَالِمٍ أَوْ بَاغٍ
فَاقْبِضْ عَنِّي يَدَهُ وَ اصْرِفْ عَنِّي كَيْدَهُ وَ اشْغَلْهُ (عَنِّي) بِنَفْسِهِ وَ اكْفِنِي شَرَّهُ وَ شَرَّ أَتْبَاعِهِ وَ شَيَاطِينِهِ
وَ أَجِرْنِي مِنْ كُلِّ مَا يَضُرُّنِي وَ يُجْحِفُ بِي وَ أَعْطِنِي جَمِيعَ الْخَيْرِ كُلِّهِ (كُلَّهُ) مِمَّا أَعْلَمُ وَ مِمَّا لاَ أَعْلَمُ
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ اغْفِرْ لِي وَ لِوَالِدَيَّ وَ لِإِخْوَانِي وَ أَخَوَاتِي
وَ أَعْمَامِي وَ عَمَّاتِي وَ أَخْوَالِي وَ خَالاَتِي وَ أَجْدَادِي وَ جَدَّاتِي وَ أَوْلاَدِهِمْ وَ ذَرَارِيهِمْ
وَ أَزْوَاجِي وَ ذُرِّيَاتِي وَ أَقْرِبَائِي وَ أَصْدِقَائِي وَ جِيرَانِي وَ إِخْوَانِي فِيكَ مِنْ أَهْلِ الشَّرْقِ وَ الْغَرْبِ
وَ لِجَمِيعِ أَهْلِ مَوَدَّتِي مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَ الْمُؤْمِنَاتِ الْأَحْيَاءِ مِنْهُمْ وَ الْأَمْوَاتِ
وَ لِجَمِيعِ مَنْ عَلَّمَنِي خَيْراً أَوْ تَعَلَّمَ مِنِّي عِلْماً
اللَّهُمَّ أَشْرِكْهُمْ فِي صَالِحِ دُعَائِي وَ زِيَارَتِي لِمَشْهَدِ حُجَّتِكَ وَ وَلِيِّكَ
وَ أَشْرِكْنِي فِي صَالِحِ أَدْعِيَتِهِمْ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
وَ بَلِّغْ وَلِيَّكَ مِنْهُمُ السَّلاَمَ وَ السَّلاَمُ عَلَيْكَ وَ رَحْمَةُ اللَّهِ وَ بَرَكَاتُهُ يَا سَيِّدِي يَا مَوْلاَيَ يَا فُلاَنَ بْنَ فُلاَنٍ
بجاى اين كلمه نام امامى را كه زيارت مىكند و نام پدر آن بزرگوار را بگويد
صَلَّى اللَّهُ عَلَيْكَ وَ عَلَى رُوحِكَ وَ بَدَنِكَ أَنْتَ وَسِيلَتِي إِلَى اللَّهِ وَ ذَرِيعَتِي إِلَيْهِ وَ لِي حَقُّ مُوَالاَتِي وَ تَأْمِيلِي
فَكُنْ شَفِيعِي إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَ جَلَّ فِي الْوُقُوفِ عَلَى قِصَّتِي هَذِهِ وَ صَرْفِي عَنْ مَوْقِفِي هَذَا بِالنُّجْحِ بِمَا سَأَلْتُهُ كُلِّهِ بِرَحْمَتِهِ وَ قُدْرَتِهِ
اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي عَقْلاً كَامِلاً وَ لُبّاً رَاجِحاً وَ عِزّاً بَاقِياً وَ قَلْباً زَكِيّاً
وَ عَمَلاً كَثِيراً وَ أَدَباً بَارِعاً وَ اجْعَلْ ذَلِكَ كُلَّهُ لِي وَ لاَ تَجْعَلْهُ عَلَيَّ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
अल्लाहुम्मा इन्नी ज़ुर्तु हाज़ा-ल-इमामा मुक़िर्रन बि-इमामतिही मुअतक़िदन लि-फ़र्ज़ि ताअतिही
फ़-क़सद्तु मश्हदहू बि-ज़ुनूबी व-उयूबी व-मूबिक़ाति आसामी व-कस्रति सैय्यिआती व-ख़तायाया व-मा तअरिफ़ुहू मिन्नी
मुस्तजीरन बि-अफ़्विका मुस्तईज़न बि-हिल्मिका राजियन रहमतका लाजिअन इला रुक्निका आइज़न बि-रअफ़तिका
मुस्तश्फ़िअन बि-वलीय्यिका व-इब्नि औलियाइका व-सफ़िय्यिका व-इब्नि अस्फ़ियाइका व-अमीनीका व-इब्नि उमनाइका
व-ख़लीफ़तिका व-इब्नि ख़ुलफ़ाइका अल्लज़ीना जअल्तहुमुल-वसीलता इला रहमतिका व-रिज़वानिका व-ज़रीअता इला रअफ़तिका व-ग़ुफ़रानिका
अल्लाहुम्मा व-अव्वलु हाजती इलैका अन तग़्फ़िरा ली मा सलफ़ा मिन ज़ुनूबी अला कसरतिहा
व-अन तअसिमनी फीमा बक़िया मिन उम्रि व-तुतह्हिरा दीनी मिम्मा युदननिसुहू व-यशीनुहू व-युज़री बिही
व-तह्मीहू मिनर-रैबि व-श्शक्कि व-ल-फ़सादि व-श्शिर्क
व-तुसब्बितनी अला ताअतिक व-ताअति रसूलिक व-ज़ुर्रिय्यतिहि न-नुजबाइ स-सुअदाइ सलवातुका अलैहिम व-रहमतुका व-सलामुका व-बरकातुका
व-तुह्यीनी मा अह्यैतनी अला ताअतिहिम व-तुमीतनी इज़ा अमत्तनी अला ताअतिहिम
व-अन ला तम्हूवा मिन क़ल्बी मवद्दतहुम व-महब्बतहुम व-बुग़्दा अदाइहिम व-मुराफ़क़ता औलियाइहिम व-बिर्रहुम
व-असअलुका या रब्बि अन तक़बला ज़ालिका मिन्नी व-तुहब्बिबा इलैय्या इबादतका व-ल-मुवाज़बत अलेहा
व-तुनश्शितनी लहा व-तुबग़्ग़िदा इलैय्या मआसियका व-महारिमका व-तदफ़अनी अन्हा
व-तुजन्निबनी त-तक़्सीरा फी सलवाती व-ल-इस्तिहानता बिहा व-त-तराख़ी अन्हा व-तुवफ़्फ़िक़नी लि-तअदियतिहा कमा फ़रज़्ता
व-अमरता बिही अला सुन्नति रसूलिका सलवातुका अलैहि व-आलिही व-रहमतुका व-बरकातुका ख़ुज़ूअन व-ख़ुशूअन
व-तश्रह सद्री लि-ईताइज़-ज़काति व-इअताइ स-सदक़ाति व-बज़्लिल-मअरूफ़
व-ल-इह्सानि इला शीयअति आलि मुहम्मद अलैहिमुस-सलाम व-मुवासातिहिम
व-ला ततेवफ़्फ़ानी इल्ला बअदा अन तरज़ुक़नी हज्जा बैतिकल-हराम व-ज़ियारता क़ब्रि नबिय्यिका व-क़ुबूरिल-अइम्मति अलैहिमुस-सलाम
व-असअलुका या रब्बि तौबतन नसूहन तरज़ाहा व-निय्यतन तह्मदुहा व-अमलन सालिहन तक़बलुहू
व-अन तग़्फ़िरा ली व-तरहमनी इज़ा तवफ़्फ़ैतनी व-तुहव्विना अलैय्या सकरातिल-मौत
व-तह्शुरनी फी ज़ुमरति मुहम्मद व-आलिही सलवातुल्लाहि अलैहि व-अलैहिम व-तुदख़िलनी ल-जन्नता बिरहमतिका
व-तजअल दमई ग़ज़ीरन फी ताअतिक व-अबरती जारियतन फीमा युक़र्रिबुनी मिंका व-क़ल्बी अतूफ़न अला औलियाइका
व-तसूननी फी हाज़िहिद-दुन्या मिनल-आहाति व-ल-आफ़ाति व-ल-अमरादिश-शदीदति व-ल-अस्क़ामिल-मुज़्मिनह
व-जमीई अनवाइ-ल-बलाइ व-ल-हवादिस व-तस्रिफ़ा क़ल्बी अनिल-हराम
व-तुबग़्ग़िदा इलैय्या मआसियका व-तुहब्बिबा इलैय्या ल-हलाल व-तफ़तह ली अबवाबहू
व-तुसब्बिता निय्यती व-फ़िअली अलैहि व-तमुद्दा फी उम्रि व-तुग़्लिक़ा अबवाबल-मिहन अन्नी
व-ला तसलुबनी मा मनन्ता बिही अलैय्या व-ला तस्तरिद्दा शैअन मिम्मा अहसन्ता बिही इलैय्या
व-ला तन्ज़िअ मिन्नी न-निअमल-लती अनअमता बिहा अलैय्या व-तज़ीदा फीमा ख़व्वल्तनी व-तुज़ाइफ़हू अदआफ़न मुदआफ़ह
व-तरज़ुक़नी मालं कसीरन वासिअन साइग़न हनीअन नामियन वाफ़ियन व-इज़्ज़न बाक़ियन काफ़ियन
व-जाहन अरीज़न मनीअन व-निअमतन साबिग़तन आम्मतन व-तुग़नीनी बिज़ालिका अनिल-मतालिबिल-मुनक्कदति व-ल-मवारिदिस-सअबह
व-तुख़ल्लिसनी मिन्हा मुआफ़न फी दीनी व-नफ़्सी व-वलदी व-मा अअतैतनी व-मनह्तनी
व-तहफ़ज़ा अलैय्या माली व-जमीअ मा ख़व्वल्तनी व-तक़बिदा अन्नी ऐदियल-जबारह व-तरुद्दनी इला वतनी
व-तुबल्लिग़नी निहायत अमली फी दुन्याया व-आख़िरती व-तजअला आक़िबत अम्री महमूदतन हसनतन सलीमतन
व-तजअलनी रहीबस-सद्रि वासिअल-हाल हसनल-ख़ुलुक़
बईदन मिनल-बुख़्लि व-ल-मनअि व-न-निफ़ाक़ि व-ल-किज़्बि व-ल-बह्ति व-क़ौलिज़-ज़ूर
व-तुरसिख़ा फी क़ल्बी महब्बत मुहम्मद व-आलि मुहम्मद व-शीअतिहिम
व-तह्रुसनी या रब्बि फी नफ़्सी व-अह्ली व-माली व-वलदी व-अह्लि हुज़ानती
व-इख़वानी व-अह्लि मवद्दती व-ज़ुर्रिय्यती बिरहमतिका व-जूदिका
अल्लाहुम्मा हाज़िही हाजाती इंदका व-क़दिस्तक्थर्तुहा लि-लु'मी व-शुह्ही व-हिया इंदका सग़ीरतन हक़ीरतन व-अलैका सहलतन यसीरह
फ़-असअलुका बिज़ाहि मुहम्मद व-आलि मुहम्मद अलैहि व-अलैहिमुस-सलाम इंदका व-बिहक़्क़िहिम अलैक
व-बिमा औजब्त लहुम व-बिसाइरि अंबियाइका व-रुसुलिका व-अस्फ़ियाइका व-औलियाइकल-मुख़लसीन मिन इबादिका
व-बिस्मिकल-अज़मिल-अज़म लम्मा क़ज़ैतहा कुल्लहा व-असअफ़्तनी बिहा व-लम तुख़ैय्यिब अमली व-रजाइ
अल्लाहुम्मा व-शफ़्फ़िअ साहिबा हाज़ल-क़ब्रि फ़िय्या
ऐ अल्लाह! बेशक मैं इस इमाम की ज़ियारत करने आया हूँ, उनकी इमामत का इक़रार करते हुए और उनकी इताअत को फ़र्ज़ मानते हुए।
मैं अपने गुनाहों, अपनी कमज़ोरियों, अपने बड़े गुनाहों, अपनी बहुत-सी बुराइयों और ख़ताओं के साथ, और जो कुछ तू मुझ में जानता है उसके साथ, उनके मज़ार की तरफ़ आया हूँ।
मैं तेरी माफ़ी का सहारा लेते हुए, तेरी हिल्म (बरदाश्त) की पनाह माँगते हुए, तेरी रहमत की उम्मीद रखते हुए, तेरे मज़बूत सहारे की तरफ़ झुकते हुए और तेरी मेहरबानी में पनाह चाहता हुआ आया हूँ।
मैं तेरे वली और तेरे औलिया के फ़र्ज़ंद, तेरे चुने हुए बंदे और उनके फ़र्ज़ंद, तेरे अमीन और उनके फ़र्ज़ंद, और तेरे ख़लीफ़ा और उनके फ़र्ज़ंद के ज़रिये सिफ़ारिश चाहता हूँ, जिन्हें तूने अपनी रहमत और अपनी रज़ामंदी तक पहुँचने का ज़रिया और अपनी मेहरबानी व बख़्शिश तक पहुँचने का वसीला बनाया है।
ऐ अल्लाह! मेरी सबसे पहली ज़रूरत यह है कि तू मेरे पिछले तमाम गुनाहों को उनकी बहुतायत के बावजूद माफ़ कर दे।
और मेरे बाक़ी जीवन में मुझे गुनाह से महफ़ूज़ रखे, मेरे दीन को हर उस चीज़ से पाक कर दे जो उसे गंदा करती है, बदनुमा बनाती है या उसे ज़लील करती है।
और उसे शक, वहम, फ़साद और शिर्क से बचाए।
और मुझे अपनी इताअत पर, अपने रसूल की इताअत पर और उनके नेक व कामयाब अहले-बैत की इताअत पर क़ायम रखे; उन पर तेरी सलात, रहमत, सलाम और बरकतें हों।
और जब तक तू मुझे ज़िंदगी दे, मुझे उन्हीं की इताअत पर ज़िंदा रखे, और जब मुझे मौत दे तो उन्हीं की इताअत पर मौत दे।
और मेरे दिल से उनकी मोहब्बत और दोस्ती को मिटने न दे, और उनके दुश्मनों से बेज़ारी, और उनके औलिया की सोहबत और उनके साथ भलाई को बाक़ी रखे।
ऐ मेरे रब! मैं तुझ से सवाल करता हूँ कि तू इसे मेरी तरफ़ से क़ुबूल फ़रमा, और अपनी इबादत मुझे प्यारी बना दे, और उस पर पाबंदी अता कर।
और मुझे इबादत के लिए फुर्ती दे, और अपने गुनाहों और हराम चीज़ों से मुझे नफ़रत दिला दे, और मुझे उनसे दूर रखे।
और मेरी नमाज़ों में कोताही, उन्हें हल्का समझने और उनमें सुस्ती से मुझे बचा, और मुझे उन्हें उसी तरह अदा करने की तौफ़ीक़ दे जैसा तूने फ़र्ज़ किया और अपने रसूल की सुन्नत के मुताबिक़ हुक्म दिया; उनके और उनके अहले-बैत पर तेरी रहमत और बरकतें हों, पूरी विनम्रता और ख़ुशू के साथ।
और मेरे दिल को ज़कात अदा करने, सदक़ा देने और नेकी फैलाने के लिए खोल दे।
और आले-मुहम्मद के शियों के साथ भलाई और हमदर्दी की तौफ़ीक़ दे, उन पर सलाम हो।
और मुझे मौत न दे जब तक कि तू मुझे अपने हरम के हज और अपने नबी की क़ब्र और इमामों की क़ब्रों की ज़ियारत न नसीब फ़रमा दे।
और मुझे ऐसी सच्ची तौबा अता कर जिसे तू पसंद करे, ऐसी नियत जिसे तू सराहे, और ऐसा नेक अमल जिसे तू क़ुबूल करे।
और जब तू मुझे मौत दे तो मुझे माफ़ कर दे और मुझ पर रहमत फ़रमा, और मौत की सख़्तियों को मुझ पर आसान कर दे।
और मुझे मुहम्मद और उनके अहले-बैत के साथ उठाए, उन पर अल्लाह की सलात हो, और मुझे अपनी रहमत से जन्नत में दाख़िल फ़रमा।
और मेरी आँखों को अपनी इताअत में ज़्यादा रोने वाला बना दे, और मेरे आँसू उन कामों में बहते रहें जो मुझे तेरे क़रीब करें, और मेरे दिल को तेरे औलिया के लिए नरम बना दे।
और इस दुनिया में मुझे आफ़तों, बीमारियों, सख़्त और पुरानी बीमारीयों, हर क़िस्म की मुसीबतों और हादसों से बचा।
और मेरे दिल को हराम से फेर दे।
और मुझे गुनाहों से नफ़रत और हलाल से मोहब्बत अता कर, और उसके दरवाज़े मेरे लिए खोल दे।
और मेरी नियत और मेरे अमल को उस पर मज़बूत कर दे, मेरी उम्र बढ़ा दे और मेरे लिए आज़माइशों के दरवाज़े बंद कर दे।
और जो नेमतें तूने मुझे दी हैं उनसे मुझे महरूम न कर, और जो एहसान तूने किए हैं उन्हें वापस न ले।
और अपनी दी हुई नेमतें मुझसे छीन न ले, बल्कि जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें बढ़ोतरी फ़रमा और कई गुना बढ़ा दे।
और मुझे बहुत सा, खुला, पाक, लज़ीज़, बढ़ने वाला और काफ़ी माल अता कर, और बाक़ी रहने वाली इज़्ज़त और काफ़ी हैसियत अता कर।
और बड़ी, मज़बूत इज़्ज़त और आम वसीअ नेमतें दे, और इनके ज़रिये मुझे ज़िल्लत वाले सवालों और मुश्किल रास्तों से बेनियाज़ कर दे।
और मुझे मेरे दीन, मेरी जान, मेरी औलाद और जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें आफ़ियत के साथ निजात दे।
और मेरे माल और हर उस चीज़ की हिफ़ाज़त कर जो तूने मेरे हवाले की है, ज़ालिमों के हाथ मुझसे रोक दे और मुझे सलामती के साथ मेरे वतन लौटा दे।
और मुझे मेरी दुनिया और आख़िरत की आख़िरी उम्मीद तक पहुँचा दे, और मेरे अंजाम को अच्छा, पसंदीदा और सलामत बना दे।
और मुझे खुले दिल वाला, खुशहाल और अच्छे अख़लाक़ वाला बना दे।
और मुझे बुख़्ल, रोक-टोक, निफ़ाक़, झूठ, तोहमत और झूठी गवाही से दूर रख।
और मेरे दिल में मुहम्मद और उनके अहले-बैत और उनके शियों की मोहब्बत जमा दे।
और ऐ मेरे रब! मेरी जान, मेरे घर वालों, मेरे माल, मेरी औलाद, मेरे ज़िम्मे वालों, मेरे भाइयों, मेरे चाहने वालों और मेरी नस्ल की हिफ़ाज़त फ़रमा, अपनी रहमत और अपने फ़ज़्ल से।
ऐ अल्लाह! ये मेरी ज़रूरतें हैं, जिन्हें मैंने अपनी कमज़ोरी और लालच की वजह से बहुत बड़ा समझा, हालाँकि तेरे नज़दीक ये बहुत छोटी और तुझ पर बहुत आसान हैं।
तो मैं तुझसे मुहम्मद और उनके अहले-बैत के वसीले से सवाल करता हूँ, जिन पर सलाम हो, और उनके हक़ के ज़रिये।
और उन सब नबियों, रसूलों, चुने हुए बंदों और औलिया के ज़रिये जिनको तूने खास किया।
और तेरे सबसे बड़े नाम के वसीले से कि तू मेरी सारी दुआएँ पूरी कर दे, मुझे उनसे राहत दे और मेरी उम्मीदों को न तोड़े।
ऐ अल्लाह! इस क़ब्र वाले को मेरा सिफ़ारिश करने वाला बना दे।
ऐ मेरे सरदार, ऐ अल्लाह के वली, ऐ अल्लाह के अमीन! मैं आपसे दरख़्वास्त करता हूँ कि अल्लाह के सामने मेरी सिफ़ारिश करें।
क्योंकि अल्लाह के नज़दीक आपका बड़ा मक़ाम, बुलंद दर्जा और वसीअ शान है।
ऐ अल्लाह! अगर मैं जानता कि इस इमाम और उनके पाक बाप-दादाओं और औलाद से ज़्यादा तेरा कोई क़रीबी है, तो मैं उन्हें अपनी सिफ़ारिश के लिए पेश करता।
तो मेरी बात सुन, मेरी दुआ क़ुबूल कर और मेरे साथ वही कर जो तेरी शान के मुताबिक़ है, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।
और जिन बातों तक मेरी दुआ नहीं पहुँची, जिन पर मेरी ताक़त क़ासिर है और जिन तक मेरी समझ नहीं पहुँची, जो मेरे दीन, मेरी दुनिया और मेरी आख़िरत के लिए बेहतर हैं, वो सब मुझे अता कर।
और मेरी हिफ़ाज़त कर, मुझे महफ़ूज़ रख, मुझे अता कर और मुझे माफ़ कर दे।
और जो भी मुझे नुक़सान पहुँचाना चाहे — चाहे शैतान हो, ज़ालिम हाकिम हो, दीन या दुनिया का दुश्मन हो, हसद करने वाला हो या ज़ालिम — उसके हाथ मुझसे रोक दे।
और उसकी चालों को मुझसे दूर कर दे, उसे उसी में उलझा दे और मुझे उसके शर से और उसके साथियों और शैतानों से बचा ले।
और जो चीज़ मुझे नुक़सान पहुँचाए उससे मुझे पनाह दे, और मुझे हर तरह की भलाई अता कर — चाहे मैं जानता हूँ या नहीं जानता।
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनके अहले-बैत पर रहमत भेज, और मुझे, मेरे वालिदैन, मेरे भाई-बहनों, रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों और हर मोमिन मर्द-औरत को माफ़ फ़रमा, चाहे वो ज़िंदा हों या मर चुके हों।
और हर उस शख़्स को भी जिसने मुझे भलाई सिखाई या मुझसे कुछ सीखा।
ऐ अल्लाह! मेरी दुआओं और तेरे वली की ज़ियारत के सवाब में उन्हें भी शरीक फ़रमा, और उनकी नेक दुआओं में मुझे भी शरीक कर।
और अपने वली तक उनकी तरफ़ से सलाम पहुँचा दे।
और आप पर सलाम हो, अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों, ऐ मेरे सरदार, ऐ मेरे मौला।